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21 जुलाई गोलीकांड: ममता बनर्जी के पास कार्यक्रम का नैतिक अधिकार नहीं — अग्निमित्रा पॉल

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21 जुलाई गोलीकांड: ममता बनर्जी के पास कार्यक्रम का नैतिक अधिकार नहीं — अग्निमित्रा पॉल

सारांश

21 जुलाई गोलीकांड की फाइलें दोबारा खुलने की घोषणा के बाद मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला — मृतकों को ₹25 लाख की जगह ₹2 लाख और जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप। बंगाल की राजनीति में यह मामला एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

मुख्य बातें

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास 21 जुलाई कार्यक्रम आयोजित करने का नैतिक अधिकार नहीं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 21 जुलाई गोलीकांड की फाइलें दोबारा खोलने की घोषणा की है।
आरोप: मृतकों के परिजनों को अनुशंसित ₹25 लाख की जगह मात्र ₹2 लाख मुआवज़ा दिया गया।
जांच आयोग की रिपोर्ट — जो जनता के धन से तैयार हुई — कभी सार्वजनिक नहीं की गई, ऐसा आरोप।
सवालों के घेरे में आए अधिकारियों को कार्रवाई के बजाय महत्वपूर्ण पद दिए गए — पॉल का दावा।
TMC के भीतर गुटबाज़ी और पार्टी झंडा विवाद भी जांच के दायरे में बताया गया।

पश्चिम बंगाल की शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 21 जुलाई 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के पास 21 जुलाई के नाम पर कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने का नैतिक अधिकार शेष नहीं है। यह बयान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा 21 जुलाई गोलीकांड की फाइलें दोबारा खोलने की घोषणा के तुरंत बाद आया है।

मुख्य आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया

अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि 21 जुलाई के कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने इस घटना पर एक शब्द भी नहीं बोला, क्योंकि वे स्वयं जानती हैं कि नैतिक रूप से उनका पक्ष कमज़ोर है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर TMC हर वर्ष इस तिथि को राजनीतिक उत्सव की तरह मनाती है। पॉल के अनुसार, यह उन परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है जिन्होंने इस गोलीकांड में अपने प्रियजनों को खोया।

मुआवज़े में कथित अनियमितता

अग्निमित्रा पॉल ने दावा किया कि विधानसभा में सुवेंदु अधिकारी ने 21 जुलाई गोलीकांड से जुड़ी रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसमें खुलासा हुआ कि मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख और घायलों को ₹5 लाख मुआवज़ा देने की सिफारिश की गई थी। उनके अनुसार, तत्कालीन राज्य सरकार ने इन सिफारिशों की अनदेखी की और मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख के स्थान पर मात्र ₹2 लाख दिए गए। घायलों को भी निर्धारित राशि से कहीं कम मुआवज़ा मिला।

जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप

पॉल ने आरोप लगाया कि जनता के पैसे से तैयार की गई जांच आयोग की रिपोर्ट को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि यह रिपोर्ट सामने आती तो कई अधिकारियों और तत्कालीन प्रशासन की भूमिका उजागर हो जाती। इसके विपरीत, जिन अधिकारियों पर सवाल उठे, उन्हें कार्रवाई के बजाय बाद में महत्वपूर्ण पद और जिम्मेदारियाँ दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि TMC के भीतर अब कई गुट सक्रिय हैं और आपसी खींचतान बढ़ रही है, जो हाल की घटनाओं — जैसे पार्टी के झंडे हटाने के विवाद — में भी झलकती है।

न्याय की माँग और आगे की राह

अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि वर्षों तक 21 जुलाई के नाम पर बंगाल की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया। उन्होंने माँग की कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पूरे मामले पर जनता के सामने जवाब दें। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यह भी कहा है कि जिन पीड़ित परिवारों को अब तक निर्धारित मुआवज़ा नहीं मिला, उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यदि फाइलें दोबारा खुलती हैं, तो कई पुराने सवालों के जवाब जनता के सामने आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक वैध सार्वजनिक हित का सवाल भी छुपा है — क्या पीड़ित परिवारों को वाकई अनुशंसित मुआवज़ा नहीं मिला? यदि ₹25 लाख की जगह ₹2 लाख देने का दावा सत्यापित होता है, तो यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, प्रशासनिक विफलता का दस्तावेज़ बन जाएगा। जांच रिपोर्ट को दबाए रखने का आरोप भी गंभीर है — सार्वजनिक धन से तैयार रिपोर्ट को सार्वजनिक करना लोकतांत्रिक जवाबदेही की बुनियादी शर्त है। मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल BJP बनाम TMC की लड़ाई बता रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि तीन दशक बाद भी पीड़ित परिवार न्याय क्यों माँग रहे हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 जुलाई गोलीकांड क्या है और यह विवाद क्यों उठा है?
21 जुलाई गोलीकांड पश्चिम बंगाल की एक ऐतिहासिक घटना है जिसमें कई लोग मारे गए थे। अब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा इस मामले की फाइलें दोबारा खोलने की घोषणा के बाद राज्य में सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है।
अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए हैं?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी के पास 21 जुलाई कार्यक्रम आयोजित करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों के परिजनों को अनुशंसित ₹25 लाख की जगह मात्र ₹2 लाख मुआवज़ा दिया गया और जांच रिपोर्ट को दबाया गया।
पीड़ित परिवारों को कितना मुआवज़ा मिला और क्या सिफारिश थी?
अग्निमित्रा पॉल के अनुसार, जांच आयोग ने मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख और घायलों को ₹5 लाख मुआवज़ा देने की सिफारिश की थी। हालाँकि, उनके दावे के मुताबिक मृतकों के परिजनों को केवल ₹2 लाख ही दिए गए।
जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
अग्निमित्रा पॉल के अनुसार, जनता के धन से तैयार जांच आयोग की रिपोर्ट को तत्कालीन सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया। उनका आरोप है कि रिपोर्ट सामने आने पर कई अधिकारियों और प्रशासन की भूमिका उजागर हो जाती।
अब आगे क्या होगा — क्या नई जांच होगी?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 21 जुलाई से जुड़ी फाइलें दोबारा खोलने की घोषणा की है और कहा है कि जिन पीड़ित परिवारों को निर्धारित मुआवज़ा नहीं मिला, उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यदि जांच आगे बढ़ती है तो कई पुराने तथ्य सामने आ सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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