चीन-रूस की खुफिया एजेंसियों से अमेरिकी कंपनियों को दूर रखो: द्विदलीय सांसदों की ट्रंप प्रशासन से माँग
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी संसद के द्विदलीय सांसदों के एक समूह ने 26 अगस्त 2026 को ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को चीन तथा रूस की नागरिक खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने से रोका जाए। सांसदों का कहना है कि मौजूदा कानूनी खामियों के चलते विदेशी प्रतिद्वंद्वी देश अमेरिका की अत्याधुनिक सर्विलांस, साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक कानूनी रास्तों से हासिल कर सकते हैं।
मौजूदा कानूनी खामी क्या है
वर्तमान अमेरिकी निर्यात नियंत्रण कानून चीन, रूस और कुछ अन्य देशों की सैन्य खुफिया एजेंसियों के साथ कारोबार पर रोक लगाते हैं। हालाँकि, इन देशों की नागरिक खुफिया और सुरक्षा एजेंसियाँ इस दायरे से बाहर हैं। सांसदों ने अपने पत्र में स्पष्ट किया, "नतीजतन, कई देशों की विदेशी खुफिया एजेंसियाँ अब भी कानूनी रूप से अमेरिका में सलाहकार नियुक्त कर सकती हैं और अमेरिकी निगरानी, साइबर तथा AI जैसी उन्नत तकनीक खरीद सकती हैं — इनका इस्तेमाल वे अमेरिकियों को निशाना बनाने और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ कर सकती हैं।"
सांसदों की प्रमुख माँगें
इस समूह में डेमोक्रेट सीनेटर रॉन वाइडन और पीटर वेल्च, रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन, रिपब्लिकन सांसद पैट हैरिगन और माइकल मैककॉल, तथा डेमोक्रेट सांसद सारा जैकब्स शामिल हैं। इन सांसदों ने वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक से आग्रह किया है कि 2022 में कांग्रेस द्वारा पारित उन निर्यात नियंत्रण प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए, जो अब तक अधूरे हैं।
सांसदों ने वाणिज्य विभाग से एक 'विश्वसनीय देशों की सूची' तैयार करने की भी सिफारिश की है। इस सूची में वे देश शामिल होंगे जिनका मानवाधिकार रिकॉर्ड स्वीकार्य हो और जो अमेरिका के खिलाफ निगरानी गतिविधियाँ न चलाते हों। यदि कोई देश इस सूची में नहीं है, तो वहाँ की खुफिया या सुरक्षा एजेंसियों के साथ कारोबार के लिए अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को पहले सरकारी लाइसेंस लेना होगा।
पिछले प्रयास और उनकी सीमाएँ
2021 में ट्रंप प्रशासन ने चीन, रूस और अन्य संवेदनशील देशों की सैन्य खुफिया एजेंसियों के साथ कारोबार करने वाले अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण लगाए थे। इसके बाद 2022 में कांग्रेस ने एक कानून पारित कर सरकार को नागरिक खुफिया एजेंसियों पर भी ऐसे नियंत्रण लगाने का अधिकार दिया। बाइडेन प्रशासन ने 2024 में इन अधिकारों को लागू करने के लिए नए नियमों का मसौदा पेश किया, लेकिन वे नियम कभी अंतिम रूप नहीं ले सके। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है।
स्पाइवेयर और बायोमेट्रिक निगरानी पर चिंता
सांसदों ने निजी स्पाइवेयर और साइबर निगरानी कंपनियों पर भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, ये कंपनियाँ अक्सर अपने ग्राहकों की पहचान छिपाती हैं ताकि नियामकीय प्रतिबंधों से बच सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशी निगरानी कंपनियों को अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के सामने शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया जाए, जिसमें यह पुष्टि हो कि उनके ग्राहकों में विश्वसनीय देशों की सूची से बाहर किसी देश की खुफिया एजेंसी शामिल नहीं है।
गौरतलब है कि 2024 के प्रस्तावित नियमों में फेशियल रिकग्निशन प्रणाली शामिल थी, लेकिन सांसदों का कहना है कि कई अन्य बायोमेट्रिक निगरानी और पहचान वर्गीकरण तकनीकों पर भी व्यापक नियंत्रण जरूरी है, जिनका दमनकारी सरकारें लोगों की निगरानी के लिए उपयोग कर सकती हैं।
आगे क्या होगा
सांसदों ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार की ओर से प्रस्तावित देशों की सूची में कुछ ऐसे देशों को भी शामिल किया गया था जिन पर मानवाधिकार उल्लंघन या अमेरिका के खिलाफ जासूसी के आरोप लगते रहे हैं। अब यह देखना होगा कि ट्रंप प्रशासन इस द्विदलीय दबाव पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देता है और क्या 2022 के कानून को अंततः पूरी तरह लागू किया जाएगा।