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21 जुलाई शहीद परिवारों को ₹10,000 मासिक सहायता देगा रितब्रत बनर्जी गुट, ECI के फैसले पर निर्भर

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21 जुलाई शहीद परिवारों को ₹10,000 मासिक सहायता देगा रितब्रत बनर्जी गुट, ECI के फैसले पर निर्भर

सारांश

21 जुलाई शहीद दिवस पर TMC के दो गुट आमने-सामने — रितब्रत बनर्जी ने ECI का फैसला मिलने पर 13 शहीद परिवारों को ₹10,000 मासिक सहायता का वादा किया, जबकि ममता बनर्जी ने पार्टी नाम व चिन्ह के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की। विधानसभा में आयोग रिपोर्ट पेश होने से विवाद और गहरा गया।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी के गुट ने 21 जुलाई 1993 के 13 शहीद परिवारों को ₹10,000 मासिक सहायता देने का ऐलान किया — शर्त ECI का अनुकूल फैसला।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में जस्टिस सुशांत चटर्जी (सेवानिवृत्त) आयोग की रिपोर्ट पेश की।
आयोग ने मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख और घायलों को ₹12 लाख मुआवजे की सिफारिश की थी; पिछली सरकार ने क्रमशः ₹2 लाख और ₹15,000 ही दिए।
अधिकारी ने परिवारों को नई FIR दर्ज कराने और मुख्यमंत्री राहत कोष से पूरा मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने मंगलवार, 21 जुलाई को कोलकाता में शहीद दिवस रैली के दौरान ऐलान किया कि 21 जुलाई 1993 की पुलिस फायरिंग में जान गंवाने वाले 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिजनों को प्रतिमाह ₹10,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। हालाँकि, यह घोषणा एक शर्त पर टिकी है — चुनाव आयोग (ECI) को गुट के पक्ष में पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड सौंपने का फैसला करना होगा।

रितब्रत बनर्जी का ऐलान: क्या कहा रैली में

मध्य कोलकाता में आयोजित शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए रितब्रत बनर्जी ने कहा, 'यदि चुनाव आयोग हमारे पक्ष में फैसला देता है तो तृणमूल कांग्रेस की पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पहला प्रस्ताव 13 शहीदों के परिवारों को ₹10,000 मासिक सहायता देने का होगा। हमने इसका पूरा हिसाब लगाया है और पाया है कि यह संभव है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि पार्टी फंड से दी जाएगी।

21 जुलाई 1993: घटना की पृष्ठभूमि

21 जुलाई 1993 को पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान, तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के शासन में हुए एक प्रदर्शन में पुलिस फायरिंग ने 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जान ले ली थी। यह तारीख तब से पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'शहीद दिवस' के रूप में दर्ज है और प्रत्येक वर्ष विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अलग-अलग रैलियों के माध्यम से याद की जाती है।

ममता बनर्जी का जवाब: सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा

इसी दिन पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने गुट की ओर से आयोजित एक अलग रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार बनाए रखने के लिए वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी। इस प्रकार दोनों गुटों ने एक ही दिन अलग-अलग मंचों से अपनी-अपनी दावेदारी को पुख्ता करने की कोशिश की।

जस्टिस चटर्जी आयोग रिपोर्ट और सुवेंदु अधिकारी के आरोप

सोमवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में जस्टिस सुशांत चटर्जी (सेवानिवृत्त) आयोग की रिपोर्ट पेश की। यह आयोग पूर्व तृणमूल सरकार ने 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत की जाँच के लिए गठित किया था।

रिपोर्ट पेश करने के बाद अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली ममता बनर्जी सरकार ने आयोग की सिफारिशों का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा, 'आयोग ने मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख और घायलों को ₹12 लाख मुआवजा देने की सिफारिश की थी, लेकिन पिछली सरकार ने मृतकों के परिवारों को केवल ₹2 लाख और घायलों को मात्र ₹15,000 दिए। यह शर्मनाक है।'

नई FIR और मुआवजे का अवसर

सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों और घायलों के परिवारों से नई FIR दर्ज कराने की अपील की और कहा कि उनकी सरकार इसके लिए अवसर देगी। उन्होंने यह भी कहा, 'यदि परिवार आयोग की सिफारिश के अनुसार मुआवजा चाहते हैं, तो हमारी सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से वह राशि देने के लिए तैयार है।' यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विभाजन और गहरा हो रहा है और पार्टी पर ECI का फैसला आना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मासिक सहायता का वादा राजनीतिक रूप से चतुर है — यह ECI के फैसले से पहले शहीद परिवारों की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश है, लेकिन इसकी व्यावहारिकता पूरी तरह एक अनिश्चित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर है। दूसरी ओर, जस्टिस चटर्जी आयोग की रिपोर्ट का विधानसभा में पेश होना और पिछली सरकार द्वारा सिफारिशों की अनदेखी के आरोप यह दर्शाते हैं कि 32 साल पुरानी यह त्रासदी आज भी बंगाल की राजनीति में एक जीवित हथियार है। असली सवाल यह है कि क्या किसी भी गुट की प्रतिबद्धता सत्ता मिलने के बाद भी उतनी ही मुखर रहेगी — या यह वादे महज चुनावी मौसम की उपज हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रितब्रत बनर्जी गुट ने 21 जुलाई शहीद परिवारों को ₹10,000 मासिक सहायता देने की शर्त क्या है?
रितब्रत बनर्जी गुट ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता तभी दी जाएगी जब चुनाव आयोग (ECI) उनके गुट को तृणमूल कांग्रेस का नाम, चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड सौंपने का फैसला करे। यह राशि पार्टी फंड से दी जाएगी और पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में इसका प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
21 जुलाई 1993 की घटना क्या थी?
21 जुलाई 1993 को पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता मारे गए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के शासन में हुई इस घटना की जाँच के लिए बाद में जस्टिस सुशांत चटर्जी (सेवानिवृत्त) आयोग गठित किया गया था।
जस्टिस चटर्जी आयोग ने मुआवजे के बारे में क्या सिफारिश की थी?
आयोग ने मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख और घायलों को ₹12 लाख मुआवजा देने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, पिछली ममता बनर्जी सरकार ने इन सिफारिशों का पालन नहीं किया और मृतकों के परिजनों को केवल ₹2 लाख तथा घायलों को मात्र ₹15,000 दिए।
ममता बनर्जी ने पार्टी विवाद पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने गुट की शहीद दिवस रैली में कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार बनाए रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी। इस प्रकार दोनों गुट ECI और अदालत — दोनों मोर्चों पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने शहीद परिवारों के लिए क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में रिपोर्ट पेश करने के बाद मृतकों और घायलों के परिवारों से नई FIR दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि परिवार आयोग की सिफारिश के अनुसार मुआवजा चाहते हैं, तो उनकी सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से वह राशि देने के लिए तैयार है।
राष्ट्र प्रेस
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