26 जुलाई 2026
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पीएम मोदी ने भारत मंडपम में एनडीए नेताओं को किया संबोधित, बोले — 'जनता-जनार्दन ही मेरे ईश्वर'

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पीएम मोदी ने भारत मंडपम में एनडीए नेताओं को किया संबोधित, बोले — 'जनता-जनार्दन ही मेरे ईश्वर'

सारांश

भारत मंडपम में एनडीए नेताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जनता-जनार्दन ही उनके ईश्वर हैं और सेवा ही उनकी साधना। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबी अवधि तक सेवा के अवसर को उन्होंने 'परम सौभाग्य' बताया और इस उपलब्धि को एनडीए के सभी सदस्यों को समर्पित किया।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में एनडीए नेताओं को संबोधित किया।
मोदी ने कहा कि जनता-जनार्दन ही उनके ईश्वर हैं और सेवा कार्य उनकी साधना का रूप है।
निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबी अवधि तक सेवा के अवसर को उन्होंने 'परम सौभाग्य' बताया।
एनडीए द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मोदी ने सामूहिक प्रयासों का प्रमाण बताकर सभी सदस्यों को समर्पित किया।
उन्होंने 2014 से एनडीए शासन की तुलना कांग्रेस के कार्यकाल से करते हुए हजारों करोड़ के घोटालों का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 10 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनता-जनार्दन ही उनके लिए ईश्वर का स्वरूप है और सेवा कार्य को उन्होंने सदैव एक साधना के रूप में देखा है।

मुख्य संबोधन की बातें

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'चरैवेति-चरैवेति' के मंत्र का जाप करते हुए इस राजनीतिक यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन यह पड़ाव आएगा — यह उन्होंने कभी नहीं सोचा था। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर सबसे लंबी अवधि तक सेवा करने का अवसर मिलना, इसे उन्होंने अपना 'परम सौभाग्य' बताया।

उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक मां भारती की सेवा का अवसर मिलना 'ईश्वर की विशेष कृपा' से ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए जनता-जनार्दन ही ईश्वर का रूप है, इसीलिए सेवा कार्य को उन्होंने एक साधना माना है।

सामूहिक यज्ञ का भाव

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह साधना एकाकी नहीं रही — यह एक सामूहिक यज्ञ है, जिसमें एनडीए के सभी साथियों ने अपना योगदान दिया है। एनडीए परिवार के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को उन्होंने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों का प्रमाण बताया और इसे एनडीए के प्रत्येक सदस्य को समर्पित किया।

2014 से अब तक की यात्रा

मोदी ने कहा कि 2014 में एनडीए की जीत के बाद उन्होंने कहा था कि देश के सामान्य नागरिक में एक नई आशा का उदय हुआ है। उस आशा और उम्मीद की रक्षा करना एनडीए का सबसे बड़ा दायित्व था। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि एनडीए परिवार ने देश के विश्वास को निरंतर मजबूत किया है।

गौरतलब है कि यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब एनडीए अपने गठबंधन की राजनीतिक एकजुटता को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है।

कांग्रेस पर निशाना

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौर में देश को हजारों करोड़ रुपए के घोटालों में घसीटा गया और विकास की गति थम गई। उनके अनुसार, देश का भाग्य तब बदला जब 2014 में एनडीए की सरकार बनी। उन्होंने कहा कि जब नीयत, नीति और निर्णय — तीनों एक साथ काम करते हैं, तो विकास की गति का अंदाज़ा देश ने स्वयं लगाया है।

आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी के इस संबोधन को एनडीए की आंतरिक एकता और राजनीतिक दिशा को रेखांकित करने वाले एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह बैठक गठबंधन के भविष्य के कार्यक्रम और साझा लक्ष्यों को लेकर नई ऊर्जा का संचार करने वाली मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो मोदी की ब्रांडिंग की केंद्रीय धुरी रही है। हालाँकि, कांग्रेस पर घोटालों के आरोप नए नहीं हैं — यह 2014 से चला आ रहा चुनावी आख्यान है, जिसे हर बड़े मंच पर दोहराया जाता है। असली सवाल यह है कि क्या गठबंधन की यह एकजुटता नीतिगत समन्वय में भी उतनी ही दृढ़ है जितनी मंच पर दिखती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने भारत मंडपम में एनडीए नेताओं को क्यों संबोधित किया?
10 जून 2026 को भारत मंडपम में आयोजित एनडीए बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबी अवधि तक सेवा के उपलक्ष्य में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एनडीए परिवार ने एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया।
मोदी ने 'जनता-जनार्दन ही ईश्वर' से क्या आशय व्यक्त किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके लिए जनता-जनार्दन ही ईश्वर का स्वरूप है, इसीलिए उन्होंने सेवा कार्य को एक आध्यात्मिक साधना के रूप में देखा है। उनके अनुसार यह साधना एकाकी नहीं, बल्कि एनडीए के सभी साथियों के सामूहिक योगदान से एक यज्ञ का रूप ले चुकी है।
मोदी ने एनडीए के प्रस्ताव को किसे समर्पित किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए परिवार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि मानने से इनकार करते हुए इसे एनडीए के प्रत्येक सदस्य को समर्पित किया। उन्होंने इसे सामूहिक प्रयासों और उदारता का प्रमाण बताया।
मोदी ने 2014 के बाद के शासन को लेकर क्या कहा?
मोदी ने कहा कि 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद देश ने देखा कि जब नीयत, नीति और निर्णय तीनों एक साथ काम करते हैं तो विकास की गति कैसी होती है। उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल में हजारों करोड़ रुपए के घोटालों का भी उल्लेख किया।
'चरैवेति-चरैवेति' का संदर्भ मोदी ने क्यों दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्राचीन संस्कृत मंत्र — जिसका अर्थ है 'चलते रहो, चलते रहो' — का उल्लेख अपनी राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में किया। इसके ज़रिए उन्होंने यह बताया कि उतार-चढ़ाव के बावजूद निरंतर आगे बढ़ते रहने की भावना ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।
राष्ट्र प्रेस
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