30 अगस्त 2026
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मोहन भागवत न्यूयॉर्क में बोले: 'कितना कमाते हैं नहीं, कितना बाँटते हैं — यही जीवन का असली पैमाना'

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मोहन भागवत न्यूयॉर्क में बोले: 'कितना कमाते हैं नहीं, कितना बाँटते हैं — यही जीवन का असली पैमाना'

सारांश

न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत का संदेश सीधा था — 'सेल्फ-मेड' कोई नहीं होता। किसान, मजदूर, माता-पिता — हर जीवन दूसरों पर टिका है। इसीलिए समाज को लौटाना जिम्मेदारी नहीं, अनिवार्यता है। भौतिक सुख क्षणिक है; असली संतोष देने में है।

मुख्य बातें

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क में यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि जीवन का असली पैमाना कमाई नहीं, बल्कि समाज को दिया गया योगदान है।
भागवत ने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह 'सेल्फ-मेड' नहीं — जीवन माता-पिता, किसानों और मजदूरों के श्रम पर निर्भर है।
भारतीय परंपरा धन और भौतिक सफलता को वैध मानती है, लेकिन उसे एकमात्र लक्ष्य नहीं।
डोनट्स के उदाहरण से समझाया कि भौतिक सुख क्षणिक और अतृप्त करने वाला होता है।
सही दिशा में सोचना ही मनुष्य को पशु जगत से अलग करता है — भागवत।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन की सार्थकता धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज को दिए गए योगदान से मापी जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से भौतिक सफलता की संकीर्ण परिभाषा से बाहर निकलकर सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना अपनाने का आह्वान किया।

समाज को वापस देने की जिम्मेदारी

भागवत ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि प्रत्येक व्यक्ति का अस्तित्व अनगिनत अन्य लोगों के श्रम और योगदान पर टिका है। उन्होंने कहा, 'हम कितना कमाते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है। हम कितना बाँटते हैं — यह महत्वपूर्ण है।' संघ प्रमुख ने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति पूर्णतः 'सेल्फ-मेड' नहीं होता, क्योंकि उसका जीवन माता-पिता, किसानों, मजदूरों और समाज के अनेक वर्गों के सहारे आगे बढ़ता है।

उन्होंने श्रोताओं से पूछा, 'यह शरीर हमें किसने दिया? हमारे माता-पिता ने। दुनिया में कहीं खेती हो रही है, इसीलिए आप खा पा रहे हैं। अगर किसान खेती करना बंद कर दें, तो आप क्या खाएंगे? आप कपड़े पहन रहे हैं क्योंकि मिलें हैं, मजदूर काम कर रहे हैं। हम सब कुछ किसी और के कारण पाते हैं — और इसीलिए हमें वापस भी देना है।'

भारतीय परंपरा और भौतिक सफलता का संतुलन

भागवत ने स्पष्ट किया कि भारतीय दर्शन धन या भौतिक उपलब्धि को नकारता नहीं। उन्होंने कहा कि उपनिषद भी केवल मोक्ष की राह नहीं दिखाते — भौतिक सफलता भी मानव जीवन का वैध और आवश्यक हिस्सा है। हालाँकि, यह एकमात्र लक्ष्य नहीं हो सकती। उन्होंने करियर को सिर्फ धन-अर्जन का साधन मानने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया: 'क्या करियर सिर्फ पैसा है? क्या करियर सिर्फ भौतिक खुशी है?'

भौतिक सुख की सीमाएँ — डोनट्स का उदाहरण

भागवत ने भौतिक सुख की क्षणभंगुरता समझाने के लिए एक हल्के-फुल्के उदाहरण का सहारा लिया। उन्होंने हँसते हुए कहा, 'अगर मुझे न्यूयॉर्क के डोनट्स पसंद हैं, तो मैं खाऊंगा — लेकिन एक बार में कितने खा सकता हूं? मैं डायबिटिक हूं। कल सुबह मैं 50 और खाने के लिए तैयार हो जाऊंगा। तो भौतिक खुशी क्षणिक है, संतुष्ट नहीं कर सकती — और अधिकता में तो विफल भी हो सकती है।' इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि इंद्रिय-सुख की कोई स्थायी तृप्ति नहीं होती।

सोच की दिशा तय करती है मनुष्यता

संघ प्रमुख ने कहा कि मनुष्य की विशेषता यह है कि वह अपने निर्णयों के परिणामों पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, 'आप सोच सकते हैं, लेकिन आप किस तरह से सोचते हैं — वह महत्वपूर्ण है। अगर आप सही तरीके से सोचते हैं, तो आप ईश्वर के करीब जाते हैं। अगर गलत तरीके से सोचते हैं, तो पशु जगत के करीब जाते हैं।' उन्होंने आग्रह किया कि परस्पर देखभाल और सामूहिक जिम्मेदारी ही जीवन को सार्थक बनाती है।

आगे की दिशा

यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक जड़ों को लेकर व्यापक विमर्श चल रहा है। भागवत की यह अपील — कि व्यक्तिगत समृद्धि और सामाजिक योगदान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं — भारतीय दर्शन की उस परंपरा को रेखांकित करती है जो 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के आदर्श पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सामाजिक-राजनीतिक स्थापना भी है। गौरतलब है कि RSS का वैश्विक मंचों पर इस तरह का दार्शनिक विमर्श एक सुनियोजित 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा भी माना जाता है। भौतिकवाद की आलोचना और भारतीय दर्शन की प्रासंगिकता का यह संयोजन प्रवासी भारतीयों के बीच RSS की पहुँच बढ़ाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा दिखता है। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः भाषण के उद्धरणों तक सीमित रहती है — यह पूछना जरूरी है कि यह 'देने' का आह्वान संस्थागत स्तर पर किस ठोस कार्यक्रम में तब्दील होता है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क में यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन में कहा कि जीवन का असली पैमाना यह नहीं कि आप कितना कमाते हैं, बल्कि यह है कि समाज को कितना लौटाते हैं। उन्होंने भौतिक सुख को क्षणिक बताते हुए सामूहिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया।
भागवत ने 'सेल्फ-मेड' की अवधारणा पर क्या कहा?
भागवत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह 'सेल्फ-मेड' नहीं होता, क्योंकि उसका जीवन माता-पिता, किसानों, मजदूरों और समाज के अनेक वर्गों के योगदान पर टिका है। इसीलिए समाज को वापस देना एक नैतिक जिम्मेदारी है।
भागवत ने भारतीय परंपरा और धन के बारे में क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय परंपराएँ धन या भौतिक उपलब्धि को नकारती नहीं — उपनिषद भी भौतिक सफलता को मानव जीवन का वैध हिस्सा मानते हैं। लेकिन यह एकमात्र लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
भागवत ने डोनट्स का उदाहरण क्यों दिया?
भागवत ने डोनट्स का उदाहरण देकर यह समझाया कि भौतिक सुख कभी स्थायी संतुष्टि नहीं दे सकता — अधिकता में वह हानिकारक भी हो सकता है। यह उदाहरण उन्होंने इंद्रिय-सुख की सीमाओं को हल्के-फुल्के अंदाज में समझाने के लिए दिया।
यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन क्या है?
यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम है जिसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 30 अगस्त को संबोधन दिया। यह आयोजन सार्वभौमिक एकता और सामाजिक सद्भाव के विषयों पर केंद्रित था।
राष्ट्र प्रेस
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