15 अगस्त 2026
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80वें स्वतंत्रता दिवस पर मोदी की लाल बांधनी पगड़ी, 'वंदे मातरम' से शुरू कर नारी शक्ति पर किया 75 मिनट का भाषण समाप्त

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर मोदी की लाल बांधनी पगड़ी, 'वंदे मातरम' से शुरू कर नारी शक्ति पर किया 75 मिनट का भाषण समाप्त

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी का लाल किला संबोधन महज परंपरा नहीं था — लाल बांधनी पगड़ी से सांस्कृतिक संदेश, 'वंदे मातरम' से शुरुआत और नारी शक्ति पर समापन। 75 मिनट के भाषण में महिला आरक्षण पर सर्वदलीय अपील सबसे तीखा राजनीतिक क्षण रहा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया।
उन्होंने राजस्थान-गुजरात की पारंपरिक लाल बांधनी पगड़ी पहनी; जेब में तिरंगे के रंगों का रूमाल।
भाषण 'वंदे मातरम' से शुरू हुआ और करीब 75 मिनट तक चला।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए सभी दलों से 33% महिला आरक्षण शीघ्र लागू करने की अपील की।
मोदी ने कहा कि यह सपना 40 वर्षों से राजनीतिक अखाड़े का शिकार रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया। उनका यह संबोधन 'वंदे मातरम' के उद्घोष से आरंभ हुआ और नारी शक्ति तथा महिला आरक्षण की अपील के साथ समाप्त हुआ। करीब 75 मिनट तक चले इस भाषण में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्र के सामने रखा।

पारंपरिक वेशभूषा: बांधनी पगड़ी का संदेश

इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान और गुजरात की पहचान मानी जाने वाली लाल रंग की बांधनी पगड़ी पहनी। उनकी वेशभूषा में सफेद कुर्ता और चॉकलेट ब्राउन जैकेट के साथ जेब में केसरिया, सफेद और हरे रंग के रूमाल थे — जो स्पष्ट रूप से तिरंगे के तीन रंगों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

बांधनी राजस्थान की प्रसिद्ध टाई-एंड-डाई लोककला है, जिसमें कपड़े के छोटे-छोटे हिस्सों को धागे से बाँधकर विभिन्न रंगों में रंगा जाता है। धागे खोलने पर कपड़े पर बारीक बिंदु और जटिल डिज़ाइन उभरते हैं। पारंपरिक बांधनी में लाल, पीला, हरा, नीला और केसरिया रंग प्रमुख होते हैं।

राजस्थानी संस्कृति में पुरुषों के लिए साफा (पगड़ी) गर्व, सम्मान और पहचान का प्रतीक है। इसके रंग और बाँधने का तरीका हर क्षेत्र और अवसर के अनुसार अलग होता है। शादी या धार्मिक आयोजनों में अतिथि को साफा भेंट करना आदर और आतिथ्य की परंपरागत अभिव्यक्ति मानी जाती है।

भाषण का आरंभ: 'वंदे मातरम' और राष्ट्रीय उत्साह

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, 'आज हम सब 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आज हर दिल की धड़कन वंदे मातरम के नाद से गूँज रही है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है। देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है।' लाल किले पर उनकी उपस्थिति — गार्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण से लेकर राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक — दृढ़ता और उत्साह से भरी रही।

नारी शक्ति पर समापन: महिला आरक्षण की अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 75 मिनट के भाषण का समापन नारी शक्ति को समर्पित किया। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने में सहयोग दें।

उन्होंने कहा, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पास हो चुका है। यह सपना पिछले 40 सालों से राजनीतिक अखाड़े का शिकार होता रहा है। समय की माँग है कि माताओं और बहनों को लोकसभा एवं विधानसभाओं में पूरा प्रतिनिधित्व मिले।'

विपक्षी और अन्य दलों को संबोधित करते हुए उन्होंने जोड़ा, 'दल इसका पूरा श्रेय ले सकते हैं, लेकिन महिलाओं के सम्मान में इसे लागू करने में साथ दें।' यह अपील उल्लेखनीय है क्योंकि महिला आरक्षण विधेयक दशकों से संसदीय सहमति की प्रतीक्षा में है।

भाषण की भाव-भंगिमा और प्रभाव

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री के हाथ के भाव स्पष्ट और संप्रेषणीय रहे। जब उन्होंने युवाओं और नारी शक्ति का उल्लेख किया, तब उनके चेहरे पर विशेष ऊर्जा और सकारात्मकता स्पष्ट दिखाई दी। गौरतलब है कि यह उनका लगातार 13वाँ स्वतंत्रता दिवस संबोधन है — जो भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय निरंतरता है।

आगे की राह

प्रधानमंत्री की महिला आरक्षण लागू करने की सर्वदलीय अपील के बाद अब सभी की निगाहें विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए परिसीमन और जनगणना की शर्तें अभी भी लंबित हैं, जो इस प्रक्रिया की वास्तविक समयसीमा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उनके हर स्वतंत्रता दिवस की पोशाक में दिखती है। परंतु असली सवाल नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर है: विधेयक पास हुए अरसा बीत चुका है, पर परिसीमन और जनगणना की शर्तें इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल सकती हैं। सर्वदलीय अपील भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन क्रियान्वयन की बाधाएँ तकनीकी हैं, राजनीतिक नहीं — और इस अंतर को मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कौन-सी पगड़ी पहनी थी?
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक लाल बांधनी पगड़ी पहनी थी। बांधनी एक प्रसिद्ध टाई-एंड-डाई लोककला है जिसमें धागे से बाँधकर कपड़े पर बारीक बिंदु और डिज़ाइन बनाए जाते हैं।
मोदी का 80वें स्वतंत्रता दिवस का भाषण कितने मिनट चला?
प्रधानमंत्री मोदी का 15 अगस्त 2026 का भाषण करीब 75 मिनट तक चला। यह उनका लगातार 13वाँ स्वतंत्रता दिवस संबोधन था।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है और मोदी ने क्या अपील की?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पारित वह कानून है जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है। मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसे शीघ्र लागू करने में सहयोग दें।
मोदी ने भाषण की शुरुआत और अंत किस तरह किया?
प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत 'वंदे मातरम' के उद्घोष से की और अंत नारी शक्ति तथा महिला आरक्षण की सर्वदलीय अपील के साथ किया। उन्होंने कहा कि यह सपना 40 वर्षों से राजनीतिक अखाड़े का शिकार रहा है।
बांधनी पगड़ी का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
राजस्थानी संस्कृति में साफा (पगड़ी) गर्व, सम्मान और पहचान का प्रतीक है। बांधनी की पगड़ी शुभ अवसरों से जुड़ी है और अतिथि को साफा भेंट करना आदर व आतिथ्य की परंपरागत अभिव्यक्ति मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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