7 अगस्त 2026
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अहमदाबाद जुआ रैकेट भंडाफोड़: मनपसंद जिमखाना में 187 गिरफ्तार, ₹33 लाख नकद बरामद

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अहमदाबाद जुआ रैकेट भंडाफोड़: मनपसंद जिमखाना में 187 गिरफ्तार, ₹33 लाख नकद बरामद

सारांश

अहमदाबाद के दरियापुर में मनपसंद जिमखाना पर एसएमसी की छापेमारी में 187 गिरफ्तार — लेकिन असली खुलासा जुए का नहीं, उसके पीछे की वित्तीय इंजीनियरिंग का है। कोडित पर्चियाँ, सीसीटीवी निगरानी और छिपी नकदी — यह पाँच साल में तीसरी कार्रवाई है, और हर बार क्लब ने खुद को फिर खड़ा कर लिया।

मुख्य बातें

गुजरात एसएमसी ने 7 अगस्त को अहमदाबाद के मनपसंद जिमखाना, दरियापुर पर छापेमारी कर 187 लोगों को गिरफ्तार किया।
परिसर से लगभग ₹33 लाख नकद बरामद हुए, जो जुए की मेजों पर नहीं बल्कि छिपाकर रखे गए थे।
सट्टेबाजी कोडित हस्तलिखित पर्चियों और भूतल कार्यालय में नकद जमा की व्यवस्था के ज़रिए होती थी — मेजों पर कोई नकदी नहीं रखी जाती थी।
परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे गली की निगरानी के लिए इस्तेमाल होते थे, ताकि पुलिस आने पर अंदर वालों को पहले से सतर्क किया जा सके।
यह दरियापुर में पाँच वर्षों में तीसरी बड़ी पुलिस कार्रवाई है — 2021 में 183 और 2023 में 27 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
9 मुख्य आरोपियों की पुलिस रिमांड माँगी गई; अब यूपीआई लेनदेन और बैंक खातों की जाँच की जा रही है।

गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) ने 7 अगस्त को अहमदाबाद के दरियापुर स्थित मनपसंद जिमखाना पर छापेमारी कर 187 लोगों को गिरफ्तार किया — जिसे जांचकर्ता हाल के वर्षों में गुजरात की सबसे बड़ी जुआ-विरोधी कार्रवाई बता रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में न केवल एक अवैध कार्ड रूम का पर्दाफाश हुआ, बल्कि नकदी छिपाने, प्रवर्तन एजेंसियों को गुमराह करने और पूरे संचालन को 'क्लब मनोरंजन' के रूप में पेश करने की एक सुनियोजित प्रणाली भी सामने आई।

मुख्य घटनाक्रम

पुष्ट खुफिया जानकारी मिलने के बाद रविवार शाम को यह छापेमारी की गई। एसएमसी ने सूचना की पुष्टि में लगभग 25 से 30 मिनट लगाए और फिर 20 से 25 कर्मियों की पाँच टीमें गठित कीं। रविवार शाम का समय जानबूझकर चुना गया, क्योंकि दरियापुर का इलाका उस वक्त भीड़भाड़ वाला रहता है — इससे टीमें आम लोगों में घुल-मिलकर परिसर तक पहुँच सकीं।

एक अधिकारी ने बताया, 'टीमें भीड़भाड़ वाली गलियों से अलग-अलग आगे बढ़ीं और फिर एक साथ परिसर में पहुँचकर अंदर मौजूद लोगों को भागने से रोक दिया।' जिमखाना के मुख्य द्वार से जुआ गतिविधि दिखाई नहीं देती थी — खिलाड़ियों को पहली मंजिल के हॉल तक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती थीं, जहाँ लगभग 20 से 22 मेजें लगी थीं और लोग सक्रिय रूप से ताश खेल रहे थे।

कैसे काम करती थी यह प्रणाली

जांचकर्ताओं के अनुसार, खिलाड़ी मेज पर नकदी लाने के बजाय कथित तौर पर भूतल के एक कार्यालय में पैसे जमा करते थे। इसके बाद उन्हें हस्तलिखित पर्चियाँ (रसीद) दी जाती थीं, जिन पर वास्तविक राशि के बजाय कोडित मूल्य लिखे होते थे — उदाहरण के लिए, ₹5,000 जमा करने वाले खिलाड़ी को 'केवल 50' अंकित पर्ची मिलती, जिसमें जानबूझकर दो शून्य छोड़े जाते।

पर्ची ऊपर पहुँचाई जाती, जहाँ मेज पर बैठा एक कर्मचारी खिलाड़ी का नाम और सांकेतिक राशि एक मुद्रित रजिस्टर में दर्ज करता। प्रत्येक मेज पर छह खिलाड़ी बैठते थे और हर खेल में एक विजेता होता था। आरोप है कि टेबल संचालक को प्रति खेल ₹300 मिलते थे। खिलाड़ी लगातार आते-जाते रहते और खेल के बाद रिकॉर्ड अपडेट होता रहता।

सीसीटीवी निगरानी और 'इनकार की व्यवस्था'

परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिनमें क्लब की ओर जाने वाली गली की निगरानी करने वाले कैमरे भी शामिल थे — ताकि अंदर मौजूद लोग आने वाले आगंतुकों पर नज़र रख सकें। जांचकर्ताओं का मानना है कि पूरी व्यवस्था इस तरह बनाई गई थी कि पुलिस के आने पर खिलाड़ी यह दावा कर सकें कि वे केवल क्लब सदस्य हैं और मनोरंजन के लिए ताश खेल रहे हैं, क्योंकि मेजों पर कोई नकदी दिखाई नहीं देती थी।

इसी कारण 187 लोगों की मौजूदगी के बावजूद केवल लगभग ₹33 लाख नकद बरामद हो सके। अधिकारियों के अनुसार, यह राशि केवल तत्काल उपलब्ध नकदी थी — सट्टेबाजी का वास्तविक मूल्य इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। बरामद नकदी जुए की मेजों पर नहीं, बल्कि पंचनामे के दौरान संदिग्धों से पूछताछ के बाद जुए के क्षेत्र से बाहर तलाशी लेकर मिली।

पाँच वर्षों में तीसरी बड़ी कार्रवाई

गौरतलब है कि यह दरियापुर परिसर में पाँच वर्षों में तीसरी बड़ी पुलिस कार्रवाई है। एसएमसी ने 2021 में उसी स्थान पर छापा मारकर 183 लोगों को गिरफ्तार किया था। 2023 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने फिर से छापेमारी की और 27 लोगों को गिरफ्तार किया था — जब जांचकर्ताओं ने बताया कि क्लब ने दोबारा परिचालन शुरू कर दिया है। तीन बार की कार्रवाई के बावजूद संचालन का फिर-फिर शुरू होना इस रैकेट की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है।

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

जांचकर्ताओं का आरोप है कि धन के लेन-देन का बड़ा हिस्सा भौतिक मुद्रा से परे अन्य माध्यमों से हुआ होगा। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यूपीआई लेनदेन और बैंक खातों की भी जाँच की जा रही है। मुख्य संचालक और कर्मचारियों सहित 9 आरोपियों के लिए पुलिस रिमांड माँगी गई है, ताकि डिजिटल भुगतान के सूत्र खंगाले जा सकें और उन खातों की पहचान हो सके जिनका कथित तौर पर सट्टेबाजी की आय को संभालने के लिए इस्तेमाल किया गया। यह जांच अब एक साधारण जुआ मामले से आगे बढ़कर संगठित वित्तीय धोखाधड़ी की दिशा में केंद्रित हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगठित वित्तीय अपराध है। असली परीक्षा अब यूपीआई और बैंक जाँच की है — अगर डिजिटल सूत्र नहीं खंगाले गए, तो ₹33 लाख की बरामदगी इस नेटवर्क की वास्तविक कमाई का महज एक अंश साबित होगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद मनपसंद जिमखाना छापेमारी में क्या हुआ?
गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) ने 7 अगस्त को दरियापुर स्थित मनपसंद जिमखाना पर छापेमारी कर 187 लोगों को गिरफ्तार किया और लगभग ₹33 लाख नकद बरामद किए। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह हाल के वर्षों में गुजरात की सबसे बड़ी जुआ-विरोधी कार्रवाई है।
इस जुआ रैकेट में कोडित पर्चियाँ कैसे काम करती थीं?
खिलाड़ी भूतल के एक कार्यालय में नकदी जमा करते थे और उन्हें हस्तलिखित पर्चियाँ मिलती थीं जिन पर वास्तविक राशि के बजाय कोडित मूल्य लिखे होते थे — जैसे ₹5,000 के लिए केवल '50' लिखा जाता। इससे मेजों पर कोई नकदी नहीं दिखती थी, जिससे पुलिस आने पर खिलाड़ी यह दावा कर सकते थे कि वे केवल मनोरंजन के लिए ताश खेल रहे हैं।
क्या यह पहली बार है कि इस जगह छापेमारी हुई है?
नहीं, यह दरियापुर परिसर में पाँच वर्षों में तीसरी बड़ी पुलिस कार्रवाई है। एसएमसी ने 2021 में 183 लोगों को और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 2023 में 27 लोगों को गिरफ्तार किया था। हर बार कार्रवाई के बाद क्लब ने कथित तौर पर अपना संचालन फिर से शुरू कर दिया।
अब जांच किस दिशा में जा रही है?
जांचकर्ता अब यूपीआई लेनदेन और बैंक खातों की जाँच कर रहे हैं, यह मानते हुए कि धन के लेन-देन का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों से हुआ होगा। मुख्य संचालक और कर्मचारियों सहित 9 आरोपियों की पुलिस रिमांड माँगी गई है ताकि वित्तीय नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सके।
सीसीटीवी का इस रैकेट में क्या भूमिका थी?
परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे क्लब की ओर जाने वाली गली की निगरानी करते थे, जिससे अंदर मौजूद लोगों को आने वाले आगंतुकों — खासकर पुलिस — की जानकारी पहले से मिल सके। यह पूरी व्यवस्था संचालन को सुरक्षित रखने और पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए बनाई गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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