चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका ने प्रशांत द्वीपों में कूटनीतिक और सैन्य मोर्चा मजबूत किया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग ने 26 जून को स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन प्रशांत द्वीपीय देशों में अपनी कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रहा है — और इसका सीधा मकसद चीन के तेज़ी से फैलते प्रभाव को काटना है। प्रशासन ने इस रणनीति को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बताया है।
हाउस कमेटी में क्या कहा गया
पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के सहायक विदेश मंत्री माइकल जी. डीसोम्ब्रे ने हाउस फॉरेन अफेयर्स सब-कमेटी (पूर्व एशिया और प्रशांत) को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य विभाग ने प्रशांत क्षेत्र को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर राज्य विभाग बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।'
डीसोम्ब्रे के अनुसार वाशिंगटन की रणनीति का मूल उद्देश्य प्रशांत द्वीपीय देशों की आर्थिक क्षमता और लचीलापन मजबूत करना है, साथ ही उन्हें चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव का एक व्यावहारिक विकल्प देना है।
आर्थिक मजबूती और निवेश की रणनीति
डीसोम्ब्रे ने बताया, 'पहला कदम आर्थिक मजबूती बनाने की कोशिश है। हम प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ मिलकर ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं जिनसे वहाँ अधिक अमेरिकी या पश्चिमी सहयोगी निवेश आ सके।' अमेरिकी समोआ की कांग्रेसी सदस्य औमुआ अमाता कोलमैन रेडवेगन ने कहा कि ये द्वीपीय देश अमेरिका और हिंद-प्रशांत के बीच स्थित हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तपोषण और कर्ज़ के ज़रिए चीन के प्रभाव में आते जा रहे हैं।
उन्होंने फिजी, टोंगा, सोलोमन आइलैंड्स और वानुअतु में चीन की बढ़ती मौजूदगी का उल्लेख करते हुए पूछा कि वाशिंगटन इन देशों की बीजिंग पर निर्भरता घटाने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहा है।
समुद्र तल केबल और डिजिटल सुरक्षा
डीसोम्ब्रे ने बताया कि सुरक्षित संचार ढाँचे का विस्तार एक प्रमुख पहल है। उन्होंने कहा, 'हम इंफ्रास्ट्रक्चर और संचार में सहायता के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी मदद दे रहे हैं — समुद्र तल के नीचे बिछाई जाने वाली केबल इसका बड़ा उदाहरण है।' अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान मिलकर यह सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं कि प्रशांत देशों के संचार लिंक ऐसे स्रोतों पर निर्भर न हों जिन्हें अमेरिका प्रतिकूल मानता है।
कोस्ट गार्ड और समुद्री सुरक्षा
गुआम के कांग्रेसी जेम्स मोयलान ने प्रशांत द्वीपीय देशों को समर्थन देने और अवैध मछली पकड़ने, मादक पदार्थ तस्करी तथा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने में अमेरिकी कोस्ट गार्ड की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। डीसोम्ब्रे ने बताया, 'हम गुआम में दो से चार कोस्ट गार्ड कटर की तरफ बढ़ रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया में कोस्ट गार्ड अभियानों को बढ़ाने पर विचार हो रहा है और हाल ही में फिलीपींस के सुबिक बे में अतिरिक्त कटर तैनात किए गए हैं।
डीसोम्ब्रे के अनुसार प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ शिप-राइडर एग्रीमेंट स्थानीय प्राधिकरणों को उनके विशेष आर्थिक क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने में सहायता का एक अहम माध्यम बन चुके हैं।
सोलोमन आइलैंड्स और आगे की राह
डीसोम्ब्रे ने सोलोमन आइलैंड्स में राजनीतिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ की नई नेतृत्व बीजिंग के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर रही है और पारंपरिक सुरक्षा साझेदारों के साथ काम करने की इच्छुक है। उन्होंने गुआम की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा, 'गुआम प्रशांत का एक महत्वपूर्ण प्रवेशद्वार है — और यह हमारे देश का हिस्सा है।' यह ऐसे समय में आया है जब बीजिंग ने हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक मौजूदगी, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सुरक्षा सहयोग तेज़ी से बढ़ाया है। अमेरिका की यह बहु-आयामी रणनीति — साझेदारी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, समुद्री सुरक्षा और सैन्य उपस्थिति — आने वाले वर्षों में हिंद-प्रशांत की भू-राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।