जेडी वेंस का प्रस्ताव: ईरान की सीज संपत्ति से खरीदे जाएँ अमेरिकी कृषि उत्पाद
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 22 जून 2026 को बर्गेनस्टॉक, स्विट्जरलैंड में एक ब्रीफिंग के दौरान एक नया आर्थिक प्रस्ताव सामने रखा — जिसके तहत भविष्य में यदि ईरान की सीज संपत्तियाँ वापस जारी की जाती हैं, तो उन धनराशियों का उपयोग अमेरिकी कृषि उत्पाद — जैसे सोयाबीन, मक्का और गेहूँ — खरीदने के लिए किया जाए। वेंस के अनुसार, यह प्रस्ताव ईरान के साथ चल रही व्यापक परमाणु वार्ता के संभावित समझौते का हिस्सा हो सकता है।
प्रस्ताव का ढाँचा
वेंस ने स्पष्ट किया कि सीज धनराशि सीधे ईरान सरकार को नहीं सौंपी जाएगी। इसके बजाय, एक नियंत्रित तंत्र बनाया जाएगा जिसमें अमेरिका और कतर दोनों यह तय करेंगे कि पैसा कैसे खर्च हो। उन्होंने बताया कि जेरेड कुशनर ने कतर के साथ मिलकर इस समाधान का सुझाव दिया है।
वेंस ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि अगर कभी ईरान के पैसे वापस जारी किए जाते हैं तो ये पैसे ईरान के लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल हों, न कि गलत कामों को बढ़ावा देने के लिए।' उन्होंने इस योजना को 'एक बहुत अच्छा और पारंपरिक ट्रंप समझौता' करार दिया।
बातचीत का व्यापक संदर्भ
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता जारी है। अब तक इस वार्ता में मुख्य रूप से परमाणु निगरानी, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मुद्दे केंद्र में रहे हैं।
गौरतलब है कि वेंस ने इससे पहले यह भी दावा किया था कि ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को पुनः देश में प्रवेश देने पर सहमति जताई है — जो कि वार्ता में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।
दोनों पक्षों के लिए संभावित लाभ
वेंस ने इस प्रस्ताव को दोनों देशों के हित में बताया। उनके अनुसार, यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो अमेरिकी किसानों को निर्यात का नया बाज़ार मिलेगा, जबकि ईरान की आम जनता को खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। यह ढाँचा मानवीय राहत और व्यापारिक हित — दोनों को एकसाथ साधने की कोशिश है।
अनुत्तरित सवाल
हालाँकि, वेंस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है या नहीं। इसके अलावा, इस व्यवस्था के तहत कितनी धनराशि शामिल हो सकती है, इसका भी कोई आँकड़ा सामने नहीं आया। आने वाले दिनों और हफ्तों में तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहने की उम्मीद है, ताकि स्विट्जरलैंड में तैयार किए गए ढाँचे को आगे बढ़ाया जा सके।