अलका लांबा दोषी करार: जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला, 5 जून को सजा पर बहस
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 25 मई 2026 को सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में दोषी ठहराया है। 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े इस मामले में अब 5 जून को सजा के प्रश्न पर सुनवाई होगी। यह फैसला कांग्रेस नेता के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी होने के बावजूद अलका लांबा ने 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का प्रदर्शन किया था। पुलिस के अनुसार, लांबा और उनके समर्थक टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड तक पहुँचे और नारेबाजी की।
मौके पर तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के ज़रिये निषेधाज्ञा की जानकारी दी और प्रदर्शन समाप्त करने की चेतावनी दी, किंतु पुलिस के अनुसार अलका लांबा और उनके समर्थक नहीं हटे।
आरोप और धाराएँ
अलका लांबा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 223 (A) और 285 के तहत मुकदमा दर्ज था। इन धाराओं में सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, काम में बाधा, कानूनी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ता रोकने के आरोप शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड पार किया और संसद मार्ग जाम कर दिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर एफआईआर दर्ज हुई।
अदालत का निष्कर्ष
20 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि अलका लांबा बलपूर्वक लोकसेवक को उसके कार्य में बाधा पहुँचा रही थीं। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। 25 मई 2026 को कोर्ट ने आरोपों में दोषी करार देते हुए सजा पर बहस के लिए 5 जून की तारीख नियत की।
राजनीतिक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन की माँग को लेकर विपक्षी दलों का आंदोलन चल रहा है। गौरतलब है कि अलका लांबा महिला आरक्षण की प्रमुख पैरोकार रही हैं और उनकी दोषसिद्धि इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस को नया आयाम दे सकती है।
आगे क्या होगा
5 जून 2026 को राऊज एवेन्यू कोर्ट में सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत दोषसिद्धि पर जुर्माने से लेकर कारावास तक की सजा हो सकती है। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है।