23 सितंबर 2026
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युद्ध अभ्यास 2026: AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर से भारत-अमेरिका की संयुक्त हवाई-जमीनी कार्रवाई, महाजन रेंज में 1,200 जवान

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युद्ध अभ्यास 2026: AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर से भारत-अमेरिका की संयुक्त हवाई-जमीनी कार्रवाई, महाजन रेंज में 1,200 जवान

सारांश

युद्ध अभ्यास 2026 का 22वाँ संस्करण अब सिर्फ जमीनी ड्रिल नहीं रहा — AH-64E अपाचे की एंट्री के साथ यह भारत-अमेरिका की एकीकृत हवाई-जमीनी युद्ध क्षमता की असली परीक्षा बन गया है। महाजन रेंज में 1,200 जवान, अपाचे, पिनाका और एम-777 — यह दोनों देशों की बढ़ती सैन्य अंतर-संचालनीयता का ठोस प्रमाण है।

मुख्य बातें

युद्ध अभ्यास 2026 के 22वें संस्करण में एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल हुए, जिससे अभ्यास में हवाई-जमीनी एकीकरण का नया आयाम जुड़ा।
राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका के 1,200 सैन्यकर्मियों ने संयुक्त अभ्यास किया।
अभ्यास में एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर , धनुष तोप , पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर , एल-70 एयर डिफेंस तोपें और एम-लिड्स प्रणालियाँ शामिल रहीं।
अभ्यास उत्तराखंड के औली से लेकर राजस्थान के महाजन तक फैला है — बहु-भूभागीय युद्ध क्षमता का परीक्षण।
सैनिकों ने निगरानी और टोह के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का भी उपयोग किया।

भारत और अमेरिका के बीच जारी युद्ध अभ्यास 2026 में एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की एंट्री के साथ यह संयुक्त सैन्य अभ्यास एक नए और निर्णायक चरण में पहुँच गया है। राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आसमान से अपाचे और जमीन पर तैनात भारतीय व अमेरिकी सैनिकों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त हवाई-जमीनी कार्रवाई का गहन अभ्यास किया। यह अभ्यास का 22वाँ संस्करण है, जिसमें दोनों देशों के कुल 1,200 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

अपाचे की भागीदारी और हवाई-जमीनी तालमेल

सेना के अनुसार, इस चरण में सैनिकों ने पहले संयुक्त रूप से मिशन की विस्तृत योजना तैयार की। इसके बाद जमीन पर तैनात दस्तों और हवा में उड़ रहे एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों के बीच रीयल-टाइम समन्वय का अभ्यास किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह परखना था कि संकट की स्थिति में हेलीकॉप्टर और जमीनी सैनिक कितनी तेज़ी और सटीकता से एकीकृत कार्रवाई कर सकते हैं।

सैनिकों ने हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई को एक साथ जोड़ने, निरंतर संचार बनाए रखने और सही समय पर निर्णायक कदम उठाने का अभ्यास किया। अपाचे की उपस्थिति ने इस युद्धाभ्यास को केवल पैदल सेना के प्रशिक्षण से आगे ले जाकर संयुक्त हथियार युद्ध (Combined Arms Warfare) की दिशा में मज़बूत किया।

भारी हथियार प्रणालियों का संयुक्त फायरिंग अभ्यास

अपाचे की एंट्री से पहले महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारी हथियार प्रणालियों के साथ संयुक्त फायरिंग अभ्यास किया गया। सेना के मुताबिक, इसमें एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, धनुष तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर से फायरिंग की गई। इसके अतिरिक्त, एल-70 एयर डिफेंस तोपों और एम-लिड्स प्रणालियों को भी अभ्यास के दौरान सक्रिय रूप से उपयोग में लाया गया।

दोनों देशों की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने मिलकर प्रशिक्षण लिया — जिसमें लक्ष्य की पहचान, उसकी सटीक स्थिति का संप्रेषण, कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाना और फायर आदेश भेजने का अभ्यास शामिल था। तोपों की गूंज के बीच दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे की फायरिंग तकनीक और प्रक्रियाओं को करीब से समझा।

अभ्यास का विस्तार और रणनीतिक महत्त्व

यह युद्धाभ्यास केवल महाजन तक सीमित नहीं है — यह उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके तक फैला हुआ है, जो दोनों सेनाओं की बहु-भूभागीय (multi-terrain) युद्ध क्षमता को परखता है। सैनिकों ने निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का भी उपयोग किया, जो आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है।

गौरतलब है कि यह अभ्यास भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की उस व्यापक रूपरेखा का हिस्सा है, जो हाल के वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को लेकर तेज़ी से गहरी हुई है। अपाचे हेलीकॉप्टरों की भागीदारी यह संकेत देती है कि दोनों देश अब केवल पारंपरिक जमीनी युद्ध नहीं, बल्कि एकीकृत हवाई-जमीनी अभियानों में भी अंतर-संचालनीयता (interoperability) को प्राथमिकता दे रहे हैं।

परस्पर समझ और प्रक्रियागत एकीकरण

भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के लिए यह अभ्यास एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संचार प्रोटोकॉल और युद्ध प्रक्रियाओं को गहराई से समझने का अवसर भी है। दोनों सेनाएँ साझा प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedures) और आपसी संचार को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं, ताकि किसी वास्तविक संयुक्त अभियान में निर्बाध समन्वय सुनिश्चित हो सके।

आगे की दिशा

युद्ध अभ्यास के इस 22वें संस्करण में अपाचे हेलीकॉप्टरों की भागीदारी और उन्नत हथियार प्रणालियों का एकीकरण यह स्पष्ट करता है कि भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग अब केवल कूटनीतिक प्रतीकवाद से आगे बढ़कर ठोस सैन्य क्षमता निर्माण की दिशा में जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच दीर्घकालिक परिचालन विश्वास (operational trust) की नींव रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ संयुक्त अभियान क्षमता अब कागज़ी समझौतों से निकलकर मैदान में उतर रही है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इंडो-पैसिफिक में बढ़ते तनाव के बीच ऐसे अभ्यासों की आवृत्ति और गहराई को और बढ़ाने की ज़रूरत है। औली की बर्फ से महाजन के रेगिस्तान तक फैला यह अभ्यास दोनों देशों की बहु-भूभागीय सोच को दर्शाता है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह अंतर-संचालनीयता किसी वास्तविक संयुक्त अभियान में कितनी निर्बाध साबित होती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युद्ध अभ्यास 2026 क्या है और इसमें कौन भाग ले रहा है?
युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका यह 22वाँ संस्करण है। इसमें दोनों देशों के कुल 1,200 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं और यह उत्तराखंड के औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक आयोजित हो रहा है।
अपाचे हेलीकॉप्टर की इस अभ्यास में क्या भूमिका है?
एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने जमीनी सैनिकों के साथ संयुक्त हवाई-जमीनी कार्रवाई का अभ्यास किया। इसका उद्देश्य यह परखना था कि संकट की स्थिति में हेलीकॉप्टर और जमीनी दस्ते कितनी तेज़ी और सटीकता से एकीकृत अभियान चला सकते हैं।
महाजन फायरिंग रेंज में किन हथियार प्रणालियों का उपयोग हुआ?
सेना के अनुसार, अभ्यास में एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, धनुष तोप, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, एल-70 एयर डिफेंस तोपें और एम-लिड्स प्रणालियाँ शामिल रहीं। इन हथियारों से संयुक्त फायरिंग अभ्यास के साथ-साथ लक्ष्य पहचान और फायर समन्वय का भी प्रशिक्षण दिया गया।
इस युद्धाभ्यास का रणनीतिक महत्त्व क्या है?
यह अभ्यास भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को व्यावहारिक स्तर पर मज़बूत करता है। अपाचे जैसी उन्नत प्रणालियों का एकीकरण और ड्रोन व स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग दर्शाता है कि दोनों देश आधुनिक और बहु-आयामी युद्ध परिदृश्यों के लिए मिलकर तैयारी कर रहे हैं।
यह अभ्यास किन-किन स्थानों पर हो रहा है?
युद्ध अभ्यास 2026 का आयोजन उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली और राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज — दोनों स्थानों पर हो रहा है। यह बहु-भूभागीय (multi-terrain) प्रारूप दोनों सेनाओं की विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता को परखता है।
राष्ट्र प्रेस
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