अमित शाह ने दिल्ली झुग्गी पुनर्वास नीति-2026 को अंतिम रूप दिया, 1 जनवरी 2027 तक घर देने का वादा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बुधवार, 17 जून 2026 को नई दिल्ली में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में 'दिल्ली स्लम और जेजे क्लस्टर पुनर्वास और पुनर्स्थापना नीति-2026' को अंतिम रूप दे दिया गया। दिल्ली के गृह और शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इस फैसले की जानकारी देते हुए इसे लाखों परिवारों के जीवन में बदलाव लाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
नीति में क्या है खास
मंत्री सूद ने बताया कि इस नीति के तहत 'जहाँ झुग्गी, वहीं घर' के सिद्धांत पर काम किया जाएगा — यानी जो परिवार जिस इलाके में झुग्गी में रह रहे हैं, उन्हें उसी स्थान पर पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 1 जनवरी 2027 तक यह प्रक्रिया शुरू हो जाए।
इसके अतिरिक्त, हर महीने कम से कम 5 पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) आधारित पुनर्वास परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। पुनर्वास कॉलोनियों में आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और खेल के मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करना भी इस नीति का हिस्सा है।
बैठक में कौन-कौन शामिल थे
इस समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी उपस्थित थीं। मंत्री सूद ने कहा कि यह पूरा कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत' के विज़न का हिस्सा है।
सरकार की प्रतिक्रिया और प्रतिबद्धता
मंत्री सूद ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दिल्ली की झुग्गियों और जेजे क्लस्टर में रहने वाले लाखों परिवारों को सम्मानजनक घर देने की दिशा में आज एक अहम फैसला लिया गया।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली की भाजपा सरकार इस नीति को जल्द अधिसूचित करेगी ताकि पुनर्वास कार्य में तेज़ी आए।
सूद ने आगे कहा, 'विकसित दिल्ली में किसी को भी झुग्गियों में नहीं रहना पड़ेगा।' उन्होंने गृह मंत्री शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगले 45 दिनों में 5 झुग्गी क्लस्टरों में इस नीति पर अमल शुरू किया जाएगा।
आम जनता पर असर
दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों और जेजे क्लस्टरों में रहने वाले लाखों परिवार इस नीति के सीधे लाभार्थी होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में अनधिकृत बस्तियों और पुनर्वास की समस्या दशकों से राजनीतिक बहस का केंद्र रही है। गौरतलब है कि पिछली सरकारों ने भी इसी तरह की घोषणाएँ की थीं, लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन की गति धीमी रही।
आगे क्या होगा
नीति के अधिसूचित होने के बाद पहले चरण में 5 झुग्गी क्लस्टरों में काम शुरू होगा। पीपीपी मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से निर्माण कार्य में तेज़ी लाने की योजना है। सरकार का कहना है कि पुनर्वास कॉलोनियाँ केवल मकान तक सीमित नहीं होंगी, बल्कि वहाँ सामाजिक बुनियादी ढाँचा भी विकसित किया जाएगा।