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रामचंद्र गुहा के लेख पर आनंद दुबे का पलटवार: राहुल गांधी ने भाजपा को 240 सीटों पर रोका

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रामचंद्र गुहा के लेख पर आनंद दुबे का पलटवार: राहुल गांधी ने भाजपा को 240 सीटों पर रोका

सारांश

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कांग्रेस को कमज़ोर विपक्ष बताया तो शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने पलटवार किया — राहुल गांधी ने भाजपा को 240 सीटों पर रोका, यह कम उपलब्धि नहीं। INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व की यह बहस आने वाले चुनावों की दिशा तय करेगी।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने इतिहासकार रामचंद्र गुहा के लेख पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
गुहा ने अपने लेख में कहा था कि गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रभावी विपक्ष निभाने में विफल रही, जिससे BJP को फायदा मिला।
दुबे ने कहा कि राहुल गांधी ने 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटों पर सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई।
भारत जोड़ो यात्रा और विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता का हवाला दिया गया।
पश्चिम बंगाल में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर दुबे ने राजनीतिक हिंसा पर गहरी चिंता जताई।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इतिहासकार रामचंद्र गुहा के उस लेख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें गुहा ने यह तर्क दिया था कि गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रही और इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपनी राजनीतिक स्थिति मज़बूत करने में मदद मिली। दुबे ने न केवल गांधी परिवार के नेतृत्व का बचाव किया, बल्कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर भी गहरी चिंता जताई।

गुहा के लेख में क्या था

रामचंद्र गुहा ने अपने लेख — जिसका शीर्षक था 'गांधी परिवार ने PM मोदी की सत्ता को और मज़बूत करने में कैसे भूमिका निभाई' — में राहुल गांधी की राजनीतिक शैली, निरंतरता और प्रशासनिक अनुभव पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि कांग्रेस के कमज़ोर विपक्षी प्रदर्शन ने BJP को अपनी पकड़ मज़बूत करने का अवसर दिया। यह लेख राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा का विषय बना।

आनंद दुबे का पक्ष

आनंद दुबे ने कहा कि वे रामचंद्र गुहा का गहरा सम्मान करते हैं, लेकिन इतिहास केवल एक दिशा में नहीं चलता — वह दोहराता भी है और बदलता भी है। उन्होंने गांधी परिवार की लोकतांत्रिक स्वीकार्यता का हवाला देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी की लोकप्रियता पूरे देश ने देखी है।

दुबे ने यह भी रेखांकित किया कि राहुल गांधी कई बार सांसद चुने जा चुके हैं, प्रियंका गांधी भी संसद पहुँची हैं और सोनिया गांधी बार-बार जनता का विश्वास जीत चुकी हैं। उनके अनुसार, इन तथ्यों के आधार पर यह दावा करना उचित नहीं होगा कि गांधी परिवार के नेतृत्व को जनता की स्वीकृति नहीं मिलती। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक ताकत और अधिक मज़बूत करने की ज़रूरत है।

राहुल गांधी की भूमिका पर ज़ोर

दुबे ने भारत जोड़ो यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने इस पदयात्रा के ज़रिये देश में प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाया। उन्होंने राहुल गांधी के उस कथन को दोहराया जिसमें वे कहते हैं कि वे 'नफरत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान खोलने आए हैं।' दुबे ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटों पर सीमित रखने में निर्णायक भूमिका निभाई और विपक्ष के नेता के रूप में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी का प्रधानमंत्री न बन पाना उसकी अयोग्यता का प्रमाण नहीं है — हर नेता का अपना समय होता है। इसी संदर्भ में उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी, लेकिन उसे सत्ता तक पहुँचने में लंबा इंतज़ार करना पड़ा।

अभिषेक बनर्जी पर हमला और राजनीतिक हिंसा

पश्चिम बंगाल में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर दुबे ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब देश में एक निर्वाचित सांसद ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सुशासन का दावा करती थी, लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद हिंसा की घटनाएँ सामने आने लगी हैं।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

गुहा-दुबे विवाद यह दर्शाता है कि विपक्षी खेमे के भीतर भी कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बहस जारी है। शिवसेना (यूबीटी) जैसे सहयोगी दलों का गांधी परिवार के पक्ष में खड़ा होना INDIA गठबंधन की एकजुटता के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले राज्य चुनावों में यह बहस और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तथ्य भी उतना ही सच है कि कांग्रेस 400 से अधिक सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा को 240 पर रोक पाई — खुद 99 सीटों पर सिमट कर। असली सवाल यह है कि क्या गठबंधन की जीत को एक परिवार की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित है। INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व की यह बहस बाहरी आलोचना से ज़्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगले चुनाव में एकजुटता ही विपक्ष की असली ताकत होगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामचंद्र गुहा ने राहुल गांधी के बारे में क्या लिखा था?
रामचंद्र गुहा ने अपने लेख में तर्क दिया कि गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में असफल रही, जिससे भाजपा को अपनी राजनीतिक स्थिति मज़बूत करने में मदद मिली। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली, निरंतरता और प्रशासनिक अनुभव पर भी सवाल उठाए।
आनंद दुबे ने गुहा के लेख का जवाब कैसे दिया?
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि राहुल गांधी ने 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटों पर रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गांधी परिवार की लोकतांत्रिक स्वीकार्यता का हवाला देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी की लोकप्रियता पूरे देश ने देखी है।
क्या आनंद दुबे ने कांग्रेस की कमज़ोरी स्वीकार की?
हाँ, आनंद दुबे ने यह माना कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक ताकत और अधिक मज़बूत करने की ज़रूरत है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि गांधी परिवार की जनस्वीकार्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं, क्योंकि परिवार के कई सदस्य बार-बार चुनाव जीत चुके हैं।
अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर दुबे ने क्या कहा?
आनंद दुबे ने पश्चिम बंगाल में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब एक निर्वाचित सांसद ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
भारत जोड़ो यात्रा का इस विवाद में क्या महत्व है?
दुबे ने भारत जोड़ो यात्रा को राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता और जनसंपर्क का प्रमाण बताया। उनके अनुसार, इस यात्रा ने देश में प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाया और राहुल गांधी को विपक्ष के एक प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित किया।
राष्ट्र प्रेस
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