26 मई 2014: नरेंद्र मोदी ने ली थी 15वें PM की शपथ, भारतीय राजनीति में बदला था इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिले ऐतिहासिक बहुमत के बाद यह समारोह न केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक था, बल्कि भारतीय शासन व्यवस्था में एक नई दिशा की शुरुआत के रूप में भी देखा गया।
ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह
राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित इस समारोह में राजनीतिक नेताओं, उद्योगपतियों, सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों और विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। तत्कालीन राष्ट्रपति ने मोदी को पद की शपथ दिलाई और उन्होंने हिंदी में संविधान के प्रति निष्ठा एवं देश की सेवा का संकल्प व्यक्त किया। गौरतलब है कि 1984 के बाद यह पहला अवसर था जब किसी एक दल को लोकसभा में स्पष्ट पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ, जिससे राजनीतिक स्थिरता की नई उम्मीद जगी।
चुनाव अभियान और जनादेश
लोकसभा चुनाव 2014 में BJP ने विकास, सुशासन और मजबूत नेतृत्व को केंद्रीय मुद्दा बनाया। मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अर्जित विकास-केंद्रित छवि को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। जनता ने इन वादों पर भरोसा जताते हुए पार्टी को भारी समर्थन दिया। यह जनादेश गठबंधन की राजनीति से अलग, एकदलीय स्थायित्व की ओर स्पष्ट झुकाव था।
पहले कार्यकाल की प्रमुख नीतियाँ
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए। वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू कर देश की कर व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव किया गया। 'मेक इन इंडिया' अभियान के ज़रिए विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने का प्रयास हुआ। 'स्वच्छ भारत मिशन' ने स्वच्छता को जन आंदोलन का रूप दिया। इसके अलावा डिजिटल इंडिया, जन धन योजना और उज्ज्वला योजना जैसी पहलों ने आम नागरिकों के जीवन पर व्यापक प्रभाव डाला।
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर भी मोदी सरकार ने सक्रिय भूमिका निभाई। भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति को मज़बूत किया और कई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी। बुनियादी ढाँचे, रेलवे, सड़क और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सरकार ने तेज़ गति से काम करने पर ज़ोर दिया।
मोदी की राजनीतिक यात्रा का संदर्भ
एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक पहुँचने की मोदी की यात्रा को व्यापक रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग जगह बनाई। 26 मई 2014 का दिन भारतीय राजनीति में उस बदलाव का प्रतीक बना, जिसका प्रभाव आज भी देश की नीतियों और राजनीतिक विमर्श में दिखाई देता है।