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स्वर्णांध्र विजन 2047: आंध्र प्रदेश सरकार का 15% ग्रोथ लक्ष्य, IFMR के साथ अहम समझौता

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स्वर्णांध्र विजन 2047: आंध्र प्रदेश सरकार का 15% ग्रोथ लक्ष्य, IFMR के साथ अहम समझौता

सारांश

आंध्र प्रदेश ने 2047 तक 15% विकास दर का दांव खेला है — IFMR के साथ MoU और 10 सूत्रीय एजेंडे के ज़रिये। CM नायडू का यह कदम राज्य को डीप टेक, जीरो पॉवर्टी और वॉटर सिक्योरिटी मिशनों के साथ राष्ट्रीय विकास दौड़ में अग्रिम पंक्ति में लाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश सरकार ने 22 जून 2026 को IFMR के साथ 'स्वर्णांध्र विजन 2047' के तहत MoU पर हस्ताक्षर किए।
लक्ष्य: 15 प्रतिशत वार्षिक विकास दर ; वर्तमान दर लगभग 11 प्रतिशत , जबकि 2014-19 में 13.5% CAGR दर्ज था।
IFMR 10 प्रमुख सिद्धांतों के क्रियान्वयन और 'मिशन सेल' की स्थापना की निगरानी करेगा।
प्रमुख मिशनों में जीरो पॉवर्टी , वॉटर सिक्योरिटी और डीप टेक मिशन शामिल।
राज्य में एआई, क्वांटम टेक, सेमीकंडक्टर, डिफेंस क्षेत्रों में परियोजनाएँ सक्रिय।
वित्त मंत्री पय्यावुला केशव और KREA-IFMR के प्रतिनिधि समारोह में उपस्थित रहे।

आंध्र प्रदेश सरकार ने 22 जून 2026 को अमरावती स्थित राज्य सचिवालय में 'स्वर्णांध्र विजन 2047' के तहत 15 प्रतिशत वार्षिक विकास दर हासिल करने के लिए इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट एंड रिसर्च (IFMR) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में संपन्न इस समझौते को राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का केंद्रबिंदु माना जा रहा है।

समझौते का मूल उद्देश्य

राज्य योजना विभाग के प्रमुख सचिव पियूष कुमार और IFMR की ओर से कपिल विश्वनाथन ने समझौता दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया। इस MoU का मुख्य उद्देश्य विजन के लक्ष्यों को साकार करने के लिए 10 प्रमुख सिद्धांतों को व्यावहारिक धरातल पर उतारना है। IFMR इन सिद्धांतों पर आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा और एक 'मिशन सेल' की स्थापना में सहयोग देगा, जिसका लक्ष्य राज्य की जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) और विकास दर को ऊपर ले जाना है।

मुख्यमंत्री नायडू का विकास दर पर बयान

मुख्यमंत्री नायडू ने कार्यक्रम में कहा कि 2014 से 2019 के बीच राज्य ने 13.5 प्रतिशत कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया था। उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न कारणों से वर्तमान विकास दर घटकर लगभग 11 प्रतिशत रह गई है और नए विजन के तहत इसे 15 प्रतिशत तक पहुँचाना लक्ष्य है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य अपनी पुनर्निर्मित राजधानी अमरावती के विकास को गति देने में जुटा है।

प्रमुख मिशन और क्षेत्र

IFMR राज्य सरकार के साथ मिलकर जीरो पॉवर्टी मिशन, वॉटर सिक्योरिटी मिशन और डीप टेक मिशन जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों पर काम करेगा। इनके अंतर्गत फील्ड स्टडी, नीतिगत सुझाव और नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी। गौरतलब है कि राज्य स्तर पर एक समिति के साथ-साथ 'मिशन वर्किंग ग्रुप्स' भी गठित किए जाएंगे, जो 10 सूत्रीय एजेंडे को लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

नायडू ने बताया कि आंध्र प्रदेश में एआई स्किलिंग, ड्रोन मैपिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल, स्टील, रेयर अर्थ मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और डिफेंस क्षेत्रों में परियोजनाएँ पहले से सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य में एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है — जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत आक्रामक तकनीकी नीति का संकेत है।

कार्यक्रम में कौन रहे उपस्थित

इस समझौता समारोह में वित्त मंत्री पय्यावुला केशव, KREA विश्वविद्यालय और IFMR के प्रतिनिधि तथा योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। IFMR, KREA विश्वविद्यालय से संबद्ध एक प्रतिष्ठित शोध संस्थान है, जो नीति-अनुसंधान और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

आगे की राह

विश्लेषकों के अनुसार, 15 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसे हासिल करने के लिए निवेश आकर्षण, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और कुशल जनशक्ति — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। मिशन वर्किंग ग्रुप्स की रूपरेखा और 10 सिद्धांतों का विस्तृत खाका आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आंध्र प्रदेश की मौजूदा 11 प्रतिशत दर और 2014-19 के 13.5% CAGR के बीच की खाई यह सवाल उठाती है कि क्या IFMR जैसे शोध संस्थान की साझेदारी अकेले इस अंतर को पाट सकती है। राज्य विभाजन के बाद के वर्षों में आंध्र प्रदेश पहले भी महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्य घोषित कर चुका है, और उनकी क्रियान्वयन गति हमेशा घोषणाओं जितनी तेज़ नहीं रही। 10 सूत्रीय एजेंडे और मिशन वर्किंग ग्रुप्स की संरचना अभी सार्वजनिक नहीं हुई है — जब तक यह विवरण सामने नहीं आता, यह समझौता एक नीतिगत इरादे से अधिक कुछ नहीं है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वर्णांध्र विजन 2047 क्या है?
स्वर्णांध्र विजन 2047 आंध्र प्रदेश सरकार की दीर्घकालिक विकास रणनीति है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2047 तक राज्य को 15 प्रतिशत वार्षिक विकास दर के साथ एक समृद्ध और तकनीकी रूप से उन्नत राज्य बनाना है। इसके तहत जीरो पॉवर्टी, वॉटर सिक्योरिटी और डीप टेक जैसे मिशन शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश और IFMR के बीच समझौते का उद्देश्य क्या है?
इस MoU के तहत IFMR राज्य के 10 प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा और 'मिशन सेल' स्थापित करने में सहयोग देगा। संस्थान फील्ड स्टडी, नीतिगत सुझाव और नवाचार के ज़रिये राज्य की जीएसडीपी बढ़ाने में मदद करेगा।
आंध्र प्रदेश की मौजूदा विकास दर क्या है और लक्ष्य कितना है?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अनुसार, राज्य की वर्तमान विकास दर लगभग 11 प्रतिशत है। स्वर्णांध्र विजन 2047 के तहत इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 2014-19 के बीच 13.5 प्रतिशत CAGR दर्ज किया गया था।
इस विजन के तहत आंध्र प्रदेश में कौन-से क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा?
राज्य में एआई स्किलिंग, ड्रोन मैपिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल, स्टील, रेयर अर्थ मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और डिफेंस क्षेत्रों में परियोजनाएँ पहले से चल रही हैं। इसके अलावा एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की योजना है।
मिशन वर्किंग ग्रुप्स क्या होंगे?
मिशन वर्किंग ग्रुप्स राज्य स्तरीय समितियाँ होंगी जो 10 सूत्रीय एजेंडे को धरातल पर लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगी। इनका गठन IFMR के सहयोग से किया जाएगा और ये जीरो पॉवर्टी, वॉटर सिक्योरिटी तथा डीप टेक जैसे मिशनों पर केंद्रित रहेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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