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21 जुलाई 1993 पुलिस फायरिंग: पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता के खिलाफ कांग्रेस ने कोलकाता में दर्ज कराई एफआईआर

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21 जुलाई 1993 पुलिस फायरिंग: पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता के खिलाफ कांग्रेस ने कोलकाता में दर्ज कराई एफआईआर

सारांश

तीन दशक पुरानी पश्चिम बंगाल पुलिस फायरिंग — जिसमें 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता मारे गए थे — अब अदालती दायरे में लौट आई है। आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक होने और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के वादे के बाद कांग्रेस ने पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 26 जुलाई 2026 को कोलकाता के हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
21 जुलाई 1993 की पुलिस फायरिंग में यूथ कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी; उस समय ज्योति बसु मुख्यमंत्री और मनीष गुप्ता गृह सचिव थे।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुषांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया कि फायरिंग मनीष गुप्ता के निर्देश पर हुई थी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्व TMC सरकार ने 15 वर्षों तक रिपोर्ट दबाए रखी।
मनीष गुप्ता 2011 में TMC से जादवपुर सीट जीतकर बिजली मंत्री और बाद में राज्यसभा सदस्य बने; हालिया चुनावी हार के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ दी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 21 जुलाई 1993 की पुलिस फायरिंग का मामला तीन दशक बाद एक बार फिर कानूनी दायरे में आ गया है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 26 जुलाई 2026 को कोलकाता के हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में राज्य के पूर्व गृह सचिव और पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता के खिलाफ औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई। उस घटना में यूथ कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की जान गई थी।

घटना का पृष्ठभूमि और आयोग की रिपोर्ट

21 जुलाई 1993 को पश्चिम बंगाल में हुई पुलिस फायरिंग के समय ज्योति बसु राज्य के मुख्यमंत्री थे और मनीष गुप्ता गृह सचिव के पद पर कार्यरत थे। इस महीने विधानसभा में पेश की गई न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुषांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट ने इस मामले को नए सिरे से सुर्खियों में ला दिया।

रिपोर्ट पेश करते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उस समय के गृह सचिव मनीष गुप्ता के निर्देश पर ही पुलिस ने फायरिंग की थी। अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने 15 वर्षों तक इस रिपोर्ट को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मनीष गुप्ता को संरक्षण देना चाहती थीं। गौरतलब है कि यह आयोग स्वयं ममता बनर्जी सरकार ने ही गठित किया था।

मनीष गुप्ता का राजनीतिक सफर

सेवानिवृत्ति के बाद मनीष गुप्ता ने 2011 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस में प्रवेश किया। उस चुनाव में उन्होंने दक्षिण 24 परगना जिले की जादवपुर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) उम्मीदवार बुद्धदेव भट्टाचार्य को पराजित किया। यह वही चुनाव था जिसने 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत किया और ममता बनर्जी को सत्ता की कुर्सी तक पहुँचाया।

जीत के बाद मनीष गुप्ता को ममता बनर्जी सरकार में बिजली मंत्री बनाया गया और बाद में वे तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सदस्य भी रहे। हालाँकि, हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में TMC की करारी हार के बाद उन्होंने पार्टी और सक्रिय राजनीति से हमेशा के लिए किनारा करने की घोषणा कर दी।

एफआईआर दर्ज और कांग्रेस की माँग

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उस घोषणा के बाद — कि शिकायत मिलने पर सरकार दोबारा जाँच शुरू करेगी — पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने पहल करते हुए 21 जुलाई को कमेटियों के अध्यक्ष अमिताभ चक्रवर्ती के माध्यम से हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई।

एफआईआर दर्ज कराने के बाद अमिताभ चक्रवर्ती ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि इस मामले की निष्पक्ष और कानूनी जाँच होगी। मनीष गुप्ता सहित इस घटना में शामिल प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।'

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने कहा कि पार्टी चाहती है कि 21 जुलाई 1993 की फायरिंग में शहीद हुए कार्यकर्ताओं को न्याय मिले। उन्होंने मुख्यमंत्री अधिकारी से आग्रह किया कि आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद किया गया वादा अब ज़मीन पर उतरना चाहिए।

आगे क्या होगा

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह देखना होगा कि कोलकाता पुलिस और राज्य सरकार इस मामले में जाँच की दिशा कैसे तय करती है। यह मामला न केवल 1993 की एक त्रासद घटना का न्याय है, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदली राजनीतिक सत्ता के बीच पुराने जख्मों को फिर से खोलने की कोशिश भी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुकदमा राज्य की सत्ता-परिवर्तन के बाद के जवाबदेही-विमर्श का एक अहम परीक्षण बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे TMC सरकार ने ही गठित किया था — और फिर 15 वर्षों तक दबाए रखा। अब जब TMC सत्ता से बाहर है, वही रिपोर्ट उसके पूर्व सहयोगी मनीष गुप्ता के खिलाफ हथियार बन गई है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या जाँच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ती है या यह मामला राजनीतिक स्कोर-सेटलिंग तक सिमटकर रह जाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 जुलाई 1993 पुलिस फायरिंग क्या थी?
21 जुलाई 1993 को पश्चिम बंगाल में हुई पुलिस फायरिंग में यूथ कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी। उस समय ज्योति बसु मुख्यमंत्री और मनीष गुप्ता राज्य के गृह सचिव थे।
मनीष गुप्ता के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई?
न्यायमूर्ति सुषांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 1993 की पुलिस फायरिंग तत्कालीन गृह सचिव मनीष गुप्ता के निर्देश पर हुई थी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर दर्ज कराई।
सुषांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट 15 वर्षों तक क्यों नहीं आई?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पूर्व TMC सरकार ने मनीष गुप्ता को बचाने के लिए रिपोर्ट जानबूझकर सार्वजनिक नहीं की। TMC ने इस आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मनीष गुप्ता का राजनीतिक परिचय क्या है?
मनीष गुप्ता पश्चिम बंगाल के पूर्व गृह सचिव हैं जो सेवानिवृत्ति के बाद 2011 में TMC में शामिल हुए। उन्होंने जादवपुर सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को हराया, बिजली मंत्री और राज्यसभा सदस्य रहे; हालिया चुनावी हार के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ दी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
एफआईआर दर्ज होने के बाद कोलकाता पुलिस जाँच की दिशा तय करेगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वादा किया है कि शिकायत मिलने पर सरकार दोबारा जाँच शुरू करेगी, जिसे पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने जल्द लागू करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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