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2 लाख आंगनवाड़ी केंद्र बनेंगे 'सक्षम आंगनवाड़ी', पोषण और बाल शिक्षा पर केंद्र सरकार का बड़ा फोकस

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2 लाख आंगनवाड़ी केंद्र बनेंगे 'सक्षम आंगनवाड़ी', पोषण और बाल शिक्षा पर केंद्र सरकार का बड़ा फोकस

सारांश

देशभर के 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' में बदला जाएगा — एलईडी स्क्रीन, पोषण वाटिका और डिजिटल निगरानी के साथ। मिशन पोषण 2.0 के तहत बच्चों में एनीमिया 8.5% अंक घटा है। यह भारत के सबसे बड़े बाल पोषण नेटवर्क का अब तक का सबसे बड़ा ढाँचागत उन्नयन है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' में विकसित करने की मंजूरी दी गई है।
यह पहल मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत है, जो आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरी बालिका योजना को एकीकृत करती है।
लाभार्थियों में 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे , गर्भवती महिलाएँ , स्तनपान कराने वाली माताएँ और 14-18 वर्ष की किशोरियाँ (आकांक्षी जिलों में) शामिल हैं।
केंद्रों में एलईडी स्क्रीन , जल शुद्धीकरण , पोषण वाटिका और प्रारंभिक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
पोषण मानकों में जनवरी 2023 में संशोधन — अब केवल कैलोरी नहीं, संतुलित और विविध आहार पर ज़ोर।
6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया दर में 8.5 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज; निगरानी 'पोषण ट्रैकर' ऐप से।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने 25 जुलाई 2025 को लोकसभा में जानकारी दी कि देशभर के 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' के रूप में उन्नत करने की स्वीकृति दी जा चुकी है। इन केंद्रों पर बच्चों को बेहतर पोषण, प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा की सुविधाएँ उपलब्ध कराना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। यह घोषणा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत की गई है।

मिशन पोषण 2.0 का दायरा और लाभार्थी

मंत्री ने बताया कि कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए आंगनवाड़ी सेवाएँ, पोषण अभियान और किशोरी बालिका योजना को एकीकृत कर मिशन पोषण 2.0 के तहत लाया गया है। यह मिशन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, विशेष रूप से अधिक कुपोषण वाले जिलों में लागू किया जा रहा है।

मिशन के अंतर्गत 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और किशोरियाँ (आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग) लाभार्थी हैं।

सक्षम आंगनवाड़ी में क्या होगा खास

सावित्री ठाकुर के अनुसार, इन उन्नत केंद्रों में एलईडी स्क्रीन, जल शुद्धीकरण व्यवस्था, पोषण वाटिका, प्रारंभिक बाल शिक्षा सामग्री और 'बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड' पेंटिंग्स जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। बेहतर पोषण सेवाओं के साथ-साथ प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा की गतिविधियाँ भी इन केंद्रों पर संचालित की जाएंगी।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़े देश में बाल कुपोषण की गंभीर स्थिति को रेखांकित करते रहे हैं। गौरतलब है कि आंगनवाड़ी नेटवर्क भारत की सबसे बड़ी ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण वितरण प्रणालियों में से एक है।

पोषण मानकों में बदलाव और पूरक आहार

मंत्री ने बताया कि 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। जनवरी 2023 में इन मानकों में संशोधन किया गया — पहले के मानक केवल कैलोरी पर आधारित थे, जबकि नए मानक भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और विविध आहार पर केंद्रित हैं।

गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण (टेक होम राशन) भी प्रदान किया जाता है।

डिजिटल निगरानी और सूक्ष्म पोषण में सुधार

इस मिशन की निगरानी 'पोषण ट्रैकर' नामक डिजिटल एप्लिकेशन के माध्यम से की जा रही है। यह सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली आंगनवाड़ी केंद्रों, कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की गतिविधियों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी करती है। लाभार्थियों और पोषण सुधार से जुड़े राज्यवार आँकड़े इस पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

सूक्ष्म पोषक तत्वों के क्षेत्र में भी उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं — 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया की दर में 8.5 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। मंत्री ने इसे आयरन-फोलिक एसिड की खुराक, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और पूरक पोषण कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम बताया।

विभिन्न संस्थागत अध्ययनों और सर्वेक्षणों के आधार पर सावित्री ठाकुर ने कहा कि मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से मुकाबले और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों की उन्नति से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में बाल स्वास्थ्य के संकेतकों में और सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता होगी — भारत में बड़े सामाजिक कार्यक्रमों की घोषणाएँ और ज़मीनी वास्तविकता के बीच का फासला अक्सर चिंताजनक रहा है। एनीमिया में 8.5 प्रतिशत अंक की कमी सकारात्मक है, लेकिन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़े बताते हैं कि देश में बाल कुपोषण अभी भी स्वीकार्य स्तर से काफी ऊपर है। 'पोषण ट्रैकर' जैसी डिजिटल निगरानी प्रणाली तभी कारगर होगी जब डेटा की गुणवत्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता दोनों सुनिश्चित हों। सरकार को इस मिशन के लिए सत्यापन-योग्य परिणाम संकेतक सार्वजनिक करने चाहिए ताकि जवाबदेही तय हो सके।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सक्षम आंगनवाड़ी क्या है और यह सामान्य आंगनवाड़ी से कैसे अलग है?
सक्षम आंगनवाड़ी, मिशन पोषण 2.0 के तहत उन्नत किए गए आंगनवाड़ी केंद्र हैं जिनमें एलईडी स्क्रीन, जल शुद्धीकरण व्यवस्था, पोषण वाटिका और प्रारंभिक बाल शिक्षा सामग्री जैसी आधुनिक सुविधाएँ होती हैं। ये केंद्र केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा का भी केंद्र बनते हैं।
मिशन पोषण 2.0 से कौन-कौन से लोग लाभान्वित होंगे?
मिशन पोषण 2.0 के तहत 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और किशोरियाँ (आकांक्षी जिलों व पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग) लाभार्थी हैं। यह मिशन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, विशेषकर अधिक कुपोषण वाले जिलों में लागू है।
पोषण मानकों में जनवरी 2023 में क्या बदलाव किया गया?
जनवरी 2023 में संशोधित पोषण मानक केवल कैलोरी पर निर्भर नहीं रहे — अब ये भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और विविध आहार पर आधारित हैं। यह बदलाव बच्चों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पोषण ट्रैकर ऐप क्या करता है?
पोषण ट्रैकर एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल एप्लिकेशन है जो आंगनवाड़ी केंद्रों, कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की गतिविधियों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी करता है। इस पर लाभार्थियों और पोषण सुधार से जुड़े राज्यवार आँकड़े भी उपलब्ध हैं।
बच्चों में एनीमिया दर में कितनी कमी आई है?
6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया की दर में 8.5 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर के अनुसार यह आयरन-फोलिक एसिड की खुराक, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और पूरक पोषण कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम है।
राष्ट्र प्रेस
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