30 अगस्त 2026
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दिल्ली की 3 लैंडफिल साइटों से 2.16 करोड़ टन कचरा साफ, 100 एकड़ जमीन मुक्त: CM रेखा गुप्ता

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दिल्ली की 3 लैंडफिल साइटों से 2.16 करोड़ टन कचरा साफ, 100 एकड़ जमीन मुक्त: CM रेखा गुप्ता

सारांश

दिल्ली सरकार ने ओखला, भलस्वा और गाजीपुर की तीन लैंडफिल साइटों से 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा हटाकर 100 एकड़ जमीन वापस हासिल की है। CM रेखा गुप्ता के अनुसार चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट भी तैयार हैं, जो रोज़ाना के कचरे को उसी दिन निपटाएंगे।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 30 अगस्त 2026 को तीन लैंडफिल साइटों पर 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा निपटान की जानकारी दी।
ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन कचरा हटाकर 35 एकड़ , भलस्वा में 102 लाख मीट्रिक टन हटाकर 45 एकड़ , और गाजीपुर में 44 लाख मीट्रिक टन हटाकर 20 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त की गई।
कुल 100 एकड़ भूमि तीनों साइटों से मुक्त की गई है।
गाजीपुर के इनर्ट मटीरियल का उपयोग निचले इलाकों को भरने और सड़क आधार तैयार करने में किया जा रहा है।
दिल्ली में चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने की तैयारी पूर्ण, रोज़ाना का कचरा रोज़ाना प्रोसेस करने का लक्ष्य।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 30 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राजधानी की तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों — ओखला, भलस्वा और गाजीपुर — पर वैज्ञानिक पद्धति से अब तक लगभग 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का निपटान किया जा चुका है और 100 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि इन इलाकों में रहने वाले लाखों निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में भी सीधा सुधार ला रही है।

तीनों साइटों पर कितना काम हुआ

ओखला लैंडफिल पर लगभग 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का निपटान किया गया है, जिससे 35 एकड़ भूमि वापस मिली है। भलस्वा में सबसे अधिक — लगभग 102 लाख मीट्रिक टन — कचरे का निपटान हुआ और 45 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त की गई। गाजीपुर में लगभग 44 लाख मीट्रिक टन कचरे का निपटान हुआ, जिससे 20 एकड़ भूमि मुक्त हुई।

इनर्ट मटीरियल का उपयोग

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि गाजीपुर में कचरे के निपटान के बाद प्राप्त बेकार सामग्री (इनर्ट मटीरियल) को भी व्यर्थ नहीं जाने दिया गया। इस सामग्री का उपयोग निचले इलाकों को भरने और सड़कों के आधार (सब-बेस) तैयार करने में किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह दृष्टिकोण कचरे के वैज्ञानिक निपटान को संसाधन-पुनर्उपयोग से जोड़ता है।

आम जनता पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लैंडफिल साइटों के आसपास रहने वाले निवासियों को अब साफ-सुथरा और बेहतर माहौल मिल रहा है। उन्होंने जोर दिया कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देता है और इन क्षेत्रों से रोज़ाना गुज़रने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल रहा है। गौरतलब है कि ये तीनों लैंडफिल साइटें वर्षों से दिल्ली में प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट का केंद्र बनी हुई थीं।

भविष्य की योजना: वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में चार नए 'वेस्ट-टू-एनर्जी' प्लांट लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जब ये प्लांट चालू होंगे, तो दिल्ली में रोज़ाना उत्पन्न होने वाले कचरे को उसी दिन प्रोसेस करने की क्षमता विकसित हो जाएगी। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कचरे के नए पहाड़ न बनें और रोज़ाना का कचरा रोज़ाना ही निपटाया जाए।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लंबे समय से नीतिगत विफलता का प्रतीक रहा है। नई सरकार के अनुसार, वैज्ञानिक रोडमैप और समय-सीमा के साथ काम करने की रणनीति ने अब तक के परिणाम दिए हैं। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों के चालू होने के बाद यह देखा जाएगा कि दिल्ली की कचरा प्रबंधन प्रणाली वास्तव में दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बन पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये साइटें स्थायी रूप से कचरामुक्त रह पाएंगी — क्योंकि दिल्ली में रोज़ाना हज़ारों टन नया कचरा उत्पन्न होता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों की 'तैयारी पूरी' की घोषणा पहले भी हो चुकी है; इस बार क्रियान्वयन की समयसीमा और क्षमता के स्वतंत्र सत्यापन की ज़रूरत है। गौरतलब है कि इन तीनों लैंडफिल साइटों पर कचरा दशकों की नीतिगत विफलता का परिणाम था, और नई सरकार की उपलब्धियों को उसी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। जब तक रोज़ाना का कचरा रोज़ाना नहीं निपटता, तब तक 'कचरे के नए पहाड़ न बनें' का वादा केवल नीयत है, नतीजा नहीं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली की तीन लैंडफिल साइटों से कितना कचरा हटाया गया है?
दिल्ली सरकार के अनुसार ओखला, भलस्वा और गाजीपुर की तीनों लैंडफिल साइटों से मिलाकर अब तक लगभग 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में कुल 100 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त हुई है।
ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में अलग-अलग कितनी जमीन वापस मिली?
ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन कचरा हटाकर 35 एकड़, भलस्वा में 102 लाख मीट्रिक टन हटाकर 45 एकड़, और गाजीपुर में 44 लाख मीट्रिक टन हटाकर 20 एकड़ जमीन वापस हासिल की गई है।
दिल्ली में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट कब तक चालू होंगे?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली में चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है, हालांकि इनके चालू होने की सटीक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। इन प्लांटों के शुरू होने के बाद रोज़ाना उत्पन्न कचरे को उसी दिन प्रोसेस करने की क्षमता विकसित हो जाएगी।
गाजीपुर लैंडफिल के इनर्ट मटीरियल का क्या उपयोग किया जा रहा है?
गाजीपुर में कचरे के निपटान के बाद प्राप्त इनर्ट मटीरियल (बेकार सामग्री) का उपयोग निचले इलाकों को भरने और सड़कों के नीचे का आधार (सब-बेस) तैयार करने में किया जा रहा है। इससे कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ-साथ उससे प्राप्त सामग्री का भी उपयोग सुनिश्चित हो रहा है।
लैंडफिल साइटों की सफाई से दिल्ली के निवासियों को क्या फायदा हुआ है?
CM रेखा गुप्ता के अनुसार इन साइटों के आसपास रहने वाले लोगों को अब साफ-सुथरा और बेहतर वातावरण मिल रहा है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। स्वच्छ माहौल स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में सहायक है और इन क्षेत्रों से रोज़ाना गुज़रने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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