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यमन के शबवा में सैन्य अड्डे पर तीन मिसाइल हमले, 25 सैनिक शहीद और 30 से अधिक घायल

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यमन के शबवा में सैन्य अड्डे पर तीन मिसाइल हमले, 25 सैनिक शहीद और 30 से अधिक घायल

सारांश

यमन के शबवा प्रांत में अल-अलम सैन्य अड्डे पर तीन मिसाइलों ने एक साथ प्रहार किया — 25 सैनिक शहीद, 30 से अधिक घायल। हूतियों पर आरोप, लेकिन जिम्मेदारी नहीं ली। इसी बीच बाब अल-मंडेब पर भी भीषण लड़ाई जारी है, जहाँ हूतियों ने 'शावाज' ड्रोन तक तैनात कर दिए।

मुख्य बातें

19 अक्टूबर 2026 को यमन के शबवा प्रांत के अल-अलम सैन्य अड्डे पर तीन मिसाइल हमले हुए।
हमलों में कम से कम 25 सैनिक मारे गए और 30 से अधिक घायल हुए; हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया, हालाँकि हूतियों ने अभी तक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
कुछ शव बुरी तरह जले पाए गए, जिससे अंतिम हताहत संख्या निर्धारित करना कठिन हो रहा है।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास भी भीषण लड़ाई जारी है; हूतियों ने 'शावाज' आत्मघाती ड्रोन तैनात किए।
जायंट्स ब्रिगेड और नेशन शील्ड फोर्सेज ने हूतियों के प्रमुख ठिकानों पर कब्जा करने का दावा किया।

यमन के दक्षिणपूर्वी प्रांत शबवा में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को अल-अलम सैन्य अड्डे के प्रशिक्षण शिविर पर तीन मिसाइल हमले किए गए, जिनमें कम से कम 25 सैनिक मारे गए और 30 से अधिक घायल हो गए। स्थानीय सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह हमले अताक प्रांतीय राजधानी के निकट जरदान जिले में हुए और इनके लिए हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया गया है, हालाँकि हूतियों ने अभी तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले का विवरण

एक स्थानीय सैन्य अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि तीनों मिसाइलों ने सीधे अल-अलम सैन्य अड्डे के प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया। यह अड्डा यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से संबद्ध और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा समर्थित बलों का एक विशाल सैन्य केंद्र है।

स्थानीय चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि शिविर से बरामद कुछ शव बुरी तरह से जले हुए हैं, जिससे अंतिम हताहतों की संख्या निर्धारित करना कठिन हो रहा है। आपातकालीन और चिकित्सा दल घायलों को शबवा के अस्पतालों में पहुँचाने में लगे हुए हैं। चिकित्सा सूत्रों के अनुसार हताहतों की यह प्रारंभिक संख्या बढ़ सकती है।

बाब अल-मंडेब पर भीषण मोर्चाबंदी

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब यमन के रणनीतिक बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास भी तीव्र संघर्ष जारी है। एक सरकारी सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रविवार को सरकारी बलों ने इस क्षेत्र में हूतियों के ठिकानों पर नया हमला शुरू किया।

अधिकारी के अनुसार, जायंट्स ब्रिगेड और नेशन शील्ड फोर्सेज की टुकड़ियों ने कई दिशाओं से आगे बढ़कर जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वारों पर नज़र रखने वाले हूतियों के महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा किया। गौरतलब है कि यह जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हूतियों की उन्नत युद्ध तकनीक

अधिकारी ने बताया कि हूती लड़ाकों ने किलेबंद ठिकानों और खाइयों से कड़ा प्रतिरोध किया। व्यापक बारूदी सुरंगों ने सरकारी बलों की प्रगति में बड़ी बाधा उत्पन्न की।

अधिकारी ने कहा, 'यह लड़ाई इस क्षेत्र में अब तक की सबसे भीषण लड़ाइयों में से एक है। हूती लड़ाके मजबूती से मोर्चा संभाले हुए हैं और हमारी सेनाएं उनकी रक्षात्मक रेखाओं को भेदने की कोशिश कर रही हैं।' इसके अलावा, हूतियों ने फाइबर-ऑप्टिक-गाइडेड फर्स्ट-पर्सन-व्यू आत्मघाती ड्रोन, जिन्हें स्थानीय रूप से 'शावाज' कहा जाता है, भी तैनात किए।

यमन संघर्ष का व्यापक परिप्रेक्ष्य

यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती बलों के बीच वर्षों से गृहयुद्ध चल रहा है। शबवा प्रांत तेल संसाधनों और रणनीतिक मार्गों के कारण इस संघर्ष का एक अहम केंद्र बिंदु रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में घटनास्थल पर बड़ी संख्या में हताहत दिखाई दे रहे हैं, हालाँकि इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

यह हमला ऐसे नाजुक दौर में हुआ है जब यमन में शांति वार्ताओं के प्रयास रुक-रुककर जारी हैं। हताहतों की अंतिम संख्या की पुष्टि और जिम्मेदारी का निर्धारण आने वाले घंटों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अब सऊदी गठबंधन के गढ़ माने जाने वाले दक्षिणपूर्वी प्रांतों तक पहुँच चुकी है। गौरतलब है कि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर एक साथ संघर्ष का तेज होना दर्शाता है कि दोनों पक्ष रणनीतिक जलमार्ग के नियंत्रण के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं, जो वैश्विक समुद्री व्यापार को सीधे प्रभावित कर सकता है। 'शावाज' जैसे फाइबर-ऑप्टिक-गाइडेड ड्रोन की तैनाती यमन युद्धक्षेत्र में तकनीकी उन्नयन की एक नई और चिंताजनक परत जोड़ती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमन के शबवा में मिसाइल हमला कहाँ और कैसे हुआ?
यह हमला 19 अक्टूबर 2026 को शबवा प्रांत के जरदान जिले में स्थित अल-अलम सैन्य अड्डे के प्रशिक्षण शिविर पर हुआ, जब तीन मिसाइलें एक के बाद एक दागी गईं। यह अड्डा यमन की मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी गठबंधन-समर्थित बलों का प्रमुख केंद्र है।
इस हमले के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया गया है?
स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर हूती समूह को जिम्मेदार बताया है। हालाँकि हूतियों ने अब तक इस हमले की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की है।
हताहतों की संख्या क्यों बढ़ सकती है?
चिकित्सा सूत्रों के अनुसार 25 मौतें और 30 से अधिक घायलों की संख्या प्रारंभिक है। शिविर से बरामद कुछ शव बुरी तरह जले हुए हैं, जिससे सटीक संख्या निर्धारित करना कठिन हो रहा है और बचाव अभियान अभी जारी है।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर संघर्ष क्यों महत्वपूर्ण है?
बाब अल-मंडेब वह रणनीतिक जलमार्ग है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार का अहम हिस्सा है। इस पर नियंत्रण के लिए सरकारी बलों और हूतियों के बीच तीव्र संघर्ष जारी है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है।
'शावाज' ड्रोन क्या हैं?
'शावाज' फाइबर-ऑप्टिक-गाइडेड फर्स्ट-पर्सन-व्यू आत्मघाती ड्रोन हैं, जिन्हें हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंडेब के पास आगे बढ़ रही सरकारी सेना के विरुद्ध तैनात किया। ये ड्रोन यमन युद्धक्षेत्र में हूतियों की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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