3 अक्टूबर 2026
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केरल कांग्रेस में गुटबाजी: अडूर प्रकाश बनाम सतीशन विवाद में AICC के कदम पर नज़र

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केरल कांग्रेस में गुटबाजी: अडूर प्रकाश बनाम सतीशन विवाद में AICC के कदम पर नज़र

सारांश

केरल में कांग्रेस सत्ता में लौटते ही गुटबाजी की पुरानी आग फिर सुलग उठी है। UDF संयोजक अडूर प्रकाश और मुख्यमंत्री सतीशन के बीच खुले मतभेद, चार महीने से अटकी अध्यक्ष नियुक्ति और AICC की भूमिका पर सवाल — यह तस्वीर बताती है कि सत्ता मिलने के बाद भी पार्टी अंदर से एकजुट नहीं है।

मुख्य बातें

UDF संयोजक अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन की सार्वजनिक आलोचना की, बड़े फैसलों में सलाह न लेने का आरोप लगाया।
प्रकाश ने अपनी शिकायतें AICC के सामने रखने की बात कही है।
AICC महासचिव दीपा दासमुंशी की भूमिका पर सतीशन गुट में संदेह व्यक्त किया जा रहा है।
सतीशन सरकार के सत्ता में आने के चार महीने बाद भी नए राज्य कांग्रेस अध्यक्ष का नाम तय नहीं हुआ।
वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व मामले को सुलझाने में पहल करेगा।

केरल की राजनीति में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) का अगला कदम सबकी नज़रों में है, क्योंकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) संयोजक अडूर प्रकाश और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। 3 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम से सामने आई इस खबर ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस एक बार फिर अपनी पुरानी गुटबाजी की राह पर है। दोनों खेमे अब AICC के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

विवाद तब सार्वजनिक हुआ जब अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री सतीशन पर UDF और सरकार के बड़े फैसलों में संयोजक को शामिल न करने का आरोप लगाया। प्रकाश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम अपनी निजी पहल पर उठाया और उनकी आलोचना UDF संयोजक के रूप में उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित थी।

प्रकाश ने यह भी संकेत दिया कि वे अपनी शिकायतें AICC के समक्ष रखेंगे, जिससे यह विवाद राज्य से ऊपर केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँचता दिख रहा है।

सतीशन गुट की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सतीशन का खेमा इस तर्क को मानने को तैयार नहीं है कि प्रकाश की सार्वजनिक आलोचना किसी बड़े समर्थन के बिना की गई अलग-थलग कार्रवाई थी। गुट के भीतर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इस आलोचना को AICC के वरिष्ठ नेताओं का मौन समर्थन हासिल था।

केरल के लिए AICC महासचिव दीपा दासमुंशी की भूमिका को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है। सतीशन गुट यह देखना चाहता है कि क्या केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन करेगा।

गुटबाजी का पुराना इतिहास

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में कांग्रेस की गुटीय राजनीति का इतिहास दशकों पुराना है। के. करुणाकरण और ए.के. एंटनी के युग से लेकर ओमन चांडी के कार्यकाल और अब सतीशन के नेतृत्व तक, पार्टी के कामकाज पर अंदरूनी खींचतान का असर बार-बार देखा गया है। गौरतलब है कि यह विवाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के सत्ता में लौटने के कुछ ही समय बाद सामने आया है।

संगठनात्मक पुनर्गठन में देरी

सतीशन सरकार के सत्ता संभालने और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ के बिजली मंत्री बनने के चार महीने बाद भी नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान नहीं हो पाया है। संगठनात्मक पुनर्गठन में हो रही इस देरी को भी गुटीय नज़रिए से देखा जा रहा है, और एक धड़े को शक है कि इस प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है।

AICC का रुख और आगे की राह

AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी के पास अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने के अपने तरीके हैं और केंद्रीय नेतृत्व इस मामले में पहल करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे मतभेदों को सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं हैं।

अब यह देखना होगा कि AICC किस पक्ष को तरजीह देता है — प्रकाश गुट की शिकायतों को या सतीशन के नेतृत्व को। केरल में कांग्रेस की चुनावी संभावनाएँ काफी हद तक इसी फैसले पर टिकी होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार बनते ही सतह पर आ जाती है। अडूर प्रकाश की सार्वजनिक आलोचना और AICC नेताओं की कथित भूमिका पर सवाल यह बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व ने गुटीय संतुलन का कोई स्पष्ट खाका अब तक नहीं बनाया। चार महीने बाद भी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति न होना संगठनात्मक कमज़ोरी नहीं, बल्कि गुटीय गतिरोध की स्वीकारोक्ति है। अगर AICC ने जल्द और स्पष्ट हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनावी गणित को पलट सकता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में कांग्रेस का ताज़ा गुटीय विवाद क्या है?
UDF संयोजक अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर बड़े फैसलों में सलाह न लेने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक आलोचना की है। इससे केरल कांग्रेस में एक बार फिर गुटीय खींचतान उभर आई है और दोनों पक्ष AICC के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
AICC इस विवाद में क्या भूमिका निभा रही है?
AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व मामले को सुलझाने में पहल करेगा और मतभेदों को सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं है। केरल के लिए AICC महासचिव दीपा दासमुंशी की भूमिका पर भी सतीशन गुट में संदेह जताया जा रहा है।
केरल में नए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है?
सतीशन सरकार के सत्ता संभालने और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ के बिजली मंत्री बनने के चार महीने बाद भी नए अध्यक्ष का ऐलान नहीं हुआ है। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि इस देरी के पीछे गुटीय कलह ज़िम्मेदार है।
अडूर प्रकाश और सतीशन के बीच मूल विवाद क्या है?
प्रकाश का आरोप है कि UDF और सरकार के बड़े फैसलों में संयोजक के रूप में उनसे सलाह नहीं ली जाती। सतीशन गुट इसे अलग-थलग घटना नहीं मानता और उसे शक है कि इस आलोचना को AICC के वरिष्ठ नेताओं का मौन समर्थन हासिल था।
केरल में कांग्रेस की गुटबाजी का इतिहास क्या रहा है?
केरल में कांग्रेस की गुटीय राजनीति के. करुणाकरण और ए.के. एंटनी के दौर से चली आ रही है। ओमन चांडी के कार्यकाल में भी यही स्थिति देखी गई और अब वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में यही पुरानी चुनौती फिर उभरी है।
राष्ट्र प्रेस
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