अबू सलेम से मुलाकात: महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष प्यारे खान पर विहिप ने उठाए सवाल, NIA-CBI जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान द्वारा नासिक सेंट्रल जेल में कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम से मुलाकात करने के मामले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गंभीर आपत्ति जताते हुए 16 सितंबर 2026 को नागपुर जिला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। विहिप ने इस मुलाकात को संवैधानिक पद का दुरुपयोग बताते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से उच्चस्तरीय जांच कराने की माँग की है।
मामले का मूल विवाद
विहिप के अनुसार, प्यारे खान ने अपने शासकीय नासिक दौरे के दौरान नासिक जेल में जाकर 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी अबू सलेम से भेंट की और कथित तौर पर उन्हें 'मदद का आश्वासन' दिया। विहिप का कहना है कि यह जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से सामने आई।
अबू सलेम वर्ष 1993 के मुंबई श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों में दोषसिद्ध एक गैंगस्टर है, जिसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।
विहिप का आरोप और ज्ञापन
विहिप ने अपने पत्र में लिखा, 'एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की ओर से देश विरोधी गतिविधियों व बम धमाकों के गुनहगार से इस प्रकार मुलाकात करना अत्यंत अशोभनीय है। यह महाराष्ट्र शासन की छवि को धूमिल करने के साथ-साथ अपने पद व अधिकारों के खुले दुरुपयोग का प्रत्यक्ष प्रमाण है।'
विहिप की नागपुर महानगर इकाई ने केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार दोनों से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन ने स्पष्ट माँग की है कि मुलाकात के 'वास्तविक कारणों, राष्ट्रहित से जुड़े पहलुओं और संभावित संलिप्तता' की पड़ताल NIA और CBI के माध्यम से की जाए।
तत्काल बर्खास्तगी की माँग
ज्ञापन में विहिप ने माँग की कि प्यारे खान को 'तत्काल प्रभाव से' महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद से निष्कासित किया जाए। साथ ही, उनकी जगह 'अल्पसंख्यक समाज के किसी अन्य योग्य व्यक्ति' को यह दायित्व सौंपने की माँग भी की गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर विभिन्न पक्षों में बहस जारी है।
सरकार और आयोग की प्रतिक्रिया
अभी तक महाराष्ट्र सरकार या महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्यारे खान ने भी मीडिया में अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मुलाकात की अनुमति जेल प्रशासन ने दी थी, हालाँकि इसकी पुष्टि आधिकारिक स्तर पर नहीं हुई है।
आगे क्या होगा
विहिप के ज्ञापन के बाद अब यह देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस राजनीतिक दबाव पर क्या कदम उठाती है। यदि NIA या CBI जांच का आदेश दिया जाता है, तो यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में केंद्र में आ जाएगा। फिलहाल, इस मामले की राजनीतिक हलचल नागपुर से बढ़कर पूरे महाराष्ट्र में फैलने के संकेत हैं।