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भारतीय नागरिकों की मौत पर अमेरिका से जवाब नहीं माँग सकी सरकार: सुप्रिया श्रीनेत का हमला

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भारतीय नागरिकों की मौत पर अमेरिका से जवाब नहीं माँग सकी सरकार: सुप्रिया श्रीनेत का हमला

सारांश

अमेरिका-ईरान संघर्ष में तीन भारतीय नागरिकों की मौत और शांति वार्ता में भारत की अनुपस्थिति — कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इन दो मुद्दों को आधार बनाकर मोदी सरकार की विदेश नीति पर सबसे तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि सरकार न शोक जता सकी, न जवाब माँग सकी।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 15 जून को मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में कथित तौर पर आदित्य शर्मा , पटनायक और सुरेश चौरसिया — 3 भारतीय नागरिकों की मौत का आरोप।
श्रीनेत का दावा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कोई खेद व्यक्त नहीं किया, सरकार प्रभावी दबाव बनाने में विफल।
अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया में भारत की भागीदारी नदारद, जबकि पाकिस्तान की भूमिका की चर्चा।
देवयानी खोबरागड़े प्रकरण का हवाला देते हुए पूर्व सरकारों के कड़े रुख से तुलना।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 15 जून को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद मोदी सरकार अमेरिका को जवाबदेह ठहराने में पूरी तरह विफल रही। उन्होंने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि युद्ध की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिक, महिलाएँ और बच्चे चुकाते हैं।

तीन भारतीय नागरिकों की मौत और सरकार की चुप्पी

श्रीनेत ने आरोप लगाया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान हुए हमलों में आदित्य शर्मा, पटनायक और सुरेश चौरसिया सहित तीन भारतीय नागरिकों की जान गई। उनके अनुसार, ये मौतें कथित तौर पर अमेरिकी कार्रवाई के कारण हुईं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने न तो इन मौतों पर शोक व्यक्त किया और न ही पीड़ित परिवारों के प्रति कोई संवेदना जताई।

श्रीनेत ने यह भी कहा कि जब यह मुद्दा अमेरिका के समक्ष उठाया गया, तब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से कोई खेद तक व्यक्त नहीं किया गया। उनके अनुसार, भारत सरकार इस मामले में प्रभावी कूटनीतिक दबाव बनाने में असफल रही।

शांति प्रक्रिया में भारत की अनुपस्थिति पर सवाल

कांग्रेस नेता ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते में भारत की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति होने के बावजूद इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में कहीं दिखाई नहीं दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान जैसे देश की इस प्रक्रिया में भूमिका की चर्चा हो रही है। श्रीनेत ने पूछा कि आखिर इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल में भारत की भागीदारी क्यों नहीं रही।

पूर्व प्रधानमंत्रियों से तुलना

श्रीनेत ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किसी महाशक्ति के प्रभाव में आए बिना स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव के बावजूद राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े प्रकरण का भी उल्लेख किया और कहा कि उस समय भारत ने कड़ा रुख अपनाया था, जिसके बाद अमेरिका को खेद व्यक्त करना पड़ा। गौरतलब है कि यह तुलना मौजूदा सरकार की कथित नरमी को रेखांकित करने के लिए की गई।

विदेश नीति में आत्मसम्मान की माँग

श्रीनेत ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्रियों ने हमेशा देश की संप्रभुता और सम्मान को सर्वोपरि रखा, जबकि मौजूदा सरकार अमेरिका के प्रति आवश्यकता से अधिक नरम रुख अपना रही है। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति में आत्मसम्मान और स्वतंत्रता सर्वोच्च होनी चाहिए।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद भारत की कूटनीतिक स्थिति और उसकी वैश्विक भूमिका पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक असुविधाजनक सवाल है — क्या भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति अब केवल कागज़ पर है? तीन नागरिकों की मौत पर सार्वजनिक शोक और कूटनीतिक जवाबदेही का अभाव, यदि सत्य है, तो यह महज़ राजनीतिक चूक नहीं — यह राष्ट्रीय गरिमा का प्रश्न है। देवयानी खोबरागड़े प्रकरण की तुलना सटीक इसलिए है क्योंकि उस समय भारत ने अमेरिकी राजनयिक सुविधाएँ तक वापस लीं। आज की चुप्पी उस मिसाल के विपरीत दिखती है और मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को पर्याप्त रेखांकित नहीं कर रही।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद मोदी सरकार अमेरिका को जवाबदेह ठहराने और प्रभावी कूटनीतिक दबाव बनाने में विफल रही। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति कोई संवेदना नहीं जताई।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में कौन से भारतीय नागरिक मारे गए?
श्रीनेत के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान हुए हमलों में कथित तौर पर आदित्य शर्मा, पटनायक और सुरेश चौरसिया की मौत हुई। उनका दावा है कि ये मौतें अमेरिकी कार्रवाई के कारण हुईं।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते में भारत की भूमिका क्यों नहीं रही?
श्रीनेत ने सवाल उठाया कि भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति होने के बावजूद इस शांति प्रक्रिया में अनुपस्थित रहा, जबकि पाकिस्तान जैसे देश की भूमिका की चर्चा हो रही है। उन्होंने इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता बताया।
देवयानी खोबरागड़े प्रकरण का इस विवाद से क्या संबंध है?
श्रीनेत ने डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए देवयानी खोबरागड़े प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारत ने अमेरिका के प्रति कड़ा रुख अपनाया था और अमेरिका को खेद व्यक्त करना पड़ा था। वे इसकी तुलना मौजूदा सरकार की कथित चुप्पी से कर रही थीं।
कांग्रेस के अनुसार भारत की विदेश नीति में क्या बदलाव होना चाहिए?
कांग्रेस नेता श्रीनेत का कहना है कि भारत की विदेश नीति में आत्मसम्मान और स्वतंत्रता सर्वोच्च होनी चाहिए, जैसा कि नेहरू और इंदिरा गांधी के कार्यकाल में था। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार अमेरिका के प्रति आवश्यकता से अधिक नरम रुख अपना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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