3 अगस्त 2026
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नीट संसद मार्च: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, आयोजकों की जवाबदेही और जंतर-मंतर विकल्प पर बुधवार को सुनवाई

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नीट संसद मार्च: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, आयोजकों की जवाबदेही और जंतर-मंतर विकल्प पर बुधवार को सुनवाई

सारांश

नीट पेपर लीक के विरोध में हुए 20 जुलाई के संसद मार्च को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल हुई है। वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी ने आयोजकों की जवाबदेही और सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा के खिलाफ कार्रवाई माँगी है। अदालत बुधवार को सुनवाई करेगी।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने 3 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर 20 जुलाई के संसद मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय करने की माँग की।
याचिका में सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को सामुदायिक सेवा का आदेश देने की भी माँग की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत , जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.
मोहना की पीठ ने जंतर-मंतर विकल्प वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अधिकारियों से निर्देश लेने को कहा गया; मुख्य न्यायाधीश ने राजनीतिक प्रदर्शनों में हस्तक्षेप से इनकार किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित संसद मार्च और जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई की सहमति दे दी है। भारतीय वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने सोमवार, 3 अगस्त को यह याचिका दाखिल की, जिसमें मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय करने की माँग की गई है। अदालत इस मामले में बुधवार को सुनवाई करेगी।

याचिका में क्या माँगा गया

वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी ने अपनी याचिका में कोर्ट के सामने तर्क रखा कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी थी। याचिका में यह भी माँग की गई है कि सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई हो और उन्हें सामुदायिक सेवा का आदेश दिया जाए। याचिकाकर्ता का मानना है कि ऐसे आयोजनों में भाग लेने वाले आयोजकों को उनकी जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।

जंतर-मंतर के विकल्प पर अलग याचिका

इसी दिन अदालत ने जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी एक अलग जनहित याचिका पर भी सुनवाई की। इस याचिका में कहा गया कि जंतर-मंतर पर जगह की कमी के कारण आम नागरिकों की आवाजाही बाधित होती है और वहाँ पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ तथा अन्य जन-सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। याचिका में माँग की गई है कि प्रदर्शनकारियों के लिए कोई वैकल्पिक स्थान चिह्नित किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने जंतर-मंतर से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वे उठाए गए मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करें। मुख्य न्यायाधीश ने इस विषय को महत्वपूर्ण बताया।

राजनीतिक संदर्भ और अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के प्रदर्शन के आह्वान और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रस्तावित धरने का भी उल्लेख किया गया। यह भी कहा गया कि 20 जुलाई जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत इन राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देगी। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में व्यापक आक्रोश पैदा किया था, जिसके चलते यह मार्च आयोजित हुआ था।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय बुधवार को संसद मार्च के आयोजकों की जवाबदेही से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा। जंतर-मंतर के विकल्प वाली जनहित याचिका में केंद्र सरकार का जवाब आने के बाद अगली तारीख तय होगी। यह मामला नीट विवाद की व्यापक न्यायिक निगरानी की कड़ी में एक और अहम पड़ाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जिम्मेदारी किसकी? आयोजकों की जवाबदेही तय करने की माँग एक न्यायसंगत बहस है, लेकिन इसे राजनीतिक असहमति को दबाने के औजार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए — यह सुनिश्चित करना अदालत की भी परीक्षा है। जंतर-मंतर के विकल्प वाला मुद्दा वर्षों पुराना है और बार-बार अदालतों में आता रहा है, पर ठोस समाधान अब तक नहीं निकला। मुख्य न्यायाधीश का राजनीतिक मामलों में दखल न देने का स्पष्ट रुख संस्थागत संयम का संकेत है, जो लोकतांत्रिक दृष्टि से सराहनीय है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

20 जुलाई के संसद मार्च पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दाखिल की?
भारतीय वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने 3 अगस्त को यह याचिका दाखिल की। याचिका में नीट पेपर लीक विरोध के तहत 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय करने की माँग की गई है।
याचिका में क्या-क्या माँगें की गई हैं?
याचिका में तीन प्रमुख माँगें हैं — संसद मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय करना, जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई, और सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा इस्तेमाल करने वाले युवाओं को सामुदायिक सेवा का आदेश देना।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कब सुनवाई करेगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने संसद मार्च से जुड़ी याचिका पर बुधवार को सुनवाई की तारीख तय की है। जंतर-मंतर के विकल्प वाली जनहित याचिका में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया गया है और उनका जवाब आने के बाद अगली तारीख तय होगी।
जंतर-मंतर के विकल्प वाली याचिका में क्या कहा गया है?
इस जनहित याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर जगह की कमी से आम नागरिकों की आवाजाही बाधित होती है और वहाँ पर्याप्त चिकित्सा व अन्य जन-सुविधाएँ नहीं हैं। याचिका में माँग है कि प्रदर्शनकारियों के लिए कोई वैकल्पिक स्थान चिह्नित किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राजनीतिक प्रदर्शनों पर क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत राजनीतिक प्रदर्शनों के मामलों में दखल नहीं देगी। यह टिप्पणी उस संदर्भ में आई जब सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के प्रदर्शन के आह्वान और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रस्तावित धरने का उल्लेख किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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