आगरा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 15 राज्यों में 2,500 लोगों से नौकरी के नाम पर ठगी, 4 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस ने 9 अगस्त 2026 को एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो नौकरी दिलाने का झाँसा देकर 15 राज्यों में 2,500 से अधिक लोगों को ठग चुके थे। यह गिरोह पिछले दो वर्षों से आगरा में सक्रिय था और देश के अलग-अलग हिस्सों में अन्य साइबर अपराधों में भी संलिप्त रहा है।
ऑपरेशन कैसे हुआ
आगरा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) आदित्य कुमार ने बताया कि काउंटर-इंटेलिजेंस टीम, साइबर सर्विलांस टीम और ताजगंज पुलिस स्टेशन के कर्मियों ने संयुक्त अभियान चलाकर इस गिरोह को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों में एक बिहार का निवासी है, जिस पर पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज है, एक जौनपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है, और दो महिलाएँ आगरा की निवासी हैं।
तीन चरणों में होती थी ठगी
पुलिस के अनुसार, आरोपी एक काल्पनिक कंपनी — जिसका कानूनी रूप से कोई अस्तित्व नहीं था — में नौकरी दिलाने का वादा करते थे। ठगी तीन चरणों में की जाती थी।
पहले चरण में संभावित पीड़ित को फर्जी 'वैकेंसी' की जानकारी देते हुए कॉल किया जाता था और क्यूआर कोड या यूपीआई के ज़रिये 'रजिस्ट्रेशन फीस' जमा करवाई जाती थी। दूसरे चरण में, जब पीड़ित का भरोसा जीत लिया जाता था, तब 'सुपरवाइजर' या 'गार्ड' पद के लिए लगभग ₹8,800 अतिरिक्त माँगे जाते थे। तीसरे चरण में फर्जी जॉइनिंग लेटर जारी करने के नाम पर करीब ₹10,000 और वसूले जाते थे।
बरामद सामग्री
पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है, जिसमें 10 मोबाइल फोन, 35 बैंक पासबुक, 28 एटीएम कार्ड, 8 सिम कार्ड, 7 आधार कार्ड, 6 पैन कार्ड, 2 वोटर आईडी कार्ड, 12 क्यूआर कोड, 1 लैपटॉप, 1 डेस्कटॉप और अनेक चेकबुक शामिल हैं। यह सामग्री इस बात का संकेत देती है कि गिरोह एक सुव्यवस्थित वित्तीय नेटवर्क के ज़रिये धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाता था।
जाँच का दायरा
यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में नौकरी के नाम पर साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। डीसीपी आदित्य कुमार ने बताया कि आगे की जाँच इस बात पर केंद्रित है कि आरोपियों को पीड़ितों के संपर्क-विवरण कहाँ से मिले और ठगी की रकम का उपयोग कहाँ किया गया। गौरतलब है कि 15 राज्यों में फैले पीड़ितों की संख्या इस गिरोह के संगठित और व्यापक नेटवर्क की पुष्टि करती है।
आगे क्या होगा
पुलिस मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है। जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी किसी बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हैं। पीड़ितों से आग्रह किया गया है कि वे नज़दीकी साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ।