यूएनएड्स की चेतावनी: वैश्विक एचआईवी फंडिंग 18% घटकर दो दशकों के निचले स्तर पर, 2030 का लक्ष्य खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
यूएनएड्स (UNAIDS) ने 28 जुलाई 2025 को जारी अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि वैश्विक एचआईवी फंडिंग में आई भारी गिरावट से एचआईवी महामारी के दोबारा पाँव पसारने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एचआईवी रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता 18 प्रतिशत घटकर मात्र 7.3 अरब डॉलर रह गई — जो लगभग दो दशकों का सबसे निचला स्तर है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यदि तत्काल वैश्विक प्रतिबद्धता नहीं बढ़ाई गई, तो दशकों की कड़ी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।
फंडिंग में गिरावट: क्या हुआ और क्यों
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका ने एचआईवी से जुड़े सभी कार्यक्रमों की फंडिंग पर अस्थायी रोक लगा दी। कुछ दिनों बाद जीवनरक्षक उपचार संबंधी वित्तीय सहायता आंशिक रूप से बहाल की गई, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं के लिए धनराशि सीमित रखी गई। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका वैश्विक एचआईवी फंडिंग का लगभग 75 प्रतिशत योगदान करता था — यानी इस कटौती का असर वैश्विक स्तर पर सीधा और तात्कालिक रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले से ही राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। इबोला जैसी स्वास्थ्य आपदाओं ने भी एचआईवी-रोधी प्रयासों से संसाधन और ध्यान खींचा है।
ज़मीनी असर: उप-सहारा अफ्रीका सबसे अधिक प्रभावित
यूएनएड्स के अनुसार, फंडिंग में कमी का सबसे अधिक असर एचआईवी रोकथाम, जाँच और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है — यानी ठीक वे सेवाएँ प्रभावित हुई हैं जो सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक पहुँचती हैं। कैमरून, नाइजीरिया और ज़ाम्बिया के राष्ट्रीय आँकड़ों के अनुसार, प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) दवा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
उप-सहारा अफ्रीका में वैश्विक स्तर पर लगभग आधे नए एचआईवी संक्रमण दर्ज होते हैं। हालाँकि कुछ देशों ने घरेलू स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर विदेशी सहायता में आई कमी की आंशिक भरपाई की, फिर भी कुल एचआईवी संसाधनों में 6 प्रतिशत की समग्र गिरावट दर्ज की गई। सभी देशों के लिए घरेलू स्तर पर यह कमी पूरी करना संभव नहीं है।
2030 का लक्ष्य: पटरी से उतरता दिखाई दे रहा है
यूएनएड्स ने दोहराया कि वर्ष 2030 तक एड्स को समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य फिलहाल खतरे में है। पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 12 लाख लोग एचआईवी से नए संक्रमित हुए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि नए एचआईवी संक्रमणों और एड्स से होने वाली मौतों में आई गिरावट का रुझान पलट सकता है, यदि वित्तीय प्रतिबद्धता तत्काल नहीं बढ़ाई गई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यूएनएड्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता के बावजूद एचआईवी-रोधी प्रयासों को प्राथमिकता देनी होगी। एजेंसी का कहना है कि वित्तीय सहायता में आई बाधाएँ न केवल उपचार, बल्कि रोकथाम और समुदाय-स्तरीय सेवाओं को भी कमज़ोर कर रही हैं — जो दीर्घकालिक दृष्टि से कहीं अधिक महँगा साबित होगा।
आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अन्य दाता देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ अमेरिकी कटौती की भरपाई के लिए आगे आते हैं, या वर्ष 2030 का लक्ष्य महज एक कागज़ी संकल्प बनकर रह जाता है।