अहमदाबाद जुआ रैकेट भंडाफोड़: मनपसंद जिमखाना में 187 गिरफ्तार, ₹33 लाख नकद बरामद
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) ने 7 अगस्त को अहमदाबाद के दरियापुर स्थित मनपसंद जिमखाना पर छापेमारी कर 187 लोगों को गिरफ्तार किया — जिसे जांचकर्ता हाल के वर्षों में गुजरात की सबसे बड़ी जुआ-विरोधी कार्रवाई बता रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में न केवल एक अवैध कार्ड रूम का पर्दाफाश हुआ, बल्कि नकदी छिपाने, प्रवर्तन एजेंसियों को गुमराह करने और पूरे संचालन को 'क्लब मनोरंजन' के रूप में पेश करने की एक सुनियोजित प्रणाली भी सामने आई।
मुख्य घटनाक्रम
पुष्ट खुफिया जानकारी मिलने के बाद रविवार शाम को यह छापेमारी की गई। एसएमसी ने सूचना की पुष्टि में लगभग 25 से 30 मिनट लगाए और फिर 20 से 25 कर्मियों की पाँच टीमें गठित कीं। रविवार शाम का समय जानबूझकर चुना गया, क्योंकि दरियापुर का इलाका उस वक्त भीड़भाड़ वाला रहता है — इससे टीमें आम लोगों में घुल-मिलकर परिसर तक पहुँच सकीं।
एक अधिकारी ने बताया, 'टीमें भीड़भाड़ वाली गलियों से अलग-अलग आगे बढ़ीं और फिर एक साथ परिसर में पहुँचकर अंदर मौजूद लोगों को भागने से रोक दिया।' जिमखाना के मुख्य द्वार से जुआ गतिविधि दिखाई नहीं देती थी — खिलाड़ियों को पहली मंजिल के हॉल तक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती थीं, जहाँ लगभग 20 से 22 मेजें लगी थीं और लोग सक्रिय रूप से ताश खेल रहे थे।
कैसे काम करती थी यह प्रणाली
जांचकर्ताओं के अनुसार, खिलाड़ी मेज पर नकदी लाने के बजाय कथित तौर पर भूतल के एक कार्यालय में पैसे जमा करते थे। इसके बाद उन्हें हस्तलिखित पर्चियाँ (रसीद) दी जाती थीं, जिन पर वास्तविक राशि के बजाय कोडित मूल्य लिखे होते थे — उदाहरण के लिए, ₹5,000 जमा करने वाले खिलाड़ी को 'केवल 50' अंकित पर्ची मिलती, जिसमें जानबूझकर दो शून्य छोड़े जाते।
पर्ची ऊपर पहुँचाई जाती, जहाँ मेज पर बैठा एक कर्मचारी खिलाड़ी का नाम और सांकेतिक राशि एक मुद्रित रजिस्टर में दर्ज करता। प्रत्येक मेज पर छह खिलाड़ी बैठते थे और हर खेल में एक विजेता होता था। आरोप है कि टेबल संचालक को प्रति खेल ₹300 मिलते थे। खिलाड़ी लगातार आते-जाते रहते और खेल के बाद रिकॉर्ड अपडेट होता रहता।
सीसीटीवी निगरानी और 'इनकार की व्यवस्था'
परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिनमें क्लब की ओर जाने वाली गली की निगरानी करने वाले कैमरे भी शामिल थे — ताकि अंदर मौजूद लोग आने वाले आगंतुकों पर नज़र रख सकें। जांचकर्ताओं का मानना है कि पूरी व्यवस्था इस तरह बनाई गई थी कि पुलिस के आने पर खिलाड़ी यह दावा कर सकें कि वे केवल क्लब सदस्य हैं और मनोरंजन के लिए ताश खेल रहे हैं, क्योंकि मेजों पर कोई नकदी दिखाई नहीं देती थी।
इसी कारण 187 लोगों की मौजूदगी के बावजूद केवल लगभग ₹33 लाख नकद बरामद हो सके। अधिकारियों के अनुसार, यह राशि केवल तत्काल उपलब्ध नकदी थी — सट्टेबाजी का वास्तविक मूल्य इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। बरामद नकदी जुए की मेजों पर नहीं, बल्कि पंचनामे के दौरान संदिग्धों से पूछताछ के बाद जुए के क्षेत्र से बाहर तलाशी लेकर मिली।
पाँच वर्षों में तीसरी बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि यह दरियापुर परिसर में पाँच वर्षों में तीसरी बड़ी पुलिस कार्रवाई है। एसएमसी ने 2021 में उसी स्थान पर छापा मारकर 183 लोगों को गिरफ्तार किया था। 2023 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने फिर से छापेमारी की और 27 लोगों को गिरफ्तार किया था — जब जांचकर्ताओं ने बताया कि क्लब ने दोबारा परिचालन शुरू कर दिया है। तीन बार की कार्रवाई के बावजूद संचालन का फिर-फिर शुरू होना इस रैकेट की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है।
जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई
जांचकर्ताओं का आरोप है कि धन के लेन-देन का बड़ा हिस्सा भौतिक मुद्रा से परे अन्य माध्यमों से हुआ होगा। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यूपीआई लेनदेन और बैंक खातों की भी जाँच की जा रही है। मुख्य संचालक और कर्मचारियों सहित 9 आरोपियों के लिए पुलिस रिमांड माँगी गई है, ताकि डिजिटल भुगतान के सूत्र खंगाले जा सकें और उन खातों की पहचान हो सके जिनका कथित तौर पर सट्टेबाजी की आय को संभालने के लिए इस्तेमाल किया गया। यह जांच अब एक साधारण जुआ मामले से आगे बढ़कर संगठित वित्तीय धोखाधड़ी की दिशा में केंद्रित हो गई है।