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ईडी की बड़ी कार्रवाई: पंजाब बासमती राइस लिमिटेड पर ₹350.84 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में छापे, नकदी-दस्तावेज़ ज़ब्त

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: पंजाब बासमती राइस लिमिटेड पर ₹350.84 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में छापे, नकदी-दस्तावेज़ ज़ब्त

सारांश

ईडी ने जालंधर में पंजाब बासमती राइस लिमिटेड के 6 ठिकानों पर छापे मारे — ₹350.84 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप, शेल कंपनियों के ज़रिए फर्ज़ी बिक्री और नकद निकासी की कथित साज़िश। ₹8.50 लाख नकद, डॉलर और अहम दस्तावेज़ ज़ब्त; पीएमएलए के तहत जांच जारी।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5 जून 2026 को जालंधर में पंजाब बासमती राइस लिमिटेड के 6 परिसरों पर छापेमारी की।
कंपनी और उसके प्रमोटरों पर केनरा बैंक के नेतृत्व वाले 6 बैंकों के कंसोर्टियम के साथ ₹350.84 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत की जा रही है।
तलाशी में ₹8.50 लाख भारतीय मुद्रा और 8,600 अमेरिकी डॉलर नकद बरामद; महत्वपूर्ण दस्तावेज़ व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त।
कथित तौर पर शेल कंपनियों के ज़रिए फर्ज़ी बिक्री दिखाकर बैंक ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5 जून 2026 को पंजाब बासमती राइस लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ ₹350.84 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई की। जालंधर स्थित ईडी के ज़ोनल कार्यालय ने कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े छह व्यावसायिक एवं आवासीय परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। उक्त एफआईआर में कंपनी, उसके निदेशकों और अन्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि कंपनी ने केनरा बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के कंसोर्टियम के साथ ₹350.84 करोड़ की धोखाधड़ी की, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के इन बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच में सामने आया है कि कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों ने बैंकों से प्राप्त ऋण राशि का दुरुपयोग करते हुए उसे अन्य खातों में स्थानांतरित कर निजी लाभ उठाया। कथित तौर पर कंपनी ने फर्ज़ी संस्थाओं को माल बेचने का दावा कर उन्हें अपने देनदारों के रूप में दर्शाया। इसके अतिरिक्त, शेल कंपनियों के माध्यम से काल्पनिक बिक्री दिखाई गई और उससे प्राप्त राशि को नकद में निकाल लिया गया।

गौरतलब है कि यह वही तरीका है जो बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में बार-बार सामने आता है — फर्ज़ी देनदार, शेल कंपनियाँ और नकद निकासी की श्रृंखला। ईडी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के ज़रिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के धन का व्यवस्थित रूप से दुरुपयोग किया गया।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी के दौरान ईडी ने ₹8.50 लाख भारतीय मुद्रा और 8,600 अमेरिकी डॉलर नकद बरामद किए। इसके अलावा एजेंसी को अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले, जिन्हें आगे की जांच के लिए ज़ब्त कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन ज़ब्त रिकॉर्ड की जांच से मामले में और अहम जानकारी सामने आने की संभावना है।

कानूनी स्थिति और आगे की कार्रवाई

ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जारी है। एजेंसी का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में तेज़ी से कार्रवाई कर रही हैं। ज़ब्त दस्तावेज़ों के विश्लेषण के बाद गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फर्ज़ी देनदार और बैंक ऋण की नकद निकासी — जो पिछले एक दशक में दर्जनों बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में देखा गया है। असली सवाल यह है कि केनरा बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम की आंतरिक ऑडिट प्रणाली इतने बड़े पैमाने पर हो रहे दुरुपयोग को समय रहते क्यों नहीं पकड़ पाई। सीबीआई एफआईआर के बाद ईडी की यह कार्रवाई दोहरी एजेंसी जांच का संकेत देती है, लेकिन अंतिम परिणाम — संपत्ति कुर्की और सज़ा — इस बात पर निर्भर करेगा कि ज़ब्त दस्तावेज़ अदालत में कितने ठोस साबित होते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब बासमती राइस लिमिटेड पर क्या आरोप है?
कंपनी और उसके प्रमोटरों पर केनरा बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के कंसोर्टियम के साथ ₹350.84 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। कथित तौर पर शेल कंपनियों के ज़रिए फर्ज़ी बिक्री दिखाकर बैंक ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया।
ईडी ने यह कार्रवाई किस आधार पर की?
ईडी ने सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच शुरू की। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएँ लगाई गई हैं।
छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
तलाशी के दौरान ईडी ने ₹8.50 लाख भारतीय मुद्रा और 8,600 अमेरिकी डॉलर नकद बरामद किए। इसके अलावा महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी ज़ब्त किए गए हैं।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
ईडी के अनुसार ज़ब्त दस्तावेज़ों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की सहित आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कंपनी ने बैंकों को कैसे ठगा?
कथित तौर पर कंपनी ने फर्ज़ी संस्थाओं को माल बेचने का दावा कर उन्हें अपने देनदारों के रूप में दर्शाया और शेल कंपनियों के ज़रिए काल्पनिक बिक्री दिखाई। इस राशि को बाद में नकद के रूप में निकाल लिया गया और निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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