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यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-एनानी ने कहा — चीन हमारा सबसे अहम साझेदार, वैश्विक दक्षिण तक फैला सहयोग

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यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-एनानी ने कहा — चीन हमारा सबसे अहम साझेदार, वैश्विक दक्षिण तक फैला सहयोग

सारांश

यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-एनानी ने बीजिंग दौरे पर चीन को संगठन का सबसे अहम साझेदार बताया। शी चिनफिंग से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि सभ्यताओं के बीच संवाद और यूनेस्को की निष्पक्षता ही आज के वैश्विक संकटों का असली जवाब है।

मुख्य बातें

यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-एनानी ने बीजिंग में साक्षात्कार में चीन को यूनेस्को का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताया।
चीन-यूनेस्को सहयोग द्विपक्षीय दायरे से आगे बढ़कर 'वैश्विक दक्षिण' तक विस्तृत हो चुका है।
12 मई को राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एनानी से बीजिंग में मुलाकात की; सभ्यताओं के बीच संवाद पर सहमति जताई।
एनानी ने यूनेस्को के राजनीतिकरण का विरोध करते हुए संगठन की निष्पक्षता और तटस्थता पर जोर दिया।
शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना — पाँचों कार्यात्मक क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग जारी है।

यूनेस्को के महानिदेशक खालिद अल-एनानी ने बीजिंग में दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि चीन यूनेस्को के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है और दोनों के बीच सहयोग अब द्विपक्षीय सीमाओं को पार कर 'वैश्विक दक्षिण' तक विस्तृत हो चुका है। यह साक्षात्कार 23 मई को आयोजित किया गया, जिसमें एनानी ने शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना — यूनेस्को के समस्त कार्यात्मक क्षेत्रों में चीन के साथ गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया।

शी चिनफिंग से मुलाकात और सभ्यताओं के बीच संवाद

इससे पहले 12 मई को बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एनानी से मुलाकात की। इस बैठक में शी चिनफिंग ने दोहराया कि चीन सभ्यताओं के बीच संवाद का दृढ़ता से समर्थन करता है और आपसी आदान-प्रदान व सीख की वकालत करता है। एनानी ने कहा कि यह विचारधारा यूनेस्को के मूल मिशन से पूरी तरह मेल खाती है।

वैश्विक संकट और यूनेस्को की भूमिका

एनानी ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया में अनेक प्रकार के संकट फैल रहे हैं। उनके अनुसार, विभिन्न देशों और समाजों के बीच आपसी समझ को मजबूत करना तथा टकराव की रोकथाम करना यूनेस्को का अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनेस्को का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

निष्पक्षता और तटस्थता पर जोर

एनानी ने कहा कि यूनेस्को को निष्पक्ष और तटस्थ रवैये के साथ समस्त मानवजाति की सेवा करनी होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्वायत्तता और उनके राजनीतिक दबावों के बीच संतुलन पर वैश्विक बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि यूनेस्को में चीन की सक्रिय भागीदारी और वित्तीय योगदान हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।

आगे क्या

एनानी की इस बीजिंग यात्रा और शी चिनफिंग से हुई बैठक के बाद यूनेस्को-चीन सहयोग के नए आयामों को औपचारिक रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों में शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में संयुक्त पहलें आगे बढ़ सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यूनेस्को की घोषित तटस्थता बड़े भू-राजनीतिक दबावों में टिकी रह सकती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-एनानी की बीजिंग यात्रा का उद्देश्य क्या था?
एनानी ने बीजिंग में चीनी नेतृत्व से मुलाकात कर यूनेस्को-चीन सहयोग की समीक्षा की और इसे वैश्विक दक्षिण तक विस्तारित करने की दिशा में चर्चा की। 12 मई को राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ हुई बैठक में सभ्यताओं के बीच संवाद और आपसी सीख पर विशेष जोर दिया गया।
चीन और यूनेस्को के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग है?
चीन और यूनेस्को शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना — इन पाँचों प्रमुख कार्यात्मक क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। एनानी के अनुसार यह सहयोग अब केवल द्विपक्षीय नहीं रहा, बल्कि 'वैश्विक दक्षिण' के देशों तक भी फैल चुका है।
एनानी ने यूनेस्को के राजनीतिकरण पर क्या कहा?
एनानी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यूनेस्को का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और संगठन को निष्पक्ष व तटस्थ रवैये के साथ समस्त मानवजाति की सेवा करनी होगी। उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही जब वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठ रहे हैं।
शी चिनफिंग ने सभ्यताओं के बीच संवाद पर क्या रुख अपनाया?
राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 12 मई की बैठक में दोहराया कि चीन सभ्यताओं के बीच बातचीत का मजबूती से समर्थन करता है और आपसी आदान-प्रदान व सीख की वकालत करता है। एनानी ने इस विचारधारा को यूनेस्को के मिशन के अनुरूप बताया।
यूनेस्को और चीन का 'वैश्विक दक्षिण' सहयोग क्या है?
एनानी के अनुसार, यूनेस्को-चीन साझेदारी अब केवल दोनों पक्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकासशील देशों — जिन्हें सामूहिक रूप से 'वैश्विक दक्षिण' कहा जाता है — तक विस्तृत हो चुकी है। इसमें शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में संयुक्त पहलें शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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