वांग यी का अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस पर वीडियो संबोधन, चार सूत्रीय एजेंडा पेश
सारांश
मुख्य बातें
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की पूर्व संध्या पर एक वैश्विक वीडियो संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व और संवाद को बढ़ावा देने के लिए चार सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया। वांग यी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य भी हैं।
वैश्विक सभ्यता पहल की पृष्ठभूमि
वांग यी ने अपने संबोधन में कहा कि तीन वर्ष पूर्व चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वैश्विक सभ्यता पहल का प्रस्ताव रखा था, जो विश्व की विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की स्थापना इसी पहल को ज़मीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम है।
चार सूत्रीय एजेंडा
वांग यी ने सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख सिद्धांत रेखांकित किए। पहला — पारस्परिक सम्मान को बनाए रखना और विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करना। दूसरा — जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान के लिए ठोस आधार तैयार करना।
तीसरा — सभ्यतागत प्रगति की गति बनाए रखने के लिए विरासत और नवाचार के सिद्धांतों को प्राथमिकता देना। चौथा — आदान-प्रदान और पारस्परिक शिक्षा के सिद्धांतों को कायम रखते हुए सभ्यताओं के बीच संवाद के तंत्र को और सुदृढ़ बनाना।
साझा भविष्य का आह्वान
वांग यी ने ज़ोर देकर कहा कि मानव जाति के लिए एक साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण हेतु सांस्कृतिक आधार को निरंतर मज़बूत करना होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सभ्यतागत टकराव और सांस्कृतिक विविधता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
वैश्विक महत्त्व
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय सभ्यता संवाद दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक विविधता के व्यापक ढाँचे के अनुरूप है। चीन का यह कदम उसकी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत और पश्चिमी एकल-सभ्यतावादी दृष्टिकोण के विकल्प के रूप में अपनी कूटनीतिक पहचान को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।