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यूएनएड्स की चेतावनी: वैश्विक एचआईवी फंडिंग 18% घटकर दो दशकों के निचले स्तर पर, 2030 का लक्ष्य खतरे में

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यूएनएड्स की चेतावनी: वैश्विक एचआईवी फंडिंग 18% घटकर दो दशकों के निचले स्तर पर, 2030 का लक्ष्य खतरे में

सारांश

यूएनएड्स की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक एचआईवी फंडिंग दो दशकों के निचले स्तर पर आ गई है — अमेरिकी कटौती के बाद। कैमरून, नाइजीरिया और ज़ाम्बिया में PrEP दवा पाने वालों की संख्या 50% से अधिक घटी। 2030 तक एड्स उन्मूलन का लक्ष्य अब पटरी से उतरता दिख रहा है।

मुख्य बातें

यूएनएड्स ने 28 जुलाई 2025 को 60 पन्नों की रिपोर्ट जारी कर वैश्विक एचआईवी फंडिंग में भारी गिरावट की चेतावनी दी।
वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय एचआईवी फंडिंग 18% घटकर 7.3 अरब डॉलर — लगभग दो दशकों का सबसे निचला स्तर।
राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद अमेरिका ने एचआईवी कार्यक्रमों की फंडिंग पर अस्थायी रोक लगाई; अमेरिका पहले वैश्विक एचआईवी फंडिंग का 75% देता था।
कैमरून, नाइजीरिया और ज़ाम्बिया में PrEP दवा पाने वालों की संख्या में 50% से अधिक की गिरावट।
पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 12 लाख नए एचआईवी संक्रमण दर्ज हुए।
2030 तक एड्स उन्मूलन का वैश्विक लक्ष्य फिलहाल पटरी से उतरता दिखाई दे रहा है।

यूएनएड्स (UNAIDS) ने 28 जुलाई 2025 को जारी अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि वैश्विक एचआईवी फंडिंग में आई भारी गिरावट से एचआईवी महामारी के दोबारा पाँव पसारने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एचआईवी रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता 18 प्रतिशत घटकर मात्र 7.3 अरब डॉलर रह गई — जो लगभग दो दशकों का सबसे निचला स्तर है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यदि तत्काल वैश्विक प्रतिबद्धता नहीं बढ़ाई गई, तो दशकों की कड़ी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।

फंडिंग में गिरावट: क्या हुआ और क्यों

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका ने एचआईवी से जुड़े सभी कार्यक्रमों की फंडिंग पर अस्थायी रोक लगा दी। कुछ दिनों बाद जीवनरक्षक उपचार संबंधी वित्तीय सहायता आंशिक रूप से बहाल की गई, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं के लिए धनराशि सीमित रखी गई। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका वैश्विक एचआईवी फंडिंग का लगभग 75 प्रतिशत योगदान करता था — यानी इस कटौती का असर वैश्विक स्तर पर सीधा और तात्कालिक रहा।

यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले से ही राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। इबोला जैसी स्वास्थ्य आपदाओं ने भी एचआईवी-रोधी प्रयासों से संसाधन और ध्यान खींचा है।

ज़मीनी असर: उप-सहारा अफ्रीका सबसे अधिक प्रभावित

यूएनएड्स के अनुसार, फंडिंग में कमी का सबसे अधिक असर एचआईवी रोकथाम, जाँच और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है — यानी ठीक वे सेवाएँ प्रभावित हुई हैं जो सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक पहुँचती हैं। कैमरून, नाइजीरिया और ज़ाम्बिया के राष्ट्रीय आँकड़ों के अनुसार, प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) दवा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

उप-सहारा अफ्रीका में वैश्विक स्तर पर लगभग आधे नए एचआईवी संक्रमण दर्ज होते हैं। हालाँकि कुछ देशों ने घरेलू स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर विदेशी सहायता में आई कमी की आंशिक भरपाई की, फिर भी कुल एचआईवी संसाधनों में 6 प्रतिशत की समग्र गिरावट दर्ज की गई। सभी देशों के लिए घरेलू स्तर पर यह कमी पूरी करना संभव नहीं है।

2030 का लक्ष्य: पटरी से उतरता दिखाई दे रहा है

यूएनएड्स ने दोहराया कि वर्ष 2030 तक एड्स को समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य फिलहाल खतरे में है। पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 12 लाख लोग एचआईवी से नए संक्रमित हुए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि नए एचआईवी संक्रमणों और एड्स से होने वाली मौतों में आई गिरावट का रुझान पलट सकता है, यदि वित्तीय प्रतिबद्धता तत्काल नहीं बढ़ाई गई।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यूएनएड्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता के बावजूद एचआईवी-रोधी प्रयासों को प्राथमिकता देनी होगी। एजेंसी का कहना है कि वित्तीय सहायता में आई बाधाएँ न केवल उपचार, बल्कि रोकथाम और समुदाय-स्तरीय सेवाओं को भी कमज़ोर कर रही हैं — जो दीर्घकालिक दृष्टि से कहीं अधिक महँगा साबित होगा।

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अन्य दाता देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ अमेरिकी कटौती की भरपाई के लिए आगे आते हैं, या वर्ष 2030 का लक्ष्य महज एक कागज़ी संकल्प बनकर रह जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो पूरा तंत्र लड़खड़ा गया। सवाल यह नहीं है कि ट्रंप ने कटौती क्यों की — सवाल यह है कि दशकों में किसी ने इस एकल-दाता निर्भरता को चुनौती क्यों नहीं दी। उप-सहारा अफ्रीका में PrEP की 50% गिरावट एक मानवीय संकट है जो अभी सुर्खियों में कम है, लेकिन अगले पाँच वर्षों में संक्रमण के आँकड़ों में दिखेगी। 2030 का लक्ष्य बचाना है तो केवल बयानबाज़ी नहीं — वैकल्पिक वित्तपोषण ढाँचे की तत्काल ज़रूरत है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनएड्स की ताज़ा एचआईवी रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
यूएनएड्स ने 28 जुलाई 2025 को जारी अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट में बताया कि वैश्विक एचआईवी फंडिंग 18% घटकर 7.3 अरब डॉलर पर आ गई है, जो दो दशकों का सबसे निचला स्तर है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इससे नए संक्रमणों और एड्स से होने वाली मौतों में आई गिरावट का रुझान पलट सकता है।
अमेरिका की एचआईवी फंडिंग कटौती का क्या असर पड़ा?
जनवरी 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद अमेरिका ने एचआईवी कार्यक्रमों की फंडिंग पर अस्थायी रोक लगाई। चूँकि अमेरिका वैश्विक एचआईवी फंडिंग का लगभग 75% देता था, इस कटौती से अधिकांश देशों में रोकथाम और समुदाय-आधारित सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं।
2030 तक एड्स उन्मूलन का लक्ष्य क्यों खतरे में है?
यूएनएड्स के अनुसार, फंडिंग में गिरावट और राजनीतिक अस्थिरता के कारण 2030 तक एड्स समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य पटरी से उतरता दिख रहा है। पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 12 लाख नए एचआईवी संक्रमण दर्ज हुए, और PrEP जैसी रोकथाम सेवाओं तक पहुँच घट रही है।
उप-सहारा अफ्रीका पर इस फंडिंग कटौती का विशेष असर क्यों पड़ा?
उप-सहारा अफ्रीका में वैश्विक स्तर पर लगभग आधे नए एचआईवी संक्रमण दर्ज होते हैं और यह क्षेत्र विदेशी सहायता पर सबसे अधिक निर्भर है। कैमरून, नाइजीरिया और ज़ाम्बिया में PrEP दवा पाने वालों की संख्या 50% से अधिक घट गई है, जो इस क्षेत्र की कमज़ोर स्थिति को दर्शाता है।
क्या कुछ देशों ने घरेलू बजट बढ़ाकर इस कमी की भरपाई की?
हाँ, कुछ देशों ने घरेलू स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर विदेशी सहायता में कमी की आंशिक भरपाई की, लेकिन फिर भी कुल एचआईवी संसाधनों में 6% की समग्र गिरावट दर्ज की गई। सभी प्रभावित देशों, विशेषकर कम आय वाले देशों, के लिए यह विकल्प व्यावहारिक नहीं है।
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