अहमदाबाद: 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले मुस्लिम नेता ने भेंट किया सोने-चांदी का 'एकता रथ', 27 साल पुरानी परंपरा जारी
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद में 16 जुलाई को निकलने वाली 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले सांप्रदायिक सौहार्द की एक विशेष मिसाल सामने आई, जब मुस्लिम नेता रऊफ बंगाली ने भगवान जगन्नाथ को 'एकता रथ' समर्पित किया। इस वर्ष पहली बार 300 ग्राम से अधिक चांदी से निर्मित रथ पर सोने की पत्ती चढ़ाई गई है। यह रथ औपचारिक रूप से जगन्नाथ मंदिर के महंत को सौंपा गया और हिंदू-मुस्लिम एकता तथा राष्ट्रीय सद्भाव का प्रतीक बना।
एकता रथ की विशेषताएँ
रऊफ बंगाली द्वारा तैयार कराए गए इस विशेष रथ को बनाने में लगभग 15 दिन का समय लगा। तीन घोड़ों से सुसज्जित यह रथ इस वर्ष की रथ यात्रा का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस बार पहली बार चांदी के रथ पर सोने की पत्ती का उपयोग किया गया, जिसने इसे पिछले वर्षों के रथों से विशिष्ट बनाया।
27 वर्षों की परंपरा और इसकी पृष्ठभूमि
रऊफ बंगाली ने बताया कि वे पिछले 26 वर्षों से मुस्लिम समाज की ओर से भगवान जगन्नाथ को चांदी का रथ भेंट करते आ रहे हैं और यह उनका 27वाँ रथ है। उन्होंने यह परंपरा वर्ष 2000 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के उद्देश्य से शुरू की थी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर सामाजिक बहस जारी है। गौरतलब है कि पिछले ढाई दशक में यह पहल केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं रही, बल्कि समाज में शांति और भाईचारे का व्यापक प्रतीक बन चुकी है।
रथ यात्रा का भव्य आयोजन
जगन्नाथ मंदिर ट्रस्टी महेंद्र झा ने बताया कि 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई को सुबह 7 बजे मंदिर परिसर से प्रारंभ होगी। यात्रा की शुरुआत 18 गजराजों (हाथियों) से होगी, इसके बाद 101 ट्रकों पर भारतीय संस्कृति की भव्य झांकियाँ प्रस्तुत की जाएंगी। लगभग 30 अखाड़ा मंडलियाँ पारंपरिक करतब दिखाएंगी, और तीन रास-गरबा मंडलियाँ व तीन बैंड दल भी शोभायात्रा में शामिल होंगे। यात्रा में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ, सुभद्रा का देवदलन रथ और बलभद्र का तालध्वज रथ शामिल होंगे। यात्रा का विस्तार लगभग 15 से 16 किलोमीटर होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की भागीदारी
महेंद्र झा ने बताया कि रथ यात्रा के दिन सुबह 4 बजे होने वाली मंगला आरती में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। सुबह 4:30 बजे भगवान की आँखों पर बंधी पट्टी खोली जाएगी और सुबह 5:45 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथों में विराजमान किया जाएगा। सुबह 7 बजे शुभ मुहूर्त में गुजरात के मुख्यमंत्री सोने के झाड़ू से भगवान के रथ के आगे का मार्ग साफ करेंगे और स्वयं रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ कराएंगे।
आस्था और परंपरा का महापर्व
जगन्नाथ मंदिर के महंत दिलीप दास महाराज ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथ यात्रा पूरे प्रदेश का आस्था और श्रद्धा का महापर्व है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (दूज) के दिन यह यात्रा निकलेगी। अमावस्या के दिन जब भगवान मामा के घर से वापस मंदिर लौटते हैं, तब नेत्रोत्सव पूजा का आयोजन होता है, जिसमें साधु-संतों का सम्मान और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। रथ यात्रा के अगले दिन भगवान जगन्नाथ का स्वर्ण वेश में विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस वर्ष भी गजराज, सांस्कृतिक झांकियाँ, अखाड़े, भजन मंडलियाँ और ध्वज-पताकाओं के साथ भव्य शोभायात्रा निकलेगी।