युद्ध अभ्यास 2026: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुँचे, 1200 सैनिक साझा अभ्यास में
सारांश
मुख्य बातें
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के 22वें संयुक्त युद्धाभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' को कूटनीतिक समर्थन देते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुँचे। इस अभ्यास में भारत और अमेरिका के कुल 1,200 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं, और यह एक साथ उत्तराखंड के औली तथा राजस्थान के महाजन में संचालित हो रहा है।
युद्ध अभ्यास का दायरा और उद्देश्य
राजदूत सर्जियो गोर ने दौरे के दौरान कहा कि 'युद्ध अभ्यास 2026' भारत के सबसे बड़े द्विपक्षीय रक्षा अभ्यासों में से एक है। उन्होंने कहा कि वह भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक साथ प्रशिक्षण करते देखने के लिए उत्सुक हैं। उनके इस दौरे को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नजदीक से रेखांकित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
अपाचे हेलीकॉप्टर और संयुक्त हवाई-जमीनी कार्रवाई
इस वर्ष के अभ्यास में AH-64E अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर की भागीदारी ने युद्धाभ्यास को एक नया आयाम दिया है। आकाश में अपाचे हेलीकॉप्टर और जमीन पर दोनों देशों के सैनिकों ने मिलकर युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई का अभ्यास किया।
इस समन्वय का प्रमुख उद्देश्य यह परखना था कि हवाई और जमीनी बलों के बीच संपर्क, सटीकता और प्रतिक्रिया की गति को वास्तविक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी रूप से निष्पादित किया जा सकता है।
हथियार प्रणालियों का संयुक्त प्रशिक्षण
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर दोनों देशों के सैनिकों ने हॉवित्जर तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर से संयुक्त फायरिंग अभ्यास किया। फायरिंग रेंज पर दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे की फायरिंग तकनीक और प्रक्रियाओं को करीब से समझा।
अभ्यास में युद्धकालीन तालमेल, मैदानी अभियान क्षमता और विभिन्न हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह सैनिकों के लिए एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को भीतर से समझने का भी अवसर है।
औली और महाजन: दोहरे मोर्चे पर अभ्यास
गौरतलब है कि इस वर्ष 'युद्ध अभ्यास 2026' दो भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में एक साथ संचालित हो रहा है — उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली में पर्वतीय युद्ध कौशल, और राजस्थान के महाजन में मैदानी एवं रेगिस्तानी युद्ध परिदृश्य। यह दोहरा प्रारूप दोनों देशों की सेनाओं को विविध परिस्थितियों में संयुक्त रणनीतिक तैयारी का मौका देता है।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों का संदर्भ
यह 22वाँ संस्करण ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से मज़बूत हुए हैं। दोनों देशों ने COMCASA, BECA और LEMOA जैसे आधारभूत रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर के बाद संयुक्त अभ्यासों की संख्या और जटिलता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। राजदूत गोर का व्यक्तिगत रूप से अभ्यास स्थल पर पहुँचना इस साझेदारी को और दृश्यमान बनाता है।
आने वाले समय में इस अभ्यास से सीखे सबक दोनों सेनाओं की संयुक्त परिचालन प्रक्रियाओं को परिष्कृत करने में सहायक होंगे।