30 अक्टूबर 2026
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गुजरात: अघोरी बाबा बनकर ₹19.60 लाख की ठगी, वलसाड पुलिस ने तीन और आरोपी दबोचे

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गुजरात: अघोरी बाबा बनकर ₹19.60 लाख की ठगी, वलसाड पुलिस ने तीन और आरोपी दबोचे

सारांश

गुजरात के वलसाड में अघोरी बाबा बनकर 76 वर्षीय बुजुर्ग से ₹19.60 लाख ठगने वाले गिरोह के तीन और सदस्यों को पुलिस ने महीसागर के वीरपुर से दबोचा। यह मामला डिजिटल युग में धार्मिक आस्था के दुरुपयोग की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है।

मुख्य बातें

वलसाड साइबर क्राइम पुलिस ने 30 अक्टूबर 2026 को तीन और वांछित आरोपियों — महबूब शेख (23) , सरफराज पठान (39) और साहिलमियां शेख (23) — को वीरपुर, महीसागर से गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने अघोरी बाबा और गुरु बनकर 76 वर्षीय बुजुर्ग से ₹19,60,500 से अधिक की ठगी की थी।
ठगी 29 अप्रैल को इंटरनेट के ज़रिये देवी आशीर्वाद और पैसे दोगुने करने का झाँसा देकर की गई थी।
मामले में BNS धारा 318(4) व 61(2) और IT अधिनियम धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज; अब तक कुल 8 आरोपी गिरफ्तार, 3 अभी भी फरार ।
साइबर ठगी की सूचना राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर दी जा सकती है।

वलसाड साइबर क्राइम पुलिस ने 30 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि गुजरात के वलसाड जिले में अघोरी बाबा और गुरु का वेश धारण कर 76 वर्षीय एक बुजुर्ग से ₹19,60,500 से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह के तीन और वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने इंटरनेट के ज़रिये बुजुर्ग से संपर्क कर देवी का आशीर्वाद दिलाने और पैसे दोगुने करने का झाँसा दिया था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तीनों आरोपियों की पहचान महबूब शेख (23 वर्ष), सरफराज पठान (39 वर्ष) और साहिलमियां शेख (23 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों को महीसागर जिले के वीरपुर से वलसाड साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने गहन जाँच के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, सरफराज पठान पेशे से ड्राइवर है और वीरपुर के टिंबा फली इलाके में रहता है, साहिलमियां शेख पान की दुकान चलाता है तथा देसाई सीएम हाई स्कूल के पास का निवासी है, जबकि महबूब शेख योगेश्वर पार्क सोसायटी के सामने रहता है और नौकरी करता है।

ठगी का तरीका और मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार यह ठगी 29 अप्रैल को की गई थी। अज्ञात आरोपियों ने इंटरनेट के माध्यम से शिकायतकर्ता के 76 वर्षीय पिता से संपर्क साधा और खुद को अघोरी बाबा व गुरु बताते हुए उन्हें देवी का आशीर्वाद दिलाने एवं रुका हुआ पैसा दोगुना करने का प्रलोभन दिया। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें अलग-अलग बैंक खातों का विवरण दिया और धनराशि जमा कराने पर राजी कर लिया, जिससे कुल ₹19,60,500 से अधिक की ठगी हुई। गौरतलब है कि यह मामला डिजिटल माध्यम से धार्मिक आस्था का दुरुपयोग करने वाले साइबर अपराध का विशिष्ट उदाहरण है।

जाँच की प्रक्रिया और सफलता

इस मामले में वलसाड साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस पहले ही पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जबकि छह अन्य को वांछित घोषित किया गया था। साइबर क्राइम टीम ने फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए उनके सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक लेनदेन तथा उनके रिश्तेदारों, दोस्तों व सहयोगियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जाँच की और स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी भी जुटाई।

26 अक्टूबर को पुलिस उपनिरीक्षक डी.एस. पटेल को सूचना मिली कि वांछित आरोपी महबूब शेख को बालासिनोर के देव चौक के पास देखा गया है। इस पर पुलिस टीम ने इलाके में निगरानी शुरू कर स्थानीय दुकानदारों, ऑटो रिक्शा चालकों और मुखबिरों की मदद से उसे गिरफ्तार किया। महबूब से पूछताछ के बाद ही शेष दोनों आरोपियों का सुराग मिला और उन्हें भी वीरपुर से पकड़ा गया।

पुलिस की जनता से अपील

पुलिस ने लोगों को चेताया है कि तांत्रिक अनुष्ठानों या धार्मिक क्रियाओं के ज़रिये पैसे दोगुने करने के दावे पूरी तरह धोखाधड़ी हो सकते हैं। अधिकारियों ने अनजान कॉलर को पैसे ट्रांसफर करने या निजी जानकारी साझा करने से बचने की सख्त हिदायत दी है। साइबर ठगी का शिकार होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने या नज़दीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। तीनों गिरफ्तार आरोपियों से अभी पूछताछ जारी है और मामले में अभी भी तीन आरोपी फरार बताए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें अपराधी बुज़ुर्गों की धार्मिक आस्था को निशाना बनाते हैं — एक ऐसा वर्ग जो डिजिटल साक्षरता में पीछे है और इसलिए सबसे असुरक्षित है। गिरोह का विस्तृत नेटवर्क — पहले पाँच, फिर तीन और गिरफ्तारियाँ, और अभी भी तीन फरार — यह बताता है कि ये संगठित अपराध है, न कि अकेले अपराधी की करतूत। असली सवाल यह है कि ₹19.60 लाख जैसी बड़ी रकम इंटरनेट के ज़रिये अलग-अलग खातों में बिना किसी बैंकिंग अलर्ट के कैसे ट्रांसफर हो गई — वित्तीय निगरानी तंत्र की यह चूक भी उतनी ही जाँच की माँग करती है जितनी कि अपराधियों की।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वलसाड अघोरी बाबा ठगी का मामला क्या है?
गुजरात के वलसाड जिले में कुछ अज्ञात आरोपियों ने इंटरनेट के ज़रिये एक 76 वर्षीय बुजुर्ग से संपर्क कर खुद को अघोरी बाबा और गुरु बताते हुए देवी का आशीर्वाद दिलाने और पैसे दोगुने करने का झाँसा दिया। इस प्रकार उनसे ₹19,60,500 से अधिक की ठगी की गई। यह घटना 29 अप्रैल को हुई थी।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस इस मामले में अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है — पहले पाँच और अब महबूब शेख, सरफराज पठान व साहिलमियां शेख सहित तीन और। अभी भी तीन आरोपी फरार बताए जाते हैं।
नए गिरफ्तार आरोपियों को कहाँ से पकड़ा गया?
तीनों आरोपियों को महीसागर जिले के वीरपुर से गिरफ्तार किया गया। 26 अक्टूबर को मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने पहले महबूब शेख को बालासिनोर के देव चौक के पास से ट्रेस किया, जिसकी पूछताछ से अन्य दोनों का पता चला।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएँ धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ठगी से संबंधित हैं।
साइबर ठगी का शिकार होने पर कहाँ संपर्क करें?
साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करें या नज़दीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएँ। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि अनजान कॉलर को कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें और अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
राष्ट्र प्रेस
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