26 जुलाई 2026
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वांग यी का अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस पर वीडियो संबोधन, चार सूत्रीय एजेंडा पेश

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वांग यी का अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस पर वीडियो संबोधन, चार सूत्रीय एजेंडा पेश

सारांश

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की पूर्व संध्या पर वीडियो संबोधन में पारस्परिक सम्मान, जन-केंद्रित दृष्टिकोण, विरासत-नवाचार और आदान-प्रदान — इन चार सूत्रों पर ज़ोर दिया। यह शी चिनफिंग की तीन वर्ष पुरानी वैश्विक सभ्यता पहल को आगे बढ़ाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

वांग यी ने अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की पूर्व संध्या पर वैश्विक वीडियो संबोधन दिया।
राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा तीन वर्ष पूर्व प्रस्तावित वैश्विक सभ्यता पहल को लागू करने की दिशा में यह एक अहम कदम बताया गया।
वांग यी ने सभ्यताओं के बीच संवाद के लिए चार सूत्रीय एजेंडा — पारस्परिक सम्मान, जन-केंद्रित दृष्टिकोण, विरासत-नवाचार, और आदान-प्रदान — प्रस्तुत किया।
उन्होंने मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण हेतु सांस्कृतिक आधार सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
यह संबोधन वैश्विक सभ्यतागत बहस के बीच चीन की बहुध्रुवीय कूटनीति को रेखांकित करता है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की पूर्व संध्या पर एक वैश्विक वीडियो संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व और संवाद को बढ़ावा देने के लिए चार सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया। वांग यी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य भी हैं।

वैश्विक सभ्यता पहल की पृष्ठभूमि

वांग यी ने अपने संबोधन में कहा कि तीन वर्ष पूर्व चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वैश्विक सभ्यता पहल का प्रस्ताव रखा था, जो विश्व की विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की स्थापना इसी पहल को ज़मीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम है।

चार सूत्रीय एजेंडा

वांग यी ने सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख सिद्धांत रेखांकित किए। पहला — पारस्परिक सम्मान को बनाए रखना और विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करना। दूसरा — जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान के लिए ठोस आधार तैयार करना।

तीसरा — सभ्यतागत प्रगति की गति बनाए रखने के लिए विरासत और नवाचार के सिद्धांतों को प्राथमिकता देना। चौथा — आदान-प्रदान और पारस्परिक शिक्षा के सिद्धांतों को कायम रखते हुए सभ्यताओं के बीच संवाद के तंत्र को और सुदृढ़ बनाना।

साझा भविष्य का आह्वान

वांग यी ने ज़ोर देकर कहा कि मानव जाति के लिए एक साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण हेतु सांस्कृतिक आधार को निरंतर मज़बूत करना होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सभ्यतागत टकराव और सांस्कृतिक विविधता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

वैश्विक महत्त्व

गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक विविधता के व्यापक ढाँचे के अनुरूप है। चीन का यह कदम उसकी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत और पश्चिमी एकल-सभ्यतावादी दृष्टिकोण के विकल्प के रूप में अपनी कूटनीतिक पहचान को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक 'पारस्परिक सम्मान' का यह आह्वान विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस विश्व की विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद और पारस्परिक समझ को बढ़ावा देने के लिए स्थापित एक वैश्विक अवसर है। चीन इसे राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वैश्विक सभ्यता पहल के क्रियान्वयन से जोड़कर देखता है।
वांग यी ने अपने संबोधन में क्या कहा?
वांग यी ने सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए चार सूत्र रखे — पारस्परिक सम्मान, जन-केंद्रित दृष्टिकोण, विरासत और नवाचार, तथा आदान-प्रदान और पारस्परिक शिक्षा। उन्होंने मानव जाति के साझा भविष्य के लिए सांस्कृतिक आधार मज़बूत करने का आह्वान किया।
वैश्विक सभ्यता पहल क्या है और इसे किसने प्रस्तावित किया?
वैश्विक सभ्यता पहल राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा तीन वर्ष पूर्व प्रस्तावित एक कूटनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य विश्व की विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करना है। यह पहल चीन की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत का एक प्रमुख स्तंभ है।
इस संबोधन का वैश्विक कूटनीति पर क्या असर हो सकता है?
आलोचकों का कहना है कि यह संबोधन पश्चिमी एकल-सभ्यतावादी दृष्टिकोण के विकल्प के रूप में चीन की कूटनीतिक पहचान को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सभ्यतागत टकराव और सांस्कृतिक विविधता को लेकर बहस तेज़ है।
चीन सभ्यताओं के बीच संवाद को किन चार पहलुओं से बढ़ावा देना चाहता है?
वांग यी के अनुसार, चीन पारस्परिक सम्मान, जन-केंद्रित दृष्टिकोण, विरासत और नवाचार के सिद्धांत, तथा आदान-प्रदान और पारस्परिक शिक्षा — इन चार पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना चाहता है।
राष्ट्र प्रेस
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