यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला: पर्म तेल रिफाइनरी और मैरिनोवका एयरबेस निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने 21 अगस्त को पुष्टि की कि गुरुवार रात यूक्रेनी लंबी दूरी के हमलों ने रूस की पर्म तेल रिफाइनरी — जो सीमा से 1,600 किलोमीटर से अधिक दूर है — और वोल्गोग्राद क्षेत्र में स्थित मैरिनोवका सैन्य हवाई अड्डे को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। ज़ेलेंस्की के अनुसार, काला सागर क्षेत्र में भी हमलों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ज़ेलेंस्की ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा कि यूक्रेन अपनी 'दीर्घ-दूरी प्रतिबंध और जवाबी कार्रवाई रणनीति' को जारी रखे हुए है, जिसका उद्देश्य युद्ध के परिणामों को 'वहीं वापस पहुँचाना है जहाँ से यह युद्ध शुरू हुआ था।' इसके अतिरिक्त, पहले किए गए हमलों के पुष्टि किए गए नतीजे भी सामने आए हैं।
अख्तुबिंस्क हवाई अड्डे पर — जो अग्रिम मोर्चे से लगभग 600 किलोमीटर दूर है — रूस का एक Su-34 लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके साथ ही, अग्रिम मोर्चे से लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रिमोर्स्को-अख्तार्स्क में ड्रोन के भंडारण, तैयारी और लॉन्च केंद्र को भी निशाना बनाया गया।
रूसी हमलों का जवाब
ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि रूस के घातक हमले भी लगातार जारी हैं। बुधवार देर रात रूस ने यूक्रेन पर एक बड़ा संयुक्त हमला किया, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का एक साथ इस्तेमाल किया गया। इस हमले का स्पष्ट उद्देश्य नागरिक बुनियादी ढाँचे को अधिकतम नुकसान पहुँचाना था।
कीव और उसके आसपास के इलाकों के साथ-साथ ओडेसा और चेर्निहीव क्षेत्रों में भी भारी नुकसान की सूचना है। यह हमला रूस की उस रणनीति का हिस्सा है जो वह लंबे समय से तैयार कर रहा था, ऐसा ज़ेलेंस्की ने कहा।
नए प्रतिबंधों की घोषणा
ज़ेलेंस्की ने रूस के सैन्य-औद्योगिक ढाँचे और रूस का समर्थन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नए प्रतिबंधों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपने प्रतिबंध उपायों को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय में आगे बढ़ाएगा।
रणनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन-रूस युद्ध अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों के बीच गहरे मोर्चे पर हमलों की प्रवृत्ति तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि 1,600 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पर्म रिफाइनरी को निशाना बनाना यूक्रेन की अब तक की सबसे लंबी दूरी की सफल कार्रवाइयों में से एक है, जो रूस की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का संकेत देती है। आने वाले हफ्तों में यूक्रेन के अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की प्रतिबंध नीति और युद्धक्षेत्र की स्थिति दोनों पर नज़र बनी रहेगी।