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युद्ध अभ्यास 2026: अमेरिकी सैनिकों ने बद्रीनाथ मंदिर और जूनागढ़ किले में जाना भारत का सांस्कृतिक वैभव

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युद्ध अभ्यास 2026: अमेरिकी सैनिकों ने बद्रीनाथ मंदिर और जूनागढ़ किले में जाना भारत का सांस्कृतिक वैभव

सारांश

युद्ध अभ्यास 2026 के 22वें संस्करण में भारत और अमेरिका के 600-600 सैनिकों ने औली से महाजन तक संयुक्त प्रशिक्षण लिया — और बद्रीनाथ मंदिर से जूनागढ़ किले तक की सांस्कृतिक यात्राओं ने इस अभ्यास को महज़ सामरिक कवायद से कहीं आगे ले जाकर एक नई रक्षा-सांस्कृतिक कूटनीति की तस्वीर पेश की।

मुख्य बातें

भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 का यह 22वाँ संस्करण है।
अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी शामिल रहे।
अभ्यास उत्तराखंड के औली तथा राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित हुआ।
अमेरिकी और भारतीय जवानों ने बद्रीनाथ मंदिर (उत्तराखंड) और जूनागढ़ किले (बीकानेर, राजस्थान) का भ्रमण किया।
एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर से डायरेक्ट फायरिंग पद्धति से सभी निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक नष्ट किए गए।
निगरानी और टोही कार्यों के लिए ड्रोन एवं स्वायत्त प्रणालियों का प्रयोग किया गया।

भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान अमेरिकी सेना के अधिकारियों और जवानों ने उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन किए और राजस्थान के बीकानेर स्थित ऐतिहासिक जूनागढ़ किले का भ्रमण किया। इस प्रकार इस द्विपक्षीय अभ्यास ने सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ दोनों देशों के सैनिकों को भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत से परिचित कराने का अवसर भी प्रदान किया।

युद्ध अभ्यास 2026 का विस्तार और स्वरूप

यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच इस श्रृंखला का 22वाँ संस्करण है। उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक फैले इस अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे थे। विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में आयोजित यह अभ्यास हिमालयी ऊँचाइयों से लेकर मरुभूमि के मैदानी इलाकों तक की विविध परिस्थितियों में संचालित किया गया।

अभ्यास में आधुनिक सैन्य तकनीक केंद्र में रही। दोनों सेनाओं के जवानों ने निगरानी और टोही अभियानों के लिए ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग किया। भारत और अमेरिका दोनों ने अपनी-अपनी तोपखाना क्षमता का भी प्रदर्शन किया।

एम777 हॉवित्जर से सटीक फायरिंग प्रदर्शन

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर से फायरिंग का प्रदर्शन किया गया। इन तोपों ने डायरेक्ट फायरिंग पद्धति से सीधे नज़र आने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाया और सभी निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। इस प्रदर्शन में जवानों ने अपनी पेशेवर दक्षता, सटीकता और युद्ध-सज्जता का परिचय दिया।

बद्रीनाथ और जूनागढ़: सांस्कृतिक कूटनीति का नया अध्याय

सैन्य प्रशिक्षण के बाहर हुई इन सांस्कृतिक यात्राओं ने अभ्यास को एक अलग आयाम दिया। बीकानेर के जूनागढ़ किले की यात्रा ने अमेरिकी जवानों को राजस्थान के शाही इतिहास, भव्य स्थापत्य और सैन्य परंपराओं से रूबरू कराया। किले की ऐतिहासिक विरासत ने उन्हें उस कालखंड से परिचित कराया जब स्थापत्य कला, सैन्य कौशल और राजसी परंपराएँ भारतीय इतिहास के अभिन्न अंग थे।

वहीं, हिमालय की गोद में बसे बद्रीनाथ मंदिर की यात्रा ने दोनों देशों के सैनिकों को भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और सदियों पुरानी धार्मिक विरासत को समझने का अवसर दिया। प्राकृतिक परिवेश में स्थित यह मंदिर भारत की धार्मिक पहचान का एक अहम प्रतीक है।

दोनों सेनाओं के बीच सौहार्द और आपसी समझ

प्रशिक्षण क्षेत्र से परे हुए इन संवादों और भ्रमणों ने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के बीच आपसी सम्मान और सांस्कृतिक समझ को और गहरा किया। गौरतलब है कि युद्ध अभ्यास की यह श्रृंखला केवल सामरिक कौशल के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है — यह दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा साझेदारी और लोगों-से-लोगों के संबंधों को मज़बूत करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुकी है। इस बार के अभ्यास ने विशेष रूप से दर्शाया कि साझा सैन्य अनुभव केवल रणक्षेत्र तक नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कृति की समझ तक भी पहुँचते हैं।

आने वाले संस्करणों में इस तरह की सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका और विस्तृत होने की संभावना है, जो भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को एक स्थायी और बहुआयामी नींव प्रदान करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दो लोकतंत्रों के बीच एक जीवंत सांस्कृतिक संवाद बन चुकी है — और यही इसे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में विशेष महत्व देता है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युद्ध अभ्यास 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका 2026 संस्करण 22वाँ है। यह अभ्यास उत्तराखंड के औली तथा राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी शामिल रहे।
अमेरिकी सैनिक बद्रीनाथ मंदिर और जूनागढ़ किले क्यों गए?
युद्ध अभ्यास 2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने बद्रीनाथ मंदिर तथा बीकानेर के जूनागढ़ किले का भ्रमण किया, ताकि वे भारत की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को करीब से जान सकें। इन यात्राओं का उद्देश्य दोनों देशों के जवानों के बीच आपसी समझ और सौहार्द को गहरा करना था।
युद्ध अभ्यास 2026 में किस आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया?
अभ्यास में निगरानी और टोही अभियानों के लिए ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग किया गया। इसके अलावा एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों से डायरेक्ट फायरिंग पद्धति द्वारा सभी निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया गया।
एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर क्या है और इसका महत्व क्यों है?
एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर एक हल्की तोप प्रणाली है जिसका उपयोग सटीक और तेज़ फायरिंग के लिए किया जाता है। राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इससे डायरेक्ट फायरिंग का प्रदर्शन किया गया और सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक नष्ट किए गए, जो जवानों की युद्ध-सज्जता को दर्शाता है।
युद्ध अभ्यास श्रृंखला भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
22 संस्करणों में विकसित यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से यह अभ्यास दोनों देशों के सैनिकों के बीच व्यक्तिगत संबंध, पेशेवर समझ और आपसी विश्वास को मज़बूत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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