31 अक्टूबर 2026
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असीम अरुण का तीखा हमला: 'सपा राज में माफिया राज था, अब योगी सरकार में कानून का राज है'

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असीम अरुण का तीखा हमला: 'सपा राज में माफिया राज था, अब योगी सरकार में कानून का राज है'

सारांश

यूपी के मंत्री असीम अरुण और भाजपा प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर एक साथ दो मोर्चों पर हमला बोला — सपा के शासनकाल की कानून-व्यवस्था और चुनाव आयोग पर उनके आरोप। 2027 के चुनावी मौसम में यह भाजपा की रणनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा दिखता है।

मुख्य बातें

मंत्री असीम अरुण ने 31 अक्टूबर 2026 को कहा कि सपा शासन में माफिया राज था और अब योगी सरकार में कानून का राज है।
अखिलेश यादव के चुनाव आयोग पर आरोपों को 'बेतुका और आधारहीन' बताया गया; देश में करीब 22 साल बाद SIR हो रहा है।
अंकुश त्रिपाठी ने माँग की कि सपा 2012–2017 शासनकाल पर श्वेतपत्र जारी करे; कथित तौर पर उस दौर में करीब एक हज़ार दंगे हुए।
भाजपा ने दावा किया कि 2027 विधानसभा चुनाव में जनता सपा को हराने को तैयार है।
सपा पर राम मंदिर विरोध के इतिहास और 'सनातन' पर दोहरी नीति का भी आरोप।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने 31 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा और कहा कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करने से पहले उन्हें अपने शासनकाल के लिए जनता से माफी माँगनी चाहिए। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने भी सपा के राम मंदिर विरोध के इतिहास को लेकर तीखी आलोचना की।

मंत्री असीम अरुण के मुख्य आरोप

मंत्री असीम अरुण ने कहा कि भाजपा शासनकाल में देश और प्रदेश की कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। उनके अनुसार सपा के दौर में माफिया का खुला बोलबाला था और तत्कालीन सरकार अपराधियों के सामने बेबस नज़र आती थी। उन्होंने दावा किया कि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और 'माफिया मिट्टी में मिल रहे हैं।'

असीम अरुण ने जनता का योगी सरकार पर भरोसा लगातार बढ़ने का भी दावा किया। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो रही है।

चुनाव आयोग पर अखिलेश के आरोपों को बताया बेतुका

अखिलेश यादव द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को असीम अरुण ने 'बेतुका और आधारहीन' करार दिया। उन्होंने कहा कि देश में करीब 22 साल बाद विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) हो रहा है, जिससे बोगस मतदान पर रोक लगेगी। उनका तर्क था कि अखिलेश यादव इसलिए चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि मतदाता सूची से कथित घुसपैठियों के नाम हटाए जा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता की माँग — सपा शासन पर श्वेतपत्र लाएँ

भाजपा प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने माँग की कि अखिलेश यादव 2012 से 2017 के सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर श्वेतपत्र जारी करें। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदेश में करीब एक हज़ार दंगे हुए और माफिया का खुला प्रभाव था। गौरतलब है कि ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

त्रिपाठी ने सपा पर सनातन और राम मंदिर के मुद्दे पर दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, 'सपा का पूरा इतिहास ही राम मंदिर के विरोध का रहा है। आज जब अखिलेश यादव सनातन की बात करते हैं तो यूपी की जनता उनकी मंशा को अच्छे से समझती है।'

2027 चुनाव की पृष्ठभूमि में तीखी होती राजनीति

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता सपा और अखिलेश यादव को हराने के लिए तैयार है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान चुनावी तैयारी का हिस्सा हैं और दोनों पक्षों की ओर से जनमानस को प्रभावित करने की कोशिश है। सपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विधिवत प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस मतदाता सूची पुनरीक्षण, कानून-व्यवस्था के दावों और धार्मिक मुद्दों के इर्द-गिर्द और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नाम वास्तव में 'घुसपैठिए' हैं या वैध नागरिक — यही वह केंद्रीय विवाद है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री असीम अरुण ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
असीम अरुण ने कहा कि सपा के शासनकाल में माफिया का खुला राज था और सरकार अपराधियों के सामने बेबस थी। उन्होंने माँग की कि अखिलेश यादव कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी से पहले अपने शासनकाल के लिए जनता से माफी माँगें।
SIR क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण, मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है, जो कथित तौर पर करीब 22 साल बाद हो रही है। अखिलेश यादव ने इस प्रक्रिया पर आरोप लगाए हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि इससे बोगस मतदान रुकेगा।
भाजपा ने सपा से श्वेतपत्र क्यों माँगा?
भाजपा प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने माँग की कि अखिलेश यादव 2012 से 2017 के सपा शासन की कानून-व्यवस्था पर श्वेतपत्र जारी करें। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदेश में करीब एक हज़ार दंगे हुए और माफिया का प्रभाव खुलेआम था।
2027 यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का क्या दावा है?
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता सपा और अखिलेश यादव को हराने के लिए तैयार है। यह बयान चुनावी तैयारी और जनमत को प्रभावित करने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सनातन और राम मंदिर पर भाजपा ने सपा को क्यों घेरा?
डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि सपा का इतिहास राम मंदिर के विरोध का रहा है और जब अखिलेश यादव अब सनातन की बात करते हैं तो यूपी की जनता उनकी मंशा को समझती है। यह भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें सपा को 'अवसरवादी' साबित करने की कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
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