4 सितंबर 2026
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भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे का ऐतिहासिक समझौता, फ्लाइट टेस्ट क्रू के लिए विशेष मास्टर्स प्रोग्राम

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भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे का ऐतिहासिक समझौता, फ्लाइट टेस्ट क्रू के लिए विशेष मास्टर्स प्रोग्राम

सारांश

भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे की यह साझेदारी महज़ एक शैक्षणिक समझौता नहीं — यह देश के सैन्य एयरोस्पेस इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। फ्लाइट टेस्ट क्रू के लिए विशेष मास्टर्स प्रोग्राम भारतीय वायुसेना की परीक्षण क्षमताओं को वैश्विक मानकों तक ले जाने का प्रयास है।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे ने 4 सितंबर को सैन्य विमानन में सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए।
एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल (AFTPS) और आईआईटी बॉम्बे मिलकर टेस्ट पायलट व फ्लाइट टेस्ट इंजीनियरों के लिए विशेष मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम संचालित करेंगे।
समझौते पर एयर वाइस मार्शल आशीष श्रीवास्तव और प्रोफेसर शिरीष केदारे की उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए।
यह पहल भारत के स्वदेशी मिलिट्री एयरोस्पेस इकोसिस्टम और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के विजन को बल देगी।
प्रोग्राम का उद्देश्य सैन्य उड़ान परीक्षण के व्यावहारिक अनुभव को आईआईटी बॉम्बे की अनुसंधान क्षमताओं के साथ एकीकृत करना है।

भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे ने 4 सितंबर को सैन्य विमानन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत फ्लाइट टेस्ट क्रू — यानी टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर — के लिए एक विशेष मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। यह पहल वायुसेना के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल (AFTPS) और आईआईटी बॉम्बे की संयुक्त शैक्षणिक-तकनीकी साझेदारी का परिणाम है, जो देश के स्वदेशी एयरोस्पेस इकोसिस्टम को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक ठोस कदम है।

समझौते का विवरण

इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत वायुसेना के एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल और आईआईटी बॉम्बे मिलकर यह कार्यक्रम संचालित करेंगे। समझौते के अवसर पर वायुसेना के सहायक प्रमुख (प्रोजेक्ट्स) एयर वाइस मार्शल आशीष श्रीवास्तव और आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे उपस्थित रहे।

प्रोग्राम का उद्देश्य

इस मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम का मूल लक्ष्य सैन्य उड़ान परीक्षण के व्यावहारिक अनुभव को आईआईटी बॉम्बे की उन्नत शैक्षणिक, तकनीकी और अनुसंधान क्षमताओं के साथ एकीकृत करना है। यह प्रोग्राम टेस्ट पायलटों और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियरों को उच्चस्तरीय तकनीकी ज्ञान से लैस करेगा, ताकि वे सैन्य विमानों और एविएशन प्रणालियों का सटीक एवं वैज्ञानिक मूल्यांकन कर सकें।

रक्षा आत्मनिर्भरता पर असर

गौरतलब है कि किसी भी नए एयरक्राफ्ट या एविएशन सिस्टम को सैन्य बेड़े में शामिल करने से पूर्व उसकी उड़ान परीक्षण प्रक्रिया अत्यंत निर्णायक होती है। यह अकादमिक साझेदारी रक्षा क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी और भारत को एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न आईआईटी संस्थान सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण शोध व शैक्षणिक कार्यक्रमों को गति दे रहे हैं।

व्यापक परिप्रेक्ष्य

सैन्य यूनिफॉर्म से लेकर आधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी तक, आईआईटी संस्थानों के शोधकर्ता सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं। यह नई पहल उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है और स्वदेशी मिलिट्री एयरोस्पेस इकोसिस्टम को और मज़बूत आधार प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अकादमिक-सैन्य साझेदारियाँ भारत की रक्षा तैयारियों में दीर्घकालिक गुणात्मक सुधार लाने में सक्षम हैं।

आने वाले समय में यह प्रोग्राम भारतीय वायुसेना की परीक्षण क्षमताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली महत्व रणनीतिक है — स्वदेशी विमान परीक्षण की क्षमता विकसित किए बिना 'आत्मनिर्भर रक्षा' का लक्ष्य अधूरा रहेगा। अब तक भारत के फ्लाइट टेस्ट क्रू को औपचारिक उच्च शिक्षा के लिए विदेशी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था — यह कार्यक्रम उस निर्भरता को कम करने की दिशा में पहला ठोस संस्थागत प्रयास है। हालाँकि, कार्यक्रम के पाठ्यक्रम, प्रवेश मानदंड और पहले बैच की समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, जो क्रियान्वयन की गति पर सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे के बीच क्या समझौता हुआ है?
भारतीय वायुसेना के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल और आईआईटी बॉम्बे ने सैन्य विमानन में सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत फ्लाइट टेस्ट क्रू — यानी टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर — के लिए एक विशेष मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।
इस मास्टर्स प्रोग्राम का उद्देश्य क्या है?
इस प्रोग्राम का उद्देश्य सैन्य उड़ान परीक्षण के व्यावहारिक अनुभव को आईआईटी बॉम्बे की उन्नत शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं के साथ जोड़ना है। इससे टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर सैन्य विमानों और एविएशन प्रणालियों का उच्चस्तरीय तकनीकी मूल्यांकन करने में सक्षम होंगे।
इस समझौते में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे?
समझौते के अवसर पर वायुसेना के सहायक प्रमुख (प्रोजेक्ट्स) एयर वाइस मार्शल आशीष श्रीवास्तव और आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे उपस्थित रहे।
यह पहल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
किसी भी नए सैन्य विमान या एविएशन सिस्टम को बेड़े में शामिल करने से पहले उड़ान परीक्षण प्रक्रिया अनिवार्य होती है। यह कार्यक्रम भारत को इस क्षेत्र में स्वायत्त बनाएगा और स्वदेशी मिलिट्री एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मज़बूत करेगा, जो रक्षा आत्मनिर्भरता के विजन का अहम हिस्सा है।
क्या आईआईटी संस्थान पहले भी सुरक्षा बलों के साथ काम कर चुके हैं?
हाँ, विभिन्न आईआईटी संस्थान सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण शोध व शैक्षणिक कार्यक्रम चला रहे हैं — सैन्य यूनिफॉर्म से लेकर आधुनिक रक्षा तकनीक तक। वायुसेना-आईआईटी बॉम्बे की यह साझेदारी उसी दिशा में एक नया और महत्वाकांक्षी अध्याय है।
राष्ट्र प्रेस
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