अलकायदा कश्मीर में युवाओं को भड़काने के लिए ईरान युद्ध का उपयोग कर रहा है
सारांश
Key Takeaways
- अलकायदा ईरान युद्ध का उपयोग कर कश्मीर में भर्ती बढ़ाना चाहता है।
- कश्मीर को जिहाद का मुख्य केंद्र बनाने की साजिश।
- युवाओं को धर्म को विकास से ऊपर रखने की सलाह।
- सुरक्षा एजेंसियां निगरानी रख रही हैं।
- अलगाववादी मानसिकता को फिर से जिंदा करने की कोशिश।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अलकायदा इन द सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष का उपयोग एक साजिश के तहत युवाओं को भड़काने के लिए कर रहा है। इसका उद्देश्य कश्मीर को जिहाद का मुख्य केंद्र बनाना है।
एक्यूआईएस इस संघर्ष को एक प्रचार की तरह पेश कर रहा है, ताकि जम्मू-कश्मीर में युवाओं की भर्ती को बढ़ावा मिल सके। इसने कई देशों के नामों का उल्लेख किया है, जिन्हें यह इस्लाम का विरोधी मानता है।
अलकायदा इन द सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) ने भारत, अमेरिका, इजरायल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों को इस्लाम का साझा दुश्मन घोषित करते हुए जम्मू-कश्मीर के युवाओं से एकजुट होने की अपील की है। संगठन का मानना है कि कश्मीर को जिहाद का मुख्य केंद्र बनाना चाहिए। युवाओं को एकजुट होकर कश्मीर से ही इन देशों के खिलाफ संघर्ष शुरू करना चाहिए।
एक्यूआईएस एक उर्दू प्रचार पत्रिका चलाता है और इसके मार्च अंक में यह बताया गया है कि कश्मीर के युवाओं को विकास से ज्यादा धर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए। संगठन ने यह भी व्यक्त किया कि जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाया, तब कश्मीर के लोगों ने पर्याप्त विरोध नहीं किया।
इसमें जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए केंद्र की कोशिशों का विवरण दिया गया है और कहा गया है कि युवाओं को भटकना नहीं चाहिए, यह नहीं भूलना चाहिए कि धर्म सबसे ऊपर है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि एक्यूआईएस 2014 में अपनी स्थापना के बाद से आगे बढ़ने में असफल रहा है। यह संगठन अफगानिस्तान में जम्मू-कश्मीर में संघर्ष छेड़ने के उद्देश्य से बनाया गया था।
यह संगठन मानता है कि गजवा-ए-हिंद (भारत को नष्ट करने की अवधारणा) की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होनी चाहिए। यह तालिबान का उदाहरण भी देता है, जिसने कई बार वैश्विक शक्तियों से संघर्ष किया। एक्यूआईएस का कहना है कि कश्मीर जिहाद का प्रवेश द्वार बनना चाहिए और यह आंदोलन पूरे भारत में फैलना चाहिए।
एक अधिकारी के अनुसार, एक्यूआईएस अब हताश हो गया है। इसने कई स्थानों पर अपने मॉड्यूल बनाए हैं, लेकिन अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। इसलिए यह ईरान के खिलाफ युद्ध को इस्लाम विरोधी अभियान के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, ताकि कश्मीर में नैरेटिव बदला जा सके और अधिक युवा हथियार उठाएं।
एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, एक्यूआईएस कश्मीर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाना चाहता है, लेकिन इसकी प्रचार पत्रिका से स्पष्ट है कि संगठन इस आंदोलन को पूरे भारत में फैलाना चाहता है।
अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी योजना को लागू करना मुश्किल होगा, लेकिन एक्यूआईएस लगातार प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य बार-बार प्रचार करके युवाओं के बीच इसे लोकप्रिय बनाना है।
सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि एक्यूआईएस अनुच्छेद 370 के मुद्दे को फिर से उभारने की कोशिश कर रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद एजेंसियों ने काफी प्रयास किए हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर में हिंसा न फैले।
कई वर्षों से कश्मीर में जारी अलगाववादी आंदोलन को रोकना बहुत जरूरी था। अधिकारियों के अनुसार, एक्यूआईएस अब कोशिश कर रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश में अलगाववादी मानसिकता फिर से लौट आए, इसलिए अनुच्छेद 370 की बहस को फिर से जीवित करने की कोशिश की जा रही है।
इन आतंकवादी संगठनों को अब समझ आ गया है कि पहले की तरह कश्मीर में आसानी से हमला करना और चरमपंथ को बढ़ाना अब संभव नहीं है। इसलिए घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें हो रही हैं।
जब ये प्रयास ज्यादा सफल नहीं हुए, तो अब झूठा प्रचार फैलाकर और अलगाववादी सोच को वापस लाकर माहौल बदलने की कोशिश की जा रही है, ऐसा अधिकारियों का कहना है।