22 सितंबर 2026
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युद्ध अभ्यास 2026: महाजन रेंज में भारत-अमेरिका की संयुक्त फायरिंग, धनुष-पिनाका की गर्जना से दहला मैदान

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युद्ध अभ्यास 2026: महाजन रेंज में भारत-अमेरिका की संयुक्त फायरिंग, धनुष-पिनाका की गर्जना से दहला मैदान

सारांश

महाजन की धरती पर धनुष, पिनाका और एम777 की एकसाथ गर्जना — युद्ध अभ्यास 2026 का यह सत्र सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका की तोपखाना अंतर-संचालनीयता का व्यावहारिक परीक्षण था, जो बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

युद्ध अभ्यास 2026 के तहत 22 सितंबर 2026 को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत-अमेरिका का संयुक्त तोपखाना अभ्यास हुआ।
अभ्यास में एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर , धनुष तोप , पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर , एल70 एयर डिफेंस तोप और एम-लिड्स प्रणाली शामिल रहीं।
दोनों सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने लक्ष्य पहचान, फायर आदेश और सुधार प्रक्रिया का संयुक्त अभ्यास किया।
इससे पूर्व सैन्य कुत्ते राइस, विक्टर, जैक और राउडी ने विशेष अभियानों में भाग लेकर अमेरिकी सैनिकों के सामने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
दो दिन पहले के सत्र में केवल एम777 हॉवित्जर से फायरिंग हुई थी; इस बार हथियार प्रणालियों का दायरा काफी व्यापक रहा।

भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच चल रहे युद्ध अभ्यास 2026 के तहत 22 सितंबर 2026 को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक निर्णायक संयुक्त फायरिंग अभ्यास संपन्न हुआ, जिसमें एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, धनुष तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर से एक साथ फायरिंग की गई। यह अब तक के अभ्यास का सबसे व्यापक तोपखाना सत्र रहा, जहाँ दोनों देशों के सैनिकों ने युद्धक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों में फायर सपोर्ट की पूरी श्रृंखला का संयुक्त रूप से अभ्यास किया।

मुख्य घटनाक्रम

सेना के अनुसार, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इस सत्र के दौरान एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, धनुष तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर के अतिरिक्त एल70 एयर डिफेंस तोपें और एम-लिड्स प्रणाली भी कार्रवाई में देखी गईं। इन हथियार प्रणालियों का एकसाथ उपयोग दोनों सेनाओं की परिचालन अनुकूलता को एक नए स्तर पर ले जाता है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले भी दोनों सेनाओं ने तोपखाना क्षमता का प्रदर्शन किया था, किंतु उस सत्र में केवल एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर से ही फायरिंग की गई थी। 22 सितंबर के अभ्यास में हथियार प्रणालियों की विविधता और समन्वय का दायरा उल्लेखनीय रूप से व्यापक रहा।

फायर कोऑर्डिनेशन और ऑब्जर्वेशन ट्रेनिंग

संयुक्त प्रशिक्षण के एक प्रमुख पहलू के रूप में दोनों सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने साथ मिलकर काम किया। सैनिकों ने लक्ष्य की पहचान, उसकी स्थिति की सूचना देना, फायर आदेश भेजना और फायरिंग के बाद आवश्यक सुधार करने की पूरी प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से अंजाम दिया।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच फायरिंग योजना, समन्वय और कार्रवाई में तालमेल को मजबूत करना था। दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की तोपखाना तकनीक, संचार प्रक्रिया और फायर नियंत्रण प्रणाली को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

सैन्य कुत्तों की भूमिका

इससे पूर्व, युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान भारतीय सेना के प्रशिक्षित सैन्य कुत्ते — राइस, विक्टर, जैक और राउडी — भी इस संयुक्त अभ्यास का हिस्सा बने थे। इन चार कुत्तों ने संदिग्ध ठिकाने में प्रवेश और रस्सी के सहारे नीचे उतरने जैसे विशेष अभियानों का प्रदर्शन किया, जिसे अमेरिकी सैनिकों ने करीब से देखा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका रक्षा संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं और दोनों देशों के बीच अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

व्यापक सामरिक महत्त्व

युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच सबसे नियमित और लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों में से एक है। यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को साझा युद्धक प्रक्रियाएँ, आपातकालीन संचार और संयुक्त फायर सपोर्ट संचालन में पारस्परिक दक्षता विकसित करने का अवसर देता है। इस वर्ष का संस्करण परिचालन अनुभव साझा करने और जटिल युद्ध परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई की क्षमता को और पुख्ता करने पर केंद्रित रहा।

आने वाले दिनों में अभ्यास के अंतिम चरण में और संयुक्त सामरिक सत्रों के आयोजन की संभावना है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

धनुष और पिनाका की एकसाथ फायरिंग तकनीकी प्रदर्शन से आगे की बात है — यह भारत-अमेरिका तोपखाना अंतर-संचालनीयता की उस यात्रा का हिस्सा है जो हिंद-प्रशांत रणनीति के केंद्र में है। ध्यान देने योग्य यह है कि फायर कंट्रोल प्रक्रियाओं और संचार प्रणालियों का साझा अभ्यास दीर्घकालिक रूप से संयुक्त अभियान क्षमता को उस स्तर तक ले जाने की कोशिश है जहाँ दोनों सेनाएँ वास्तविक संकट में निर्बाध तालमेल कर सकें। हालाँकि, यह भी गौरतलब है कि अभ्यास की सफलता कागज़ पर प्रभावशाली दिखती है, लेकिन वास्तविक अंतर-संचालनीयता तभी सिद्ध होती है जब दोनों सेनाएँ एक-दूसरे के नेटवर्क, एन्क्रिप्शन और कमांड संरचना के साथ सहजता से काम कर सकें — जो एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युद्ध अभ्यास 2026 क्या है और यह कहाँ हो रहा है?
युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच नियमित रूप से आयोजित होने वाला द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इस वर्ष का संस्करण महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, राजस्थान में आयोजित हो रहा है, जिसमें तोपखाना, विशेष अभियान और संयुक्त फायर सपोर्ट प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित है।
22 सितंबर के संयुक्त फायरिंग अभ्यास में कौन-कौन सी हथियार प्रणालियाँ शामिल थीं?
22 सितंबर 2026 के सत्र में एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, धनुष तोप, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, एल70 एयर डिफेंस तोप और एम-लिड्स प्रणाली से फायरिंग की गई। यह इस अभ्यास श्रृंखला का अब तक का सबसे व्यापक तोपखाना सत्र रहा।
इस अभ्यास में ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों की क्या भूमिका रही?
दोनों सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने संयुक्त रूप से लक्ष्य की पहचान, उसकी स्थिति की सूचना देना, फायर आदेश भेजना और फायरिंग के बाद सुधार प्रक्रिया का अभ्यास किया। इससे दोनों सेनाओं के बीच फायर कोऑर्डिनेशन और संचार की व्यावहारिक समझ विकसित हुई।
भारतीय सैन्य कुत्तों ने अभ्यास में क्या प्रदर्शन किया?
राइस, विक्टर, जैक और राउडी नामक चार भारतीय सैन्य कुत्तों ने युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान विशेष अभियानों में भाग लिया। इन्होंने संदिग्ध ठिकाने में प्रवेश और रस्सी के सहारे नीचे उतरने जैसे अभ्यास किए, जिसे अमेरिकी सैनिकों ने करीब से देखा।
युद्ध अभ्यास 2026 भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए क्यों अहम है?
यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को साझा युद्धक प्रक्रियाएँ, संचार और संयुक्त फायर सपोर्ट संचालन में पारस्परिक दक्षता विकसित करने का अवसर देता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह अंतर-संचालनीयता भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की रीढ़ मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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