8वां वेतन आयोग 7 और 10 अगस्त को दिल्ली में करेगा पक्षकारों से बैठक, 31 जुलाई तक करें आवेदन
सारांश
मुख्य बातें
8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 7 अगस्त और 10 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी संघों, महासंघों तथा यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित करने की घोषणा की है। वेतन संशोधन, पेंशन और सेवा शर्तों पर जारी विचार-विमर्श के तहत पात्र संगठन 31 जुलाई 2026 तक बैठक के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कौन कर सकता है आवेदन
आयोग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, केवल वे संगठन आवेदन करने के पात्र होंगे जिन्होंने पहले से अपना ज्ञापन जमा कर लिया है और जिन्होंने अब तक नई दिल्ली या किसी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में आयोग के साथ बैठक नहीं की है। आवेदन के साथ ज्ञापन जमा करने पर प्राप्त यूनिक मेमो आईडी अनिवार्य रूप से देनी होगी। बैठक का स्थान और समय बाद में अलग से सूचित किया जाएगा।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों द्वारा वेतन संशोधन, पेंशन, भत्ते, फिटमेंट फैक्टर, पदोन्नति, करियर प्रगति योजना और सेवा शर्तों से जुड़े अहम मुद्दे उठाए जाने की संभावना है। ये बैठकें आयोग की चल रही राष्ट्रव्यापी परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसके तहत आयोग ने हाल ही में 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में भी हितधारकों से विचार-विमर्श किया था।
डेटा अपलोड की समयसीमा बढ़ी
आयोग ने मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अपने आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों का डेटा अपलोड करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल के ज़रिए जमा किया गया डेटा ही मान्य होगा — ईमेल या हार्ड कॉपी के माध्यम से भेजी गई जानकारी पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
दिल्ली के बाद चेन्नई और पुडुचेरी की बारी
दिल्ली दौर के बाद आयोग की परामर्श प्रक्रिया देशभर में जारी रहेगी। अगला चरण 7 और 8 सितंबर को चेन्नई तथा 9 सितंबर को पुडुचेरी में आयोजित किया जाएगा। इन स्थानों पर बैठक के इच्छुक केंद्र सरकार के संगठन, संस्थान, संघ और यूनियनें 18 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। दिल्ली-एनसीआर से बाहर के संगठन अपने राज्य या निकटतम स्थान पर बैठक के लिए भी अनुरोध कर सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि आयोग की परामर्श प्रक्रिया जितनी व्यापक होगी, उसकी सिफारिशें उतनी ही अधिक समावेशी मानी जाएंगी। आने वाले महीनों में देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी।