9 अगस्त 2026
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आगरा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 15 राज्यों में 2,500 लोगों से नौकरी के नाम पर ठगी, 4 गिरफ्तार

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आगरा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 15 राज्यों में 2,500 लोगों से नौकरी के नाम पर ठगी, 4 गिरफ्तार

सारांश

आगरा पुलिस ने दो साल से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया — 15 राज्यों के 2,500 लोग नौकरी के नाम पर ठगे गए। तीन चरणों में रजिस्ट्रेशन फीस से जॉइनिंग लेटर तक वसूली, और 35 बैंक पासबुक समेत भारी मात्रा में दस्तावेज़ बरामद।

मुख्य बातें

आगरा पुलिस ने 9 अगस्त 2026 को फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरोह ने 15 राज्यों में 2,500 से अधिक लोगों को नौकरी के नाम पर ठगा।
ठगी तीन चरणों में होती थी — रजिस्ट्रेशन फीस, पद के लिए ₹8,800 , और फर्जी जॉइनिंग लेटर के लिए ₹10,000 ।
आरोपी दो वर्षों से आगरा में सक्रिय थे; एक आरोपी पर पहले से आपराधिक मामला दर्ज।
बरामदगी में 35 बैंक पासबुक , 28 एटीएम कार्ड , 10 मोबाइल फोन , 12 क्यूआर कोड और 1 लैपटॉप शामिल।
पीड़ितों के संपर्क-स्रोत और ठगी की रकम के उपयोग की जाँच जारी।

उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस ने 9 अगस्त 2026 को एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो नौकरी दिलाने का झाँसा देकर 15 राज्यों में 2,500 से अधिक लोगों को ठग चुके थे। यह गिरोह पिछले दो वर्षों से आगरा में सक्रिय था और देश के अलग-अलग हिस्सों में अन्य साइबर अपराधों में भी संलिप्त रहा है।

ऑपरेशन कैसे हुआ

आगरा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) आदित्य कुमार ने बताया कि काउंटर-इंटेलिजेंस टीम, साइबर सर्विलांस टीम और ताजगंज पुलिस स्टेशन के कर्मियों ने संयुक्त अभियान चलाकर इस गिरोह को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों में एक बिहार का निवासी है, जिस पर पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज है, एक जौनपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है, और दो महिलाएँ आगरा की निवासी हैं।

तीन चरणों में होती थी ठगी

पुलिस के अनुसार, आरोपी एक काल्पनिक कंपनी — जिसका कानूनी रूप से कोई अस्तित्व नहीं था — में नौकरी दिलाने का वादा करते थे। ठगी तीन चरणों में की जाती थी।

पहले चरण में संभावित पीड़ित को फर्जी 'वैकेंसी' की जानकारी देते हुए कॉल किया जाता था और क्यूआर कोड या यूपीआई के ज़रिये 'रजिस्ट्रेशन फीस' जमा करवाई जाती थी। दूसरे चरण में, जब पीड़ित का भरोसा जीत लिया जाता था, तब 'सुपरवाइजर' या 'गार्ड' पद के लिए लगभग ₹8,800 अतिरिक्त माँगे जाते थे। तीसरे चरण में फर्जी जॉइनिंग लेटर जारी करने के नाम पर करीब ₹10,000 और वसूले जाते थे।

बरामद सामग्री

पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है, जिसमें 10 मोबाइल फोन, 35 बैंक पासबुक, 28 एटीएम कार्ड, 8 सिम कार्ड, 7 आधार कार्ड, 6 पैन कार्ड, 2 वोटर आईडी कार्ड, 12 क्यूआर कोड, 1 लैपटॉप, 1 डेस्कटॉप और अनेक चेकबुक शामिल हैं। यह सामग्री इस बात का संकेत देती है कि गिरोह एक सुव्यवस्थित वित्तीय नेटवर्क के ज़रिये धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाता था।

जाँच का दायरा

यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में नौकरी के नाम पर साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। डीसीपी आदित्य कुमार ने बताया कि आगे की जाँच इस बात पर केंद्रित है कि आरोपियों को पीड़ितों के संपर्क-विवरण कहाँ से मिले और ठगी की रकम का उपयोग कहाँ किया गया। गौरतलब है कि 15 राज्यों में फैले पीड़ितों की संख्या इस गिरोह के संगठित और व्यापक नेटवर्क की पुष्टि करती है।

आगे क्या होगा

पुलिस मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है। जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी किसी बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हैं। पीड़ितों से आग्रह किया गया है कि वे नज़दीकी साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 पीड़ित और दो साल की सक्रियता यह दर्शाती है कि रोज़गार की तलाश में जुटे युवाओं को निशाना बनाने वाले गिरोह अब व्यवस्थित उद्यम की तरह काम कर रहे हैं। तीन-चरणीय ठगी का यह मॉडल — रजिस्ट्रेशन से शुरू होकर फर्जी जॉइनिंग लेटर तक — साफ़ दिखाता है कि ये गिरोह पीड़ित के भरोसे को धीरे-धीरे भुनाते हैं। 35 बैंक पासबुक और 28 एटीएम कार्ड की बरामदगी सवाल उठाती है कि इतने बड़े वित्तीय नेटवर्क की बैंकिंग निगरानी क्यों विफल रही। असली परीक्षा अब यह है कि क्या जाँच एजेंसियाँ इस गिरोह के संभावित बड़े नेटवर्क तक पहुँच पाती हैं, या मामला केवल चार गिरफ्तारियों तक सिमट जाएगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आगरा के फर्जी कॉल सेंटर में कितने लोगों को ठगा गया?
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने 15 राज्यों में लगभग 2,500 लोगों के साथ धोखाधड़ी की। आरोपी पिछले दो वर्षों से आगरा में इस फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे।
नौकरी के नाम पर यह ठगी कैसे की जाती थी?
ठगी तीन चरणों में होती थी — पहले फर्जी वैकेंसी की जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन फीस वसूली जाती थी, फिर 'सुपरवाइजर' या 'गार्ड' पद के लिए लगभग ₹8,800 माँगे जाते थे, और अंत में फर्जी जॉइनिंग लेटर के नाम पर करीब ₹10,000 और लिए जाते थे।
इस मामले में कितने और कौन लोग गिरफ्तार हुए?
कुल चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं — एक बिहार का निवासी (जिस पर पहले से आपराधिक मामला दर्ज है), एक जौनपुर (उत्तर प्रदेश) का, और दो आगरा की महिलाएँ। यह गिरफ्तारी काउंटर-इंटेलिजेंस, साइबर सर्विलांस और ताजगंज थाना पुलिस के संयुक्त अभियान में हुई।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
बरामद सामग्री में 10 मोबाइल फोन , 35 बैंक पासबुक , 28 एटीएम कार्ड , 8 सिम कार्ड , 7 आधार कार्ड , 6 पैन कार्ड , 2 वोटर आईडी , 12 क्यूआर कोड , 1 लैपटॉप और 1 डेस्कटॉप शामिल हैं।
साइबर ठगी का शिकार होने पर कहाँ शिकायत करें?
साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत का विकल्प भी उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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