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मिजोरम में एंबुलेंस से ₹45 करोड़ की मेथामफेटामाइन तस्करी, महिला समेत 3 गिरफ्तार

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मिजोरम में एंबुलेंस से ₹45 करोड़ की मेथामफेटामाइन तस्करी, महिला समेत 3 गिरफ्तार

सारांश

एंबुलेंस में मरीज बनकर बैठी महिला और दो साथी — मिजोरम में तस्करों ने आपातकालीन वाहन को ढाल बनाकर ₹45 करोड़ की मेथामफेटामाइन पहुँचाने की कोशिश की। असम राइफल्स और DRI की संयुक्त कार्रवाई ने इस योजना को नाकाम कर दिया, लेकिन म्यांमार सीमा से जुड़े व्यापक नेटवर्क की जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

असम राइफल्स और DRI की संयुक्त टीम ने 7 अगस्त 2026 को आइजोल, मिजोरम में एंबुलेंस से ₹45 करोड़ की मेथामफेटामाइन बरामद की।
जब्त मादक पदार्थ की मात्रा करीब 15 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट है।
गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला शामिल है, जो मरीज बनकर एंबुलेंस में बैठी थी।
मामला NDPS अधिनियम के तहत दर्ज; जब्त एंबुलेंस और आरोपी DRI, आइजोल को सौंपे गए।
मिजोरम की म्यांमार से 510 किमी और बांग्लादेश से 318 किमी की खुली सीमा इसे ड्रग तस्करी का संवेदनशील ट्रांजिट रूट बनाती है।

मिजोरम के आइजोल जिले में असम राइफल्स और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की संयुक्त टीम ने 7 अगस्त 2026 को एंबुलेंस की आड़ में हो रही बड़े पैमाने की ड्रग तस्करी का भंडाफोड़ किया। सुरक्षा बलों ने एक मारुति सुजुकी ईको एंबुलेंस से करीब 15 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद कीं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाज़ार में अनुमानित कीमत ₹45 करोड़ बताई गई है। इस कार्रवाई में एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कैसे हुआ भंडाफोड़

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष खुफिया सूचना के आधार पर की गई। संयुक्त टीम ने आइजोल जिले के सेलिंग क्षेत्र स्थित साकेई बंगला रेस्तरां के पास संदिग्ध एंबुलेंस को रोककर गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन में भारी मात्रा में मेथामफेटामाइन टैबलेट का जखीरा मिला।

प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि तस्करों ने सुरक्षाकर्मियों की नज़र से बचने के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल किया था। वाहन में मौजूद एक महिला जानबूझकर मरीज बनकर बैठी थी, ताकि जाँच चौकियों पर किसी को संदेह न हो। तीनों आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर एंबुलेंस भी जब्त कर ली गई।

कानूनी कार्रवाई और जाँच

बरामद मादक पदार्थ, गिरफ्तार आरोपी और जब्त वाहन को आगे की जाँच एवं कानूनी कार्रवाई के लिए DRI, आइजोल को सौंप दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के विरुद्ध NDPS (मादक द्रव्य एवं मन:प्रभावी पदार्थ) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। जाँच में यह पता लगाया जा रहा है कि यह खेप कहाँ से लाई गई, इसे कहाँ पहुँचाया जाना था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

मिजोरम: सिंथेटिक ड्रग्स का संवेदनशील ट्रांजिट कॉरिडोर

अधिकारियों ने बताया कि मिजोरम, म्यांमार से लगी 510 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा और बांग्लादेश से लगती 318 किलोमीटर की सीमा के कारण पूर्वोत्तर भारत में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी का प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर बनता जा रहा है। यह भौगोलिक स्थिति राज्य को मादक पदार्थों, हथियारों और अन्य प्रतिबंधित सामान की तस्करी के लिए विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है।

तस्करों के बदलते तौर-तरीके

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहन का इस्तेमाल ड्रग तस्करी के लिए करना तस्करी गिरोहों के अधिक संगठित और परिष्कृत होते तरीकों को उजागर करता है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों की सतर्कता बढ़ाई गई है, फिर भी तस्कर नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। फिलहाल जाँच जारी है और व्यापक नेटवर्क की पहचान की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बाड़बंदी और निगरानी तंत्र की प्रगति सवालों के घेरे में है। असली परीक्षा यह है कि क्या DRI और असम राइफल्स इस एकल बरामदगी से आगे जाकर व्यापक नेटवर्क को तोड़ पाते हैं — अन्यथा यह कार्रवाई एक और सांख्यिकीय सफलता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिजोरम एंबुलेंस ड्रग तस्करी मामले में क्या हुआ?
असम राइफल्स और DRI की संयुक्त टीम ने 7 अगस्त 2026 को आइजोल के सेलिंग क्षेत्र में एक मारुति सुजुकी ईको एंबुलेंस से करीब 15 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद कीं, जिनकी कीमत ₹45 करोड़ आँकी गई है। एक महिला समेत तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
तस्करों ने एंबुलेंस का इस्तेमाल क्यों किया?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार, तस्करों ने जाँच चौकियों पर संदेह से बचने के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल किया। वाहन में एक महिला जानबूझकर मरीज बनकर बैठी थी, ताकि सुरक्षाकर्मी वाहन को आपातकालीन मानकर जाने दें।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
तीनों आरोपियों के विरुद्ध NDPS (मादक द्रव्य एवं मन:प्रभावी पदार्थ) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। बरामद ड्रग्स, जब्त एंबुलेंस और आरोपियों को आगे की जाँच के लिए DRI, आइजोल को सौंप दिया गया है।
मिजोरम ड्रग तस्करी के लिए इतना संवेदनशील क्यों है?
मिजोरम की म्यांमार से 510 किलोमीटर और बांग्लादेश से 318 किलोमीटर की खुली, बिना बाड़ वाली सीमा इसे पूर्वोत्तर भारत में सिंथेटिक ड्रग्स का प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर बनाती है। यह भौगोलिक स्थिति मादक पदार्थों के अलावा हथियारों और अन्य प्रतिबंधित सामान की तस्करी के लिए भी इस्तेमाल होती है।
इस मामले में जाँच कहाँ तक पहुँची है?
जाँच अभी जारी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि खेप कहाँ से लाई गई, इसे कहाँ पहुँचाया जाना था और इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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