15 जुलाई 2026
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असम विधानसभा में हिमंत बिस्वा सरमा बोले — सत्र संस्थाएं और वैष्णव परंपरा अभिन्न, 3 लाख चाय बागान परिवारों को मिलेगा पट्टा

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असम विधानसभा में हिमंत बिस्वा सरमा बोले — सत्र संस्थाएं और वैष्णव परंपरा अभिन्न, 3 लाख चाय बागान परिवारों को मिलेगा पट्टा

सारांश

असम विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान CM हिमंत बिस्वा सरमा ने सत्र संस्थाओं और वैष्णव परंपरा की अभिन्नता पर ज़ोर दिया, 3 लाख चाय बागान परिवारों को पट्टे का वादा दोहराया और NPS-UPS पेंशन विकल्प का बचाव किया।

मुख्य बातें

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 15 जुलाई 2026 को विधानसभा में कहा कि सत्र संस्थाएं और वैष्णव परंपरा एक ही सांस्कृतिक धारा के अंग हैं।
अब तक करीब 30 हजार चाय बागान परिवारों को भूमि पट्टे मिल चुके हैं; इस वर्ष 1.5 लाख और परिवारों को पट्टे मिलेंगे।
अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 3 लाख परिवारों को भूमि पट्टे का लाभ मिलेगा।
सरकार ने OPS की माँग ठुकराई; NPS जारी रहेगी और UPS का विकल्प भी दिया गया है; 1.5 लाख से अधिक युवा पहले से NPS में हैं।
सैटेलाइट परियोजना का टेंडर पूरा, प्रोटॉन थेरेपी के आदेश शीघ्र और राज्य OTT प्लेटफॉर्म पर काम जारी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को असम विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य की सत्र संस्थाएं और वैष्णव परंपरा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि दोनों एक ही सांस्कृतिक धारा के अंग हैं। उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के भूमि अधिकार, पेंशन सुधार और सरकार की प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से बात की।

सत्र और वैष्णव परंपरा पर मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि अभी भी कुछ लोग इन दोनों के बीच के गहरे संबंध को नहीं समझ पाए हैं, लेकिन समय के साथ यह जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है कि लोग अब अधिक जागरूक हो रहे हैं। सत्र और वैष्णव परंपरा एक ही हैं, इसे समझने में कुछ समय लग सकता है। जब लोग इसे समझ जाएंगे, तब सभी गलतफहमियां दूर हो जाएंगी।' गौरतलब है कि असम में सत्र संस्थाएं — वैष्णव मठ परंपरा के केंद्र — सदियों से सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की धुरी रही हैं।

चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे — आंकड़े और वादे

मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पूर्व किए गए चाय बागान श्रमिक परिवारों को भूमि पट्टे देने के वादे को दोहराया और प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 30 हजार पट्टे वितरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष 1.5 लाख और परिवारों को पट्टे दिए जाएंगे, तथा अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 3 लाख परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा।

बजट में इस योजना का विशेष उल्लेख न होने पर उठे सवालों का जवाब देते हुए सरमा ने कहा कि चाय बागान समुदाय का कल्याण उनकी सरकार के लिए महज राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है।

पेंशन सुधार — OPS की माँग पर NPS और UPS का विकल्प

पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की विपक्षी माँग पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) चुनने का विकल्प भी दिया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा भर्ती किए गए 1.5 लाख से अधिक युवा पहले से NPS के दायरे में हैं और कई मामलों में यह योजना सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर लाभ दे सकती है।

सैटेलाइट परियोजना, प्रोटॉन थेरेपी और OTT प्लेटफॉर्म की प्रगति

मुख्यमंत्री ने निराशा जताई कि विपक्ष ने पिछले बजटों में की गई कई प्रमुख घोषणाओं की प्रगति पर कोई सवाल नहीं उठाया। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, प्रोटॉन थेरेपी सुविधा के लिए शीघ्र आदेश जारी किए जाएंगे और राज्य के OTT प्लेटफॉर्म पर भी तेज़ी से काम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब असम सरकार अपनी तकनीकी और स्वास्थ्य अवसंरचना को अगले स्तर पर ले जाने की कोशिश में है।

आगे क्या

चाय बागान पट्टा वितरण अगले दो से तीन वर्षों में 3 लाख परिवारों तक पहुँचने का लक्ष्य है। पेंशन विकल्प के तहत कर्मचारी NPS और UPS में से किसी एक को चुन सकेंगे। सरकार की प्रमुख परियोजनाओं की समयसीमा आने वाले महीनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कर्मचारी संगठनों की आपत्तियाँ अभी भी अनसुनी हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने सत्र संस्थाओं और वैष्णव परंपरा पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 15 जुलाई 2026 को असम विधानसभा में कहा कि सत्र संस्थाएं और वैष्णव परंपरा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, दोनों एक ही सांस्कृतिक धारा के अंग हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि समय के साथ लोगों में इस बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
असम में चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे कब तक मिलेंगे?
अब तक करीब 30 हजार पट्टे वितरित हो चुके हैं। इस वर्ष 1.5 लाख और परिवारों को पट्टे दिए जाएंगे और अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 3 लाख परिवारों को इस योजना का लाभ मिलने का लक्ष्य है।
असम में पुरानी पेंशन योजना (OPS) वापस आएगी?
नहीं, असम सरकार ने OPS की माँग ठुकराते हुए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) जारी रखने का निर्णय लिया है। हालांकि कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) चुनने का विकल्प भी दिया गया है।
असम की सैटेलाइट परियोजना और प्रोटॉन थेरेपी सुविधा की क्या स्थिति है?
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि सैटेलाइट परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और प्रोटॉन थेरेपी सुविधा के लिए शीघ्र आदेश जारी किए जाएंगे। राज्य के OTT प्लेटफॉर्म पर भी तेज़ी से काम जारी है।
असम में सत्र संस्थाएं क्या हैं और इनका वैष्णव परंपरा से क्या संबंध है?
सत्र संस्थाएं असम की वैष्णव मठ परंपरा के केंद्र हैं, जो 15वीं-16वीं शताब्दी में संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित भक्ति आंदोलन से उपजी हैं। मुख्यमंत्री सरमा का कहना है कि ये संस्थाएं और व्यापक वैष्णव परंपरा मूलतः एक ही हैं — दोनों के बीच कोई सांस्कृतिक या आध्यात्मिक विभाजन नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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