14 जुलाई 2026
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यूपी में 17 नए संग्रहालय: लखनऊ-मथुरा से गोरखपुर तक ₹250 करोड़ से सँवरेगी सांस्कृतिक विरासत

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यूपी में 17 नए संग्रहालय: लखनऊ-मथुरा से गोरखपुर तक ₹250 करोड़ से सँवरेगी सांस्कृतिक विरासत

सारांश

उत्तर प्रदेश का संस्कृति विभाग 2026-27 में 17 संग्रहालय परियोजनाओं के ज़रिए राज्य की ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को नया रूप देने जा रहा है — लखनऊ के लिए ₹150 करोड़ और मथुरा के लिए ₹100 करोड़ सहित कुल बड़े बजट के साथ। यह योजना धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को एकसाथ मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 17 नई संग्रहालय परियोजनाएँ प्रस्तावित की हैं।
राज्य संग्रहालय, लखनऊ के उच्चीकरण के लिए ₹150 करोड़ और राज्य संग्रहालय, मथुरा के आधुनिकीकरण के लिए ₹100 करोड़ की माँग भेजी गई है।
गोरखपुर में गौरव संग्रहालय के लिए ₹22.50 करोड़ , फर्रूखाबाद में ₹24.50 करोड़ और कन्नौज में बाल संग्रहालय के लिए ₹15 करोड़ प्रस्तावित।
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (चिरगांव, झाँसी) और संत तुलसीदास की जन्मस्थली (राजापुर) को समर्पित स्मारकों के लिए ₹5-5 करोड़ का प्रावधान।
बलिया, अलीगढ़, सहारनपुर और बरेली में भी संग्रहालय प्रस्तावों पर उच्च स्तरीय कार्रवाई जारी।
कई परियोजनाओं पर शासन स्तर पर निर्णय अभी लंबित ; मंत्री ने शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने 29 मई 2026 को घोषणा की कि राज्य के संस्कृति विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संग्रहालयों की स्थापना, विकास, उच्चीकरण और क्यूरेशन से जुड़ी 17 नई परियोजनाएँ प्रस्तावित की हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहरों, लोक संस्कृति और साहित्यिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।

प्रमुख परियोजनाएँ और प्रस्तावित बजट

इस रोडमैप में सबसे बड़ा आवंटन राज्य संग्रहालय, लखनऊ के उच्चीकरण, नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्तावित ₹150 करोड़ है, जबकि राज्य संग्रहालय, मथुरा के आधुनिकीकरण के लिए ₹100 करोड़ की नई माँग भेजी गई है। गोरखपुर में प्रस्तावित गौरव संग्रहालय के क्यूरेशन कार्य के लिए ₹22.50 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

फर्रूखाबाद में संग्रहालय स्थापना और क्यूरेशन के लिए ₹24.50 करोड़, कन्नौज में बाल संग्रहालय की स्थापना एवं क्यूरेशन के लिए ₹15 करोड़, और कासगंज में पुरातत्व संग्रहालय के लिए ₹16.82 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

साहित्यिक और धार्मिक विरासत को समर्पित परियोजनाएँ

झाँसी के चिरगांव में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के संग्रहालय एवं पुस्तकालय की स्थापना के लिए ₹5 करोड़ प्रस्तावित हैं। इसी प्रकार चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि आश्रम, लालापुर स्थित संग्रहालय के क्यूरेशन के लिए ₹5 करोड़ और राजापुर स्थित संत तुलसीदास की जन्मस्थली तुलसीपीठ एवं तुलसी स्मारक के पर्यटन विकास व क्यूरेशन के लिए भी ₹5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

आजमगढ़ के हरिऔध कला केंद्र में संग्रहालय एवं पुस्तकालय स्थापना के लिए ₹5 करोड़, लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह स्मृति संस्थान एवं विरासत-ए-खालसा स्मारक निर्माण के लिए ₹10 करोड़ और मानव संस्कृति विकास संग्रहालय के लिए ₹25 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। सोनभद्र में संग्रहालय स्थापना के लिए ₹1.33 करोड़ की अनुमानित लागत निर्धारित की गई है।

सरकार की प्राथमिकता और युवाओं से जुड़ाव

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इन संग्रहालयों की स्थापना और विकास से युवाओं को प्रदेश की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई परियोजनाओं पर शासन स्तर पर निर्णय अभी लंबित है, जिनका शीघ्र निस्तारण कर कार्य शुरू कराया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी राजस्व और सॉफ्ट पावर के स्रोत के रूप में विकसित करने पर ज़ोर दे रही है।

आगामी जनपदों में विस्तार की योजना

बलिया, अलीगढ़, सहारनपुर और बरेली में भी संग्रहालय स्थापना संबंधी प्रस्तावों पर उच्च स्तर पर कार्रवाई जारी है। संस्कृति विभाग के अनुसार इन परियोजनाओं को शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। गौरतलब है कि यह रोडमैप उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 17 में से कितनी परियोजनाएँ समयसीमा में पूरी होंगी — खुद मंत्री ने स्वीकार किया कि 'कई परियोजनाओं पर शासन स्तर पर निर्णय लंबित है।' उत्तर प्रदेश में बड़े सांस्कृतिक प्रकल्पों के अधूरे रहने का इतिहास रहा है, और बजट प्रस्ताव तथा वास्तविक आवंटन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रही है। लखनऊ और मथुरा संग्रहालयों के लिए ₹250 करोड़ की संयुक्त माँग प्रभावशाली है, परंतु यह 'नई माँग' के रूप में भेजी गई है — अनुमोदित राशि नहीं। बिना समयबद्ध क्रियान्वयन ढाँचे और स्वतंत्र निगरानी के, यह रोडमैप एक और नीतिगत घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में 17 नए संग्रहालय परियोजनाएँ क्या हैं?
ये वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रस्तावित 17 परियोजनाएँ हैं, जिनमें नए संग्रहालयों की स्थापना, मौजूदा संग्रहालयों का उच्चीकरण और क्यूरेशन शामिल है। इनका उद्देश्य प्रदेश की ऐतिहासिक, साहित्यिक और लोक विरासत को आधुनिक रूप में संरक्षित करना है।
लखनऊ और मथुरा संग्रहालयों के लिए कितना बजट प्रस्तावित है?
राज्य संग्रहालय, लखनऊ के उच्चीकरण और नवीनीकरण के लिए ₹150 करोड़ और राज्य संग्रहालय, मथुरा के आधुनिकीकरण के लिए ₹100 करोड़ की नई माँग शासन को भेजी गई है। ये दोनों इस रोडमैप की सबसे बड़ी एकल परियोजनाएँ हैं।
गोरखपुर के गौरव संग्रहालय के लिए क्या योजना है?
गोरखपुर में प्रस्तावित गौरव संग्रहालय के क्यूरेशन कार्य के लिए ₹22.50 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। यह परियोजना प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक प्रदर्शनी तकनीक के ज़रिए प्रस्तुत करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
साहित्यकारों की विरासत को किन परियोजनाओं में शामिल किया गया है?
झाँसी के चिरगांव में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के संग्रहालय एवं पुस्तकालय के लिए ₹5 करोड़ और चित्रकूट के राजापुर में संत तुलसीदास की जन्मस्थली तुलसीपीठ एवं तुलसी स्मारक के पर्यटन विकास के लिए ₹5 करोड़ प्रस्तावित हैं। आजमगढ़ के हरिऔध कला केंद्र में भी संग्रहालय एवं पुस्तकालय के लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान है।
इन परियोजनाओं पर काम कब शुरू होगा?
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार कई परियोजनाओं पर शासन स्तर पर निर्णय अभी लंबित है और शीघ्र निस्तारण के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा। बलिया, अलीगढ़, सहारनपुर और बरेली के प्रस्तावों पर भी उच्च स्तरीय कार्रवाई जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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