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अमेरिकी विजिटर वीजा के लिए भारतीयों को 346 दिन का इंतजार, GAO ऑडिट में खुलासा

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अमेरिकी विजिटर वीजा के लिए भारतीयों को 346 दिन का इंतजार, GAO ऑडिट में खुलासा

सारांश

GAO की सरकारी ऑडिट ने उजागर किया कि वित्त वर्ष 2025 में भारतीय आवेदकों को अमेरिकी विजिटर वीजा इंटरव्यू के लिए औसतन 346 दिन का इंतजार करना पड़ा — चीन के 34 दिन और ब्राजील के 32 दिन की तुलना में यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। 68 अधिकारियों पर 14.55 लाख आवेदनों का बोझ — यह संख्याओं की नहीं, नीतिगत विफलता की कहानी है।

मुख्य बातें

GAO ऑडिट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारतीय आवेदकों को अमेरिकी विजिटर वीजा इंटरव्यू के लिए औसतन 346 दिन का इंतजार करना पड़ा।
भारत से लगभग 14,55,255 नॉन-इमिग्रेंट वीजा आवेदन आए, जबकि केवल 68 कांसुलर अधिकारी तैनात थे — प्रति अधिकारी औसतन 21,401 आवेदन ।
तुलनात्मक रूप से चीन में प्रतीक्षा अवधि 34 दिन और ब्राजील में 32 दिन रही।
सबसे लंबे इंतजार वाले 10 देशों की सूची में भारत सातवें स्थान पर रहा।
वित्त वर्ष 2024 में वाशिंगटन इकाई ने नई दिल्ली के 80.6% बिना-इंटरव्यू विजिटर वीजा मामले दूर से निपटाए।
पेड वीजा एजेंटों द्वारा स्लॉट की कालाबाजारी रोकने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग ने शेड्यूलिंग प्रणाली में बदलाव किया।

अमेरिकी सरकार की एक आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारतीय आवेदकों को अमेरिकी विजिटर वीजा इंटरव्यू के लिए औसतन 346 दिन का इंतजार करना पड़ा — जो किसी भी प्रमुख देश की तुलना में सबसे लंबी प्रतीक्षा अवधियों में से एक है। यह खुलासा गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) की रिपोर्ट में हुआ, जिसे 29 सितंबर को अमेरिकी समय के अनुसार जारी किया गया।

ऑडिट में क्या सामने आया

GAO ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि भारत में वीजा की मांग, अमेरिकी दूतावास में तैनात कांसुलर अधिकारियों की संख्या से कहीं अधिक हो गई है। वित्त वर्ष 2025 में भारत से लगभग 14,55,255 लोगों ने नॉन-इमिग्रेंट वीजा के लिए आवेदन किया, जबकि पूरे देश में अमेरिकी विदेश विभाग के केवल 68 कांसुलर अधिकारी कार्यरत थे। इसका अर्थ है कि प्रत्येक अधिकारी पर औसतन 21,401 आवेदनों का बोझ था।

गौरतलब है कि 346 दिन का यह आंकड़ा इंटरव्यू की तारीख मिलने की औसत प्रतीक्षा अवधि है। इसका यह अर्थ नहीं कि इंटरव्यू के बाद वीजा पर निर्णय लेने में इतना समय लगता है, और न ही यह आज आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता है।

अन्य देशों से तुलना

अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत की स्थिति काफी चिंताजनक है। चीन में विजिटर वीजा इंटरव्यू के लिए औसत प्रतीक्षा अवधि केवल 34 दिन और ब्राजील में 32 दिन रही। मेक्सिको में प्रति अधिकारी आवेदनों की संख्या भारत के बराबर थी, फिर भी वहां इंतजार 283 दिन रहा। सबसे लंबे इंतजार वाले 10 देशों की सूची में भारत सातवें स्थान पर था।

स्टाफ की कमी और बुनियादी ढांचे की समस्या

GAO की ऑडिट टीम ने नई दिल्ली के अलावा मेक्सिको सिटी, बीजिंग और साओ पाउलो का भी दौरा किया। भारत और मेक्सिको में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि कोविड महामारी के बाद वीजा की मांग में भारी उछाल आया, जबकि कांसुलर स्टाफ की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। चारों देशों के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि मांग के मुकाबले स्टाफ की कमी ही देरी की सबसे बड़ी वजह है।

रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में आवश्यकता के अनुपात में इंटरव्यू विंडो बहुत कम हैं। ऑडिट टीम ने देखा कि सैकड़ों आवेदक दूतावास परिसर के बाहर और प्रतीक्षा क्षेत्रों में कतार में खड़े थे। रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में एक नई इमारत में स्थानांतरण की योजना के बावजूद इंटरव्यू विंडो की संख्या में कोई वृद्धि नहीं होगी।

वीजा एजेंटों की भूमिका और सुधार के प्रयास

रिपोर्ट में पेड वीजा एजेंटों की भूमिका पर भी चिंता जताई गई है। कुछ एजेंट कथित तौर पर स्लॉट उपलब्ध होते ही उन्हें बुक कर लेते हैं और फिर ग्राहकों को बेच देते हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी शेड्यूलिंग प्रणाली में बदलाव किया है।

भीड़ घटाने के अन्य उपायों के तहत वित्त वर्ष 2024 में वाशिंगटन स्थित एक विशेष इकाई ने नई दिल्ली के 80.6 प्रतिशत ऐसे विजिटर वीजा मामलों को दूर से ही निपटाया, जिनमें इंटरव्यू की आवश्यकता नहीं थी। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में तैनात स्टाफ ने बैकलॉग कम करने के लिए अतिरिक्त शनिवारों को भी कार्य किया।

आगे क्या होगा

यह ऑडिट रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत-अमेरिका संबंध व्यापार और प्रवासन के मोर्चे पर नए समीकरण बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कांसुलर स्टाफ की संख्या में पर्याप्त वृद्धि नहीं होती और बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं होता, तब तक प्रतीक्षा अवधि में उल्लेखनीय कमी की संभावना सीमित है। यह रिपोर्ट अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संरचनागत नीतिगत खाई को उजागर करता है — भारत दुनिया का सबसे बड़ा वीजा आवेदक देश बनता जा रहा है, लेकिन अमेरिकी कांसुलर क्षमता उस रफ्तार से नहीं बढ़ी। जबकि चीन और ब्राजील में प्रतीक्षा अवधि एक महीने से भी कम है, भारत के लिए यह लगभग एक वर्ष है — यह असमानता भारत-अमेरिका के 'व्यापक वैश्विक साझेदारी' के दावों से मेल नहीं खाती। नई दिल्ली में नई इमारत में शिफ्ट होने के बावजूद इंटरव्यू विंडो न बढ़ाने का निर्णय बताता है कि समस्या की गंभीरता को अभी भी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीयों को अमेरिकी विजिटर वीजा के लिए कितने दिन इंतजार करना पड़ा?
GAO ऑडिट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारतीय आवेदकों को अमेरिकी विजिटर वीजा इंटरव्यू की तारीख पाने के लिए औसतन 346 दिन का इंतजार करना पड़ा। यह आंकड़ा इंटरव्यू स्लॉट मिलने की प्रतीक्षा अवधि है, न कि इंटरव्यू के बाद वीजा निर्णय का समय।
GAO ऑडिट रिपोर्ट में इतनी देरी की वजह क्या बताई गई?
GAO ने पाया कि भारत में वीजा की मांग कांसुलर स्टाफ की क्षमता से कहीं अधिक हो गई है। 14,55,255 आवेदनों के मुकाबले केवल 68 अधिकारी तैनात थे, और नई दिल्ली दूतावास में इंटरव्यू विंडो की संख्या भी आवश्यकता से बहुत कम थी।
भारत की तुलना में अन्य देशों में अमेरिकी वीजा इंतजार कितना है?
चीन में विजिटर वीजा इंटरव्यू की औसत प्रतीक्षा अवधि 34 दिन और ब्राजील में 32 दिन रही। मेक्सिको में प्रति अधिकारी आवेदनों की संख्या भारत के बराबर होने के बावजूद वहां इंतजार 283 दिन रहा।
वीजा स्लॉट की कालाबाजारी क्या है और इसे कैसे रोका जा रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार कुछ पेड वीजा एजेंट स्लॉट उपलब्ध होते ही बुक कर लेते हैं और फिर उन्हें आवेदकों को बेच देते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस पर रोक लगाने के लिए अपनी ऑनलाइन शेड्यूलिंग प्रणाली में बदलाव किए हैं।
क्या बिना इंटरव्यू के भी अमेरिकी विजिटर वीजा मिल सकता है?
हां, कुछ मामलों में इंटरव्यू की आवश्यकता नहीं होती। वित्त वर्ष 2024 में वाशिंगटन की एक विशेष इकाई ने नई दिल्ली के 80.6 प्रतिशत ऐसे विजिटर वीजा आवेदनों को दूर से ही निपटाया जिनमें इंटरव्यू जरूरी नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
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