अमरनाथ यात्रा 2026: 4.80 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन के बाद एलजी मनोज सिन्हा ने 'टीम जम्मू-कश्मीर' को किया सम्मानित
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 30 अगस्त 2026 को श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के सफल आयोजन में भूमिका निभाने वाले सभी विभागों, सुरक्षा बलों और सेवा प्रदाताओं को सम्मानित किया। 57 दिनों तक चली इस यात्रा में 4.80 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए — और यह उपलब्धि 10 दिनों से अधिक के प्रतिकूल मौसम के बावजूद हासिल की गई।
मुख्य घटनाक्रम
सम्मान समारोह में उपराज्यपाल ने श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड, सिविल प्रशासन, सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीमा सड़क संगठन, चिकित्सा कर्मियों और अन्य हितधारकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने घोड़ा संचालकों, पिट्ठू सेवा प्रदाताओं, पालकी वाहकों, लंगर स्वयंसेवकों और सफाई कर्मियों को भी विशेष रूप से धन्यवाद दिया।
मनोज सिन्हा ने कहा, 'अमरनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प, सेवा भावना और समर्पण का प्रतीक है, जिसने कठिनाइयों को कर्तव्य और चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।'
यात्रा के आँकड़े
यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक चली। आँकड़ों के अनुसार, 82 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने पहले 20 दिनों में ही दर्शन कर लिए, जबकि 95 प्रतिशत यात्रियों ने पहले महीने के भीतर यात्रा पूरी की। कुल 54,000 सेवा प्रदाताओं का पंजीकरण हुआ — जिनमें 31,000 घोड़ा संचालक, पिट्ठू और पालकी वाहक, 6,400 टेंट व दुकान संचालक तथा 7,700 लंगर स्वयंसेवक शामिल थे। करीब 1.87 लाख श्रद्धालुओं ने घोड़ा और पालकी सेवाओं का उपयोग किया।
स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था
यात्रा मार्ग पर 93 चिकित्सा सुविधाएँ, 595 क्लीनिकल बेड और 26 ऑक्सीजन बूथ स्थापित किए गए। 1,430 डॉक्टर और नर्सिंग कर्मी चौबीसों घंटे तैनात रहे और 48 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गईं। स्वच्छता के लिए 7,900 शौचालय और उतने ही सफाई कर्मी लगाए गए — यह व्यवस्था 'जीरो-वेस्ट यात्रा' पहल का हिस्सा थी।
प्रशासनिक समन्वय
श्राइन बोर्ड के सीईओ एवं उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मनदीप के. भंडारी की अगुवाई में प्रतिदिन सुबह 3 बजे और रात 8 बजे समन्वय बैठकें आयोजित की गईं, जिससे यात्रा की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित हुई। आधार-आधारित पंजीकरण व्यवस्था के ज़रिए डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन पर भी नियंत्रण पाया गया। यात्रा क्षेत्र में क्षमता बढ़ाकर 63,000 और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में 54,000 तक की गई।
आगे की राह
उपराज्यपाल ने नागरिक समाज संगठनों, राजनीतिक दलों और धार्मिक नेताओं का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान प्रदर्शित अनुशासन, ऊर्जा और समन्वय को जम्मू-कश्मीर के विकास मॉडल का स्थायी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सिन्हा ने विश्वास जताया कि केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक नागरिक ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यात्रा की सफलता में योगदान दिया है।