बांग्लादेशी घुसपैठियों पर अधीर रंजन चौधरी का BJP से सवाल: तीन कार्यकाल में कार्रवाई क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 29 मई 2026 को मुर्शिदाबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार से तीखा सवाल पूछा — कि तीन पूर्ण कार्यकालों के बावजूद पश्चिम बंगाल से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने में क्या बाधा रही? यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठियों के लिए 'होल्डिंग सेंटर' स्थापित किए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपे जाने से पहले अस्थायी रूप से रखने के लिए 'होल्डिंग सेंटर' बनाए हैं, जहाँ से उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जाएगा। मंगलवार रात से हकीमपुर सीमा पर घुसपैठियों की भारी आमद दर्ज की गई है।
चौधरी की आपत्तियाँ और माँगें
चौधरी ने स्वीकार किया कि देश में दशकों से अवैध घुसपैठ जारी है। उन्होंने कहा, 'असम में भी हमें नजरबंदी केंद्र देखने को मिल रहे हैं। हमारे पास इस बात का कोई आँकड़ा नहीं है कि कितने घुसपैठिए पकड़े गए या कितनों को बांग्लादेश वापस भेजा गया।'
उन्होंने सरकार से माँग की कि इस पूरे मामले में जो शोर-शराबा हो रहा है, उसे देखते हुए सरकार को यह आँकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए कि कितने घुसपैठिए पकड़े गए और कितनों को वापस भेजा गया।
BJP पर सीधा निशाना
चौधरी ने केंद्र सरकार को सीधे घेरते हुए कहा, 'इसके लिए कानून बनाए गए हैं, जैसे कि NRC और कई अन्य। आप लोग तीसरी बार देश चला रहे हैं, और देश के प्रधानमंत्री भी आपकी पार्टी से हैं। तो इतने दिनों तक बांग्लादेशियों को हटाने से आपको किसने रोका?' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र से जवाबदेही माँगी हो।
श्वेत पत्र की माँग
चौधरी ने इस बात पर बल दिया कि भारत में एक भी घुसपैठिया नहीं रहना चाहिए। उन्होंने BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से एक श्वेत पत्र जारी करने का आग्रह किया, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कुल कितने घुसपैठिए देश में हैं, उनमें से कितने हिंदू और कितने मुसलमान हैं, कितनों को कानूनी रूप से निर्वासित किया गया है, और बांग्लादेश सरकार ने कितनों को वापस लेने पर सहमति जताई है।
आगे क्या
हकीमपुर सीमा पर घुसपैठियों की बढ़ती आमद के बीच BSF और राज्य प्रशासन की कार्रवाई पर नज़र बनी हुई है। विपक्ष की माँग है कि सरकार पारदर्शी आँकड़े सार्वजनिक करे, अन्यथा यह अभियान महज राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह जाएगा।