8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.61 से 4.00 तक की माँग, न्यूनतम वेतन ₹65,000–₹72,000 तक पहुँच सकता है
सारांश
मुख्य बातें
8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें तेज़ी से बढ़ रही हैं — विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने 3.61, 3.833 और 4.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की माँग रखी है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर ₹65,000 से ₹72,000 के बीच पहुँच सकता है। 3 सितंबर 2026 को आयोग के गठन के 10 महीने पूरे होने जा रहे हैं और देशभर में हितधारकों के साथ परामर्श का दौर जारी है।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है और यह क्यों अहम है
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर किसी कर्मचारी के वर्तमान मूल वेतन को संशोधित कर नया वेतन निर्धारित किया जाता है। 6वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 1.86 था, जिसे 7वें वेतन आयोग में बढ़ाकर 2.57 किया गया — इसी बदलाव के चलते न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। इस बार संगठनों की माँगें इससे कहीं अधिक हैं।
किसने क्या माँग रखी
सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA) ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। यदि इसे स्वीकार किया जाए तो न्यूनतम मूल वेतन लगभग ₹64,980 — यानी करीब ₹65,000 — हो सकता है।
नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की माँग की है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन करीब ₹69,000 तक पहुँच सकता है। सबसे ऊँची माँग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने रखी है, जिसने 4.00 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है — इस स्थिति में न्यूनतम मूल वेतन ₹72,000 तक जा सकता है।
गौरतलब है कि 3.61 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर वाले प्रस्तावों के बीच ही प्रति माह करीब ₹7,020 का अंतर बनता है — जो दर्शाता है कि यह आँकड़ा केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कितना निर्णायक है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार ये आँकड़े — ₹65,000, ₹69,000 और ₹72,000 — केवल संगठनों के प्रस्तावों पर आधारित अनुमान हैं और इन्हें अंतिम न्यूनतम वेतन नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक वेतन वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर नहीं, बल्कि नए वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ते, अन्य भत्तों और आयोग की अंतिम सिफारिशों पर भी निर्भर करेगी।
पेंशनभोगियों पर असर
पेंशनभोगियों के लिए भी फिटमेंट फैक्टर अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि पेंशन और अनेक सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से सीधे जुड़े होते हैं। यदि उच्च फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है, तो इसका लाभ लाखों पेंशनभोगियों को भी मिल सकता है। हालाँकि अंतिम प्रभाव का सटीक आकलन तभी होगा जब आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
आगे क्या होगा
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं और आयोग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों की माँगें आयोग तक पहुँच रही हैं और परामर्श प्रक्रिया जारी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फिटमेंट फैक्टर क्या तय होगा और केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी।