युद्ध अभ्यास 2026: अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर की एंट्री, महाजन रेंज में भारत-अमेरिका की संयुक्त हवाई-जमीनी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 में एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की भागीदारी शुरू हो गई है। राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में दोनों देशों के 1,200 सैन्यकर्मियों ने हवाई और जमीनी शक्ति को एकीकृत करते हुए वास्तविक युद्ध-जैसी परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई का गहन अभ्यास किया। यह अभ्यास का 22वाँ संस्करण है, जो उत्तराखंड के औली से शुरू होकर अब राजस्थान के महाजन में अपने सबसे उन्नत चरण में पहुँच चुका है।
अपाचे की भागीदारी: हवा-जमीन का तालमेल
सेना के अनुसार, अभ्यास में सबसे पहले भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने मिलकर मिशन की योजना तैयार की। इसके बाद हवा में उड़ रहे अपाचे हेलीकॉप्टरों और जमीन पर तैनात सैनिकों के बीच रियल-टाइम समन्वय का परीक्षण किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य यह जाँचना था कि संकटकालीन स्थिति में दोनों इकाइयाँ कितनी सटीकता और तत्परता से एकसाथ कार्य कर सकती हैं।
अपाचे की मौजूदगी ने इस संयुक्त अभ्यास को एक नया आयाम दिया है। सैनिकों ने हवाई हमले को जमीनी कार्रवाई से जोड़ना, निरंतर संचार बनाए रखना और सही समय पर समन्वित कार्रवाई करने का अभ्यास किया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अपाचे इस अभ्यास का हिस्सा बना है, लेकिन इस बार हवा-जमीन एकीकरण की जटिलता को पहले से अधिक विस्तार दिया गया है।
भारी हथियार प्रणालियों का संयुक्त प्रदर्शन
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर इससे पहले दोनों सेनाओं ने भारी तोपखाने का संयुक्त अभ्यास किया। इसमें एम 777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, धनुष तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर से फायरिंग की गई। इसके साथ ही एल-70 एयर डिफेंस तोपों और एम-लिड्स प्रणालियों को भी सक्रिय रूप से अभ्यास में उतारा गया।
दोनों देशों की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने साझे प्रशिक्षण के तहत लक्ष्य की पहचान, लक्ष्य की स्थिति संप्रेषण, कार्रवाई की प्रक्रिया और फायर आदेश भेजने का सुव्यवस्थित अभ्यास किया। फायरिंग की योजना, समन्वय और त्वरित कार्रवाई में बेहतर तालमेल विकसित करना इस चरण का केंद्रीय उद्देश्य था।
ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग
परंपरागत हथियारों से परे, दोनों सेनाओं ने ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल निगरानी और टोही मिशनों के लिए भी किया। यह इस बात का संकेत है कि युद्ध अभ्यास 2026 का दायरा अब केवल पारंपरिक पैदल सेना प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा — इसमें आधुनिक युद्ध की बहु-आयामी रणनीति को शामिल किया गया है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत तेज़ी से अपनी सशस्त्र सेनाओं में तकनीकी आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रहा है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियाँ सुदृढ़ कर रहा है।
औली से महाजन: अभ्यास का व्यापक दायरा
युद्ध अभ्यास 2026 का यह 22वाँ संस्करण दो अत्यंत भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों को कवर करता है — उत्तराखंड के औली के बर्फीले पहाड़ी इलाकों से लेकर राजस्थान की शुष्क मैदानी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक। इस बहुभौगोलिक रणनीति से दोनों सेनाओं को विविध परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।
भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के लिए यह अभ्यास प्रक्रियाओं, संचार प्रोटोकॉल और परस्पर कार्यक्षमता को बेहतर बनाने का एक रणनीतिक मंच भी है। दोनों देश एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को निकट से समझने और भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए ठोस आधार तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।