21 अगस्त 2026
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AMU जमीन विवाद पर सपा विधायक अबू आजमी बोले — शिक्षा में उपयोग भूमि पर कब्जा अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती

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AMU जमीन विवाद पर सपा विधायक अबू आजमी बोले — शिक्षा में उपयोग भूमि पर कब्जा अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती

सारांश

सपा विधायक अबू आजमी ने AMU जमीन विवाद पर कहा कि शिक्षा में उपयोग भूमि पर कब्जा अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती है। 1992 की खतौनी में दर्ज यह जमीन 1913 या 1925 में AMU को मिली थी। मामला कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

मुख्य बातें

सपा विधायक अबू आजमी ने 21 अगस्त 2026 को AMU की जमीन पर कब्जे की कोशिश को अल्पसंख्यकों के साथ 'जुल्म और ज्यादती' करार दिया।
विवादित भूमि 1913 या 1925 में AMU को आवंटित हुई थी और 1992 की खतौनी में भी दर्ज है।
मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है; कोई अंतिम निर्णय नहीं आया।
आजमी ने 90 हजार स्कूल बंद होने और मदरसों पर कार्रवाई को शिक्षा-विरोधी नीति बताया।
मुंब्रा में सपा ने 2,000 लोगों को मराठी सिखाई; आजमी ने भाषा सीखने की अनिवार्यता का समर्थन किया, लेकिन सख्त समयसीमा और भय के माहौल पर आपत्ति जताई।

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने 21 अगस्त 2026 को मुंबई में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की जमीन से जुड़े विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो भूमि विशुद्ध रूप से शिक्षा के उद्देश्य से उपयोग में है, उसे सम्मानपूर्वक उसी संस्थान के पास रहने देना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित भूमि का उल्लेख 1992 की खतौनी में दर्ज है और यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, जिस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।

मुख्य घटनाक्रम

आजमी ने कहा कि AMU की यह भूमि 1913 अथवा 1925 में संस्थान को आवंटित की गई थी। उनके अनुसार, इस जमीन पर अब कब्जे की कोशिश की जा रही है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर आपके पास कोई जमीन है जो सिर्फ शिक्षा के काम में इस्तेमाल हो रही है, तो सरकार को उस जमीन को सम्मान के साथ उन्हीं के पास रहने देना चाहिए। उस पर कब्जा नहीं करना चाहिए। कब्जा किया जाएगा तो मैं समझूंगा कि एक और अल्पसंख्यक के साथ जुल्म और ज्यादती की जा रही है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस भूमि को लेकर कोर्ट में मुकदमा दाखिल करने की आवश्यकता ही नहीं थी, क्योंकि शैक्षणिक उपयोग वाली संपत्ति पर विवाद खड़ा करना संस्था की गरिमा के विरुद्ध है।

भाजपा और मदरसों पर आरोप

सपा विधायक ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा, 'इन चीजों पर भाजपा गंभीर नहीं है। वो चाहती है कि लोग पढ़े-लिखे न हों, लोग जाहिल रह जाएं।' आजमी ने मदरसों के बंद किए जाने की सरकारी नीति की भी आलोचना की और कहा कि मदरसों से पढ़े लोग IAS और IPS तक बने हैं तथा स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देशभर में 90 हजार स्कूल बंद हो चुके हैं।

गौरतलब है कि रंगनाथ मिश्रा कमेटी और महाराष्ट्र की रंगनाथ-रहमान कमेटी जैसे आयोगों ने पहले ही रेखांकित किया था कि मुस्लिम समुदाय शिक्षा के मामले में पिछड़ा हुआ है। आजमी ने तर्क दिया कि ऐसे में AMU जैसे संस्थान को बाधित करना समुदाय की शैक्षणिक प्रगति के विरुद्ध होगा।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर टिप्पणी

आजमी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के छात्र आंदोलन में शामिल होने का बचाव करते हुए कहा, 'राहुल गांधी और अखिलेश यादव राजनीतिक आदमी हैं। इनका काम ही यही है। वो आ रहे हैं, लोगों की जो-जो कमियां हैं, जो बच्चों की मांगें हैं, उनके ऊपर बात करेंगे। सरकार नहीं सुनेगी तो आंदोलन किया जाएगा।' उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को सतर्क रहना चाहिए और सरकार की कमियों को उजागर करना आवश्यक है।

सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल

सपा विधायक ने कहा कि हाल के बड़े छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने हर विश्वविद्यालय में एक-एक मंत्री भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए भी सवाल उठाया कि यह कदम वास्तविक सुधार की दिशा में है या महज दिखावा। उनके अनुसार, 11-12 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में ठोस काम नहीं हुआ और अब युवाओं के जागने के बाद सरकार हरकत में आई है।

मराठी भाषा विवाद पर रुख

मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता के मुद्दे पर आजमी ने कहा कि उनकी पार्टी ने मुंब्रा में 2,000 लोगों को मराठी सिखाई है और वे इसके विरोध में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने सख्त समयसीमा और भय के माहौल पर आपत्ति जताई। उनका कहना था, 'उनको डराइए नहीं। इस तरह से तो एक भय का माहौल पैदा हो रहा है।' उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय, ट्यूटर और किताबें उपलब्ध कराई जाएं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं की स्वायत्तता और भूमि अधिकारों को लेकर बहस तेज हो रही है। AMU जमीन विवाद पर न्यायालय का अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल सवाल वैध है — दशकों से शैक्षणिक उपयोग में रही भूमि पर विवाद खड़ा करना संस्थागत स्थिरता के लिए हानिकारक है। रंगनाथ मिश्रा और रंगनाथ-रहमान जैसी कमेटियों की सिफारिशें वर्षों से धूल खा रही हैं, और 90 हजार स्कूलों के बंद होने का आँकड़ा — यदि सत्यापित हो — शिक्षा नीति की गंभीर विफलता दर्शाता है। असली परीक्षा यह है कि न्यायालय का फैसला आने तक सरकार संस्था की कार्यप्रणाली को बाधित होने देती है या नहीं — यही इस विवाद की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AMU जमीन विवाद क्या है?
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की एक भूमि के स्वामित्व को लेकर विवाद है, जो कथित तौर पर 1913 या 1925 में संस्थान को आवंटित की गई थी और 1992 की खतौनी में भी दर्ज है। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
अबू आजमी ने AMU जमीन विवाद पर क्या कहा?
सपा विधायक अबू आजमी ने कहा कि शिक्षा के उद्देश्य से उपयोग हो रही भूमि को सम्मानपूर्वक उसी संस्थान के पास रहने देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर कब्जा किया गया तो यह अल्पसंख्यकों के साथ जुल्म और ज्यादती मानी जाएगी।
क्या AMU जमीन विवाद में कोर्ट का फैसला आ चुका है?
नहीं। आजमी के अनुसार यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में केस डालने की जरूरत ही नहीं थी।
अबू आजमी ने मदरसों के बारे में क्या कहा?
आजमी ने मदरसों को बंद करने की नीति का विरोध करते हुए कहा कि मदरसों से पढ़े लोग IAS और IPS बने हैं और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। उन्होंने देशभर में 90 हजार स्कूल बंद होने का हवाला देते हुए सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए।
मराठी भाषा अनिवार्यता पर अबू आजमी का क्या रुख है?
आजमी ने मराठी सीखने का विरोध नहीं किया — उनकी पार्टी ने मुंब्रा में 2,000 लोगों को मराठी सिखाई है। हालांकि, उन्होंने सख्त समयसीमा और डर के माहौल पर आपत्ति जताई और सरकार से ट्यूटर व किताबें उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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