21 जुलाई आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे CM सुवेंदु अधिकारी, 1993 यूथ कांग्रेस गोलीकांड पर उठेंगे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को विधानसभा में घोषणा की कि वे जस्टिस सुशांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करेंगे। इस आयोग का गठन 21 जुलाई 1993 की पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत की जाँच के लिए तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने किया था। यह घोषणा बजट सत्र के विस्तारित हिस्से के पहले दिन की गई।
मुख्यमंत्री का सदन में बयान
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 2011 में सत्ता में आने के बाद '21 जुलाई आयोग' का गठन किया था। इसके प्रमुख जस्टिस सुशांत चटर्जी (सेवानिवृत्त) थे। मैं उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करूँगा। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि पिछली सरकार ने जस्टिस चटर्जी की सिफारिशों को किस हद तक लागू किया और किस हद तक नहीं। मैं सबूतों के आधार पर बंगाल की जनता के सामने रिपोर्ट पेश करूँगा।'
21 जुलाई 1993 का गोलीकांड: पृष्ठभूमि
21 जुलाई 1993 को ममता बनर्जी, जो उस समय कांग्रेस से जुड़ी थीं, ने तत्कालीन राज्य सचिवालय 'राइटर्स बिल्डिंग' तक एक विरोध मार्च का नेतृत्व किया था। उस समय पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के मुख्यमंत्री ज्योति बसु थे। आरोप है कि राइटर्स बिल्डिंग पहुँचने से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की, जिसमें यूथ कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता मारे गए।
गौरतलब है कि उस दिन पुलिस फायरिंग के समय भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी मनीष गुप्ता पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पद पर थे। बाद में गुप्ता 2011 के विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए, पार्टी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के सदस्य भी बने। वे बाद में TMC से राज्यसभा सदस्य भी रहे। हाल ही में उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया।
शहीद दिवस और राजनीतिक विवाद
तब से ममता बनर्जी हर वर्ष 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाती आ रही हैं — पहले कांग्रेस नेता के रूप में और फिर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के रूप में। कांग्रेस भी इस तिथि पर अलग कार्यक्रम आयोजित करती है। इस वर्ष TMC के दो गुट अलग-अलग 'शहीद दिवस' आयोजित करने की तैयारी में हैं, और रिपोर्ट का प्रकाशन ठीक उससे एक दिन पहले होना राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि 2011 में सत्ता में आई TMC सरकार ने आयोग की सिफारिशों पर कितना अमल किया। यह खुलासा पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, विशेषकर तब जब राज्य में सत्ता-परिवर्तन के बाद पुरानी घटनाओं की जाँच का सिलसिला जारी है।