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अमरनाथ यात्रा 2025: जम्मू के श्रीराम मंदिर से साधु-संतों का जत्था रवाना, बाबा बर्फानी के जयकारों से गूंजा माहौल

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अमरनाथ यात्रा 2025: जम्मू के श्रीराम मंदिर से साधु-संतों का जत्था रवाना, बाबा बर्फानी के जयकारों से गूंजा माहौल

सारांश

जम्मू के श्रीराम मंदिर से 2 जुलाई को साधु-संतों का जत्था बाबा बर्फानी के जयकारों के साथ अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। 32 साल से यात्रा कर रहे संतों से लेकर पहली बार आए श्रद्धालुओं तक — सभी ने प्रशासन और सेना की व्यवस्थाओं की सराहना की।

मुख्य बातें

जम्मू की पुरानी मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से 2 जुलाई को साधु-संतों का जत्था अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ।
एक संत ने बताया कि वे पिछले 32 वर्षों से लगातार अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं।
जबलपुर, मध्य प्रदेश से आए एक संत की यह तीसरी अमरनाथ यात्रा है।
बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
यात्रा मार्ग पर सेना और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

जम्मू की पुरानी मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से गुरुवार, 2 जुलाई को साधु-संतों का एक बड़ा जत्था पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। प्रस्थान से पूर्व श्रद्धालुओं और संतों ने बाबा बर्फानी के जयकारे लगाए तथा सुखद एवं सुरक्षित यात्रा की मंगलकामना की। पूरे जम्मू क्षेत्र में इस अवसर पर गहरा भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।

श्रद्धालुओं का उत्साह और पहली यात्रा का अनुभव

पहली बार अमरनाथ यात्रा पर निकले एक संत ने बताया कि उन्हें बाबा अमरनाथ के दर्शन का यह पहला अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा, 'संतों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और हर साल इसी समर्पण के साथ सेवा की जाती है।' इसी प्रकार, पहली बार यात्रा पर आए एक श्रद्धालु ने प्रशासन और सेना के सहयोग की सराहना करते हुए कहा, 'श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और जो सहयोग मिल रहा है, वह बेहद सराहनीय है।'

32 वर्षों की अटूट आस्था

एक अन्य संत ने बताया कि वे पिछले 32 वर्षों से लगातार अमरनाथ यात्रा करते आ रहे हैं। उनके अनुसार इस बार सरकार ने यात्रियों के लिए विशेष रूप से बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो गई है। यह आस्था का वह निरंतर प्रवाह है जो दशकों से इस तीर्थ को जीवंत बनाए हुए है।

देशभर से पहुंचे संत और श्रद्धालु

मध्य प्रदेश के जबलपुर से आए एक संत ने बताया कि यह उनकी तीसरी अमरनाथ यात्रा है। उन्होंने कहा, 'मैं बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लेने आया हूं। सरकार ने शानदार तैयारियां की हैं और सभी व्यवस्थाएं बेहद अच्छी हैं।' देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस यात्रा की राष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित करती है।

आध्यात्मिक परंपरा और कैलाश यात्रा का संदर्भ

एक संत ने अमरनाथ यात्रा को एक व्यापक आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि यह उनकी 'कैलाश यात्रा' का पहला चरण है, जिसका अंतिम चरण जम्मू के हरमुख कैलाश में पूर्ण होगा। उन्होंने बताया कि यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सहज तरीके से बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर हर स्तर पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सेना और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से यात्रा को सुचारु बनाए रखा जा रहा है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि देशभर से तीर्थयात्री जम्मू पहुंच रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जम्मू-कश्मीर की सामाजिक-राजनीतिक स्थिरता का एक अनौपचारिक मापदंड भी बन चुकी है। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और उत्साह जहाँ सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसे को दर्शाता है, वहीं यह सवाल भी उठता है कि दिव्यांग और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए की गई सुविधाओं की निरंतरता कितनी टिकाऊ है। 32 वर्षों से यात्रा कर रहे संतों की उपस्थिति यह भी बताती है कि इस तीर्थ की आस्था किसी भी राजनीतिक उथल-पुथल से परे है — लेकिन प्रशासनिक प्रबंधन की गुणवत्ता ही तय करेगी कि यह विश्वास आने वाले वर्षों में भी बना रहे।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा 2025 में साधु-संत कहाँ से रवाना हुए?
साधु-संतों का जत्था जम्मू की पुरानी मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से 2 जुलाई को अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। रवानगी से पूर्व बाबा बर्फानी के जयकारे लगाए गए और सुखद यात्रा की कामना की गई।
अमरनाथ यात्रा 2025 में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं?
यात्रा मार्ग पर सेना और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन और सेना के जवानों के सहयोग की सराहना की है।
क्या बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं हैं?
हाँ, इस बार सरकार ने बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है। एक वरिष्ठ संत ने इसे पिछले 32 वर्षों की यात्राओं में सबसे बेहतर व्यवस्था बताया।
अमरनाथ यात्रा को 'कैलाश यात्रा' से कैसे जोड़ा जाता है?
एक संत के अनुसार अमरनाथ यात्रा उनकी 'कैलाश यात्रा' का पहला चरण है, जिसका अंतिम चरण जम्मू के हरमुख कैलाश में पूर्ण होता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में कहाँ-कहाँ से श्रद्धालु पहुंचे हैं?
देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु जम्मू पहुंचे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर से आए एक संत ने बताया कि यह उनकी तीसरी अमरनाथ यात्रा है।
राष्ट्र प्रेस
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