बीटीसी प्रमुख हाग्रामा मोहिलारी बोले — 'कॉकरोच जनता पार्टी एक राजनीतिक दल है'
सारांश
मुख्य बातें
बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी) के मुख्य कार्यकारी सदस्य हाग्रामा मोहिलारी ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को चिरांग जिले के बिजनी युवा महोत्सव में सार्वजनिक संबोधन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को एक राजनीतिक दल घोषित करते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब सीजेपी चुनाव आयोग के मतदाता सूची संशोधन अभ्यास के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी अभियान चला रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग कर रही है।
कार्यक्रम का संदर्भ
मोहिलारी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। यह आयोजन बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) की बिजनी जिला इकाई द्वारा बिजनी जिला खेल संघ के मैदान में आयोजित चार दिवसीय महोत्सव का तीसरा दिन था। इस अवसर पर उन्होंने अपने युवा दिनों और आंदोलन में शामिल होने की अपनी इच्छा का भी स्मरण किया।
मोहिलारी ने कहा, 'मैं भी आंदोलन में भाग लेना चाहता था। मैंने आंदोलन में शामिल होने के लिए सिर्फ दो दिन की पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग छोड़ दी।' यह बयान उनके व्यक्तिगत संघर्ष और बोडो आंदोलन से उनके जुड़ाव को दर्शाता है।
सीजेपी क्या है और विवाद क्यों
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक युवाओं के नेतृत्व वाला राजनीतिक संगठन है, जो चुनाव आयोग के मतदाता सूची संशोधन अभ्यास के खिलाफ सक्रिय अभियान चला रहा है। यह संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहा है। गौरतलब है कि बीटीसी जैसी क्षेत्रीय संस्थाओं की सीजेपी के प्रति यह तीखी प्रतिक्रिया इस दल के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव की ओर संकेत करती है।
गुवाहाटी और दिल्ली में हिरासत की घटनाएँ
सितंबर 2026 में, असम पुलिस ने गुवाहाटी में क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की बैठक से पहले सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और 30 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सभा आयोजित करने से रोकने के उद्देश्य से की गई थी, हालाँकि हिरासत में लिए गए सदस्यों को बाद में रिहा कर दिया गया।
14 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी एक घटना के बाद, रांका और पार्टी के एक अन्य प्रमुख नेता सौरभ दास को दिल्ली में पाँच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने पूर्व प्रतिज्ञाओं के उल्लंघन और अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
सीजेपी का रुख
पार्टी ने इन गिरफ्तारियों को अपने अभियान को दबाने की कोशिश बताया है और अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक दलों द्वारा सीजेपी को 'राजनीतिक दल' के रूप में चिह्नित करने की कोशिश उसके आंदोलन को असंवैधानिक रंग देने की रणनीति हो सकती है।
आगे क्या होगा
रांका और दास की न्यायिक हिरासत की अवधि 19 अक्टूबर 2026 तक की है। पार्टी के समर्थकों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम पर राष्ट्रीय राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हैं।